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प्रदेश में डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य विभाग बेहाल:एमपी पीएससी से चयनित 130 डॉक्टरों ने ज्वाइनिंग नहीं दी, सौ डॉक्टर प्रशासनिक काम देख रहे

भोपालएक महीने पहले
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मप्र का स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी की समस्या से जूझ रहा है। जितने डॉक्टर काम कर रहे हैं, लगभग उतने ही और डॉक्टरों की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों मप्र लोकसेवा आयोग से चयनित 432 डॉक्टरों की पोस्टिंग की लेकिन एक माह बाद भी 130 डॉक्टरों ने ज्वाइनिंग नहीं दी। विसंगति यह भी है कि जिन डॉक्टरों को अस्पताल में बैठकर मरीज देखना है, उन्हें सरकार ने प्रशासनिक काम सौंप रखा है।

दांतों के डॉक्टर प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मशीनों की खरीदी का काम देख रहे हैं, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अधीन डॉक्टरों के 8904 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 4815 पद भरे हैं जबकि 4050 पद खाली हैं। कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं संभालने मेडिकल कॉलेजों के डाॅक्टरों को तैनात करना पड़ा था।

स्वास्थ्य संचालनालय में 24, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 12, आयुष्मान भारत योजना में 8, मप्र राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी में 6, मप्र हेल्थ सर्विस कार्पोरेशन में 2 डॉक्टर प्रशासनिक अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं। इस तरह लगभग 100 डॉक्टर विभाग के ही दफ्तरों में या डेपुटेशन पर प्रशासनिक कामकाज कर रहे हैं।

अलग-अलग कैडर का प्रस्ताव अधर में

विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग में क्लीनिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ के अलग-अलग कैडर बने हुए हैं। इस कारण वहां प्रशासनिक कामकाज में डाॅक्टरों की सेवाएं नहीं ली जाती। वहां डॉक्टर का काम सिर्फ इलाज करना ही है। मध्यप्रदेश में दोनों के अलग-अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव लंबे समय से अधर में है। यही कारण है कि डॉक्टरों को यहां प्रशासनिक कामकाज करना पड़ता है।

दो कैडर बनाने पर विचार

प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कैबिनेट से शिशु रोग विशेषज्ञों के पद मंजूर करा लिए गए हैं। तीन साल में 410 दंत चिकित्सकों की भर्ती होगी। प्रशासनिक पदों पर भी डाॅक्टरों से विभाग का ही काम लिया जा रहा है। फिर भी इस समस्या को दूर करने के लिए हम उनके क्लीनिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव कैडर बनाने जा रहे हैं।' -डॉ. प्रभुराम चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री, मप्र

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