पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • 12 To 15 People Died In People's Hospital Due To Shortage, Hospital Management Said Supply Was Interrupted But No Death

पीपुल्स अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 10 की मौत:अपने स्टाफ की ही सुन लेते तो बच जातीं जानें, परिजनों की आवाज दबाने के लिए पुलिस और आरएएफ को बुलाया

भोपाल2 महीने पहले
एक पीड़ित ने अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने से परिजन की मौत की बात कही।
  • ग्वालियर में भी ऑक्सीजन की कमी से एक मरीज ने दम तोड़ा, उज्जैन में भी संकट

अब ऑक्सीजन की कमी से भोपाल के पीपुल्स अस्पताल में 10 की मौत हो गई। डॉक्टर बार-बार ऑक्सीजन कम होने की बात कह रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने सुना ही नहीं। जब गंभीर संक्रमित मरीजों की तड़प-तड़प कर मौतें होने लगीं तो परिजन हंगामा करे लगे। प्रबंधन ने ऑक्सीजन की जगह पुलिस बुला ली गई। बाद में आरएएफ तैनात करके मामले को दबाने की कोशिश की गई। डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी तब जाकर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। इधर, ग्वालियर में भी ऑक्सीजन की कमी के कारण सोमवार रात एक की जान चली गई। उज्जैन में ऑक्सीजन की कमी बताकर अस्पताल ने नए मरीज ही भर्ती करने से इंकार कर दिया।

अल सुबह से ही ऑक्सीजन सप्लाई स्लो पड़ने लगी थी। इसकी सूचना स्टॉफ ने संबंधित डॉक्टरों को दी। डॉक्टरों ने प्रबंधन से तत्काल ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए कहा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अपनों की हालत बिगड़ते देख परिजनों का सब्र टूट गया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों पर दबाव बनाना शुरू किया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ऑक्सीजन नहीं मिला तो वे हड़ताल पर चलने जाएंगे। हंगामे के बीच ही मौत का सिलसिला शुरू हो गया और फिर इसने रुकने का नाम नहीं लिया।

जहां से मिला सिलेंडर, वहां से ले आए

सोमवार अलसुबह अचानक से ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम हुआ और आईसीयू में भर्ती मरीजों को घबराहट होने लगी। इसे देख वार्ड का नर्सिंग स्टाफ चीखने-चिल्लाने लगा। अफरा-तफरी मच गई। कुछ नर्साें ने अपने परिचित मरीजों के परिजनों को सूचना दी तो वे दौड़ते-भागते कोविड डी-ब्लॉक के चैनल गेट पर आ गए। यहां ताला लगा था। वे चिल्लाए कि ऑक्सीजन खत्म हो गई है, हमें भीतर जाने दो।

उन्हें देखकर गेट पर मौजूद गार्ड घबराकर अंदर भाग गया। कुछ परिजन अपनों की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में रखे छोटे सिलेंडर उठा लाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ मरीज दम तोड़ चुके थे। इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इन्हें रोकने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी। पड़ताल में घटना की बड़ी वजह पता चली। वो ये कि जब ऑक्सीजन प्रेशर डाउन हुआ, तब पीपुल्स प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं दी। प्रशासन को जब सूचना मिली, तब उसने जंबो सिलेंडर अस्पताल पहुंचाए और प्रेशर मेंटेन कराया।

40 गंभीर और मरीजों को था संकट

यदि और देर हो जाती तो वार्ड में मौजूद 40 अन्य मरीजों की जान चली जाती। फिलहाल मामले में पीपुल्स प्रबंधन का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन की कमी से मौत की भ्रामक खबरें चल रही हैं। सप्लाई कुछ देर के लिए कम हुई थी, लेकिन थोड़ी देर में ठीक कर ली गई थी। दूसरी ओर, पीपुल्स से दिनभर एक-एक कर शव निकलते रहे। जब मीडियाकर्मी वहां पहुंचे, तो कुछ देर के लिए शवों को निकालने का काम रोक दिया गया। यहां से 10 शव सुभाषनगर विश्राम घाट पहुंचे। बता दें कि प्रदेश में बीते 13 दिन में 56 मरीज ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ चुके हैं।

दर्द की पहली आपबीती; पिता का ऑक्सीजन लेवल तेजी से नीचे गिरा, वो मेरे सामने तड़पकर चल बसे

मेरे पिता हाकम सिंह की हालत रविवार रात तक ठीक थी। सोमवार सुबह मैं आईसीयू में पापा के पास ही था। तभी 6 से 7 बजे के बीच अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा। मॉनिटर पर ओटू सप्लाई डाउन लिखा था और वीप की आवाज आ रही थी। मैं नर्साें के पास दौड़कर गया। पता चला कि ऑक्सीजन सप्लाई में दिक्कत है। मैं घबरा गया। नर्स से पूछा कि ऑक्सीजन सिलेंडर कहां है। इस पर उसने इशारा किया। मैं और वो खुद भी भागकर सिलेंडर लेने गए। लेकिन, जब लौटा तब पिता की जान जा चुकी थी। मेरे सामने ही वार्ड में कई दूसरे लोगों ने दम तोड़ दिया।

(जैसा कि सीहोर निवासी हाकम के बेटे रोहित ने भास्कर को बताया )

दर्द की दूसरी आपबीती... इमरजेंसी में रखा सिलेंडर लेकर भागी, लेकिन देर हो गई थी

मेरा 27 साल का भाई मासूम विश्वकर्मा, चाचा सुरेश विश्वकर्मा और पिता मदनलाल 15 अप्रैल से यहां भर्ती थे। तीनों ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। सुबह करीब 5 बजे भाई-पापा से बात हुई थी। लेकिन, छह बजे एक नर्स का फोन आया- ऑक्सीजन खत्म हो रही है। जल्दी आ जाओ। मैं इमरजेंसी में पहुंची और वहां रखे छोटे सिलेंडर उठाकर डी-ब्लॉक पहुंच गई। गेट पर ताला था, मैं चिल्लाई- ताला खोलो, लेकिन किसी ने नहीं सुना। कुछ देर बाद सूचना आई, तीनों की मौत हो गई। मेरा परिवार खत्म हो गया। कुछ समझ नहीं आ रहा, क्या करूं।

(जैसा कि पूजा विश्वकर्मा ने भास्कर को बताया)

पीपुल्स प्रबंधन से 6 सवाल : जवाब सिर्फ एक ही

1. ऑक्सीजन लो होने और शार्टेज की शिकायत प्रबंधन को नर्साें और डॉक्टर्स ने कितने बजे दी।

2. प्रबंधन ने ऑक्सीजन शार्टेज बहाल करने के लिए क्या किया। प्रशासन को फोन किया या नहीं?

3. जब ऑक्सीजन शार्टेज से वार्ड में मरीज तड़प रहे थे, उस वक्त ड्यूटी डॉक्टर्स कौन थे?

4. परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन शार्टेज से मौतें हुई हैं, क्या ये सही है? मौत का आंकड़ा क्या है।

5. श्मशान पर पीपुल्स से 10 शव पहुंचे हैं? क्या इन सबकी मौत ऑक्सीजन शार्टेज से हुई है?

6. ऑक्सीजन सप्लाई पीपुल्स में कौन-सी कंपनी करती है। क्या सप्लाई से वेंडर ने मना कर दिया था।

ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई

ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। ऑक्सीजन सप्लाई में दवाब कम होने के कारण इसकी उपलब्धता में कुछ समय के लिए कमी आई थी, जिसको थोड़ी देर में ठीक कर लिया गया था। मौतें नहीं हुई हैं। - डॉ. अनिल दीक्षित, डीन, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज, भोपाल

(सीधी बात; डॉ आलोक कुलश्रेष्ठ, अधीक्षक पीपुल्स अस्पताल)

अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर अभी कितने मरीज हैं?

150 से ज्यादा। 300 बेड रिजर्व हैं।

प्रशासन को कब जानकारी दी?

ऐसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई थी कि उनको जानकारी देना पड़े।

इन मरीजों को रोज कितनी ऑक्सीजन चाहिए, आज कितनी जरूरत थी? यहां दो-दो केएल के दो टैंक हैं। 70-80 जंबो सिलेंडर हैं। इतनी ही जरूरत होती है। आज कमी नहीं हुई।

ऑक्सीजन प्रेशर कम क्यों हुआ?

प्रेशर कम ज्यादा होता रहता है। इसकी मॉनीटरिंग टीम करती है।

प्रेशर कम होने या ऑक्सीजन सपोर्ट को बनाए रखने के लिए प्लान बी क्या था?

पहले प्रेशर मेंटेन करते हैं। फिर जंबो सिलेंडर लगाते हैं। वो ही आज भी किया गया था।

परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन का प्रेशर डाउन होने और ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की जान गई?

ऐसा कुछ नहीं हुआ है, रुटीन में कोविड में 10 से 15 और कभी-कभी 22 मौतें तक हुई हैं। ऑक्सीजन की कमी के चलते किसी की जान नहीं गई।

आज कितनी मौतें दर्ज हुई अस्पताल में?

डाटा मंगलवार सुबह आएगा देखकर बता पाऊंगा।

ग्वालियर : ऑक्सीजन की कमी से एक की एम्बुलैंस में मौत

यहां कोविड सेंटर सुविधा हॉस्पिटल में सोमवार रात 8 बजे ऑक्सीजन खत्म होने के बाद एक मरीज की मौत हो गई। यहां 18 मरीज थे जिनमें से 15 ऑक्सीजन पर थे। किल्लत होने पर हॉस्पिटल संचालक ने 15 मरीजों को रेफर कर दिया। इनमें ललितपुर के विरधा निवासी 50 वर्षीय राजेश दीक्षित ने दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के दौरान एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। संचालक का कहना है कि दो दिन से दिक्कत आ रही थी। मरीज की मौत की जानकारी नहीं है।

उज्जैन : अस्पताल ने मरीज भर्ती करने से ही कर दिया इंकार

आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में साेमवार रात 11 बजे ऑक्सीजन वाले मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। हॉस्पिटल के पास में केवल आधे घंटे की ऑक्सीजन ही बची थी। अधिकारी ऑक्सीजन की उपलब्धता नहीं करवा पाए। काॅलेज के डाॅ. सुनील वर्मा का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में 210 मरीज भर्ती है। इन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया है। नए मरीजों को भर्ती करेंगे तो पूर्व से भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन कैसे दे पाएंगे। उज्जैन में करीब 20 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है और केवल 8 से 10 टन उपलब्ध हो पा रही है।

खबरें और भी हैं...