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भोपाल में कुत्तों की नसबंदी पर 9 करोड़ रु. खर्च:नौ साल में 1.37 लाख नसबंदी, फिर भी बढ़ी आबादी; बच्चों को नोंच रहे कुत्ते

भोपाल18 दिन पहले

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नौ साल कुत्तों की नसबंदी पर 9 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इतनी भारी भरकम राशि से 1.37 लाख से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की गई। फिर भी उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। कुत्ते बच्चों को नोंच रहे हैं। हर रोज 30 से 40 लोग कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। हर इलाके में कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं, जो राहगीरों को काटने पीछे दौड़ लगा रहे हैं।

नसबंदी पर वर्ष 2013 से अब तक खर्च हुई राशि की जानकारी हाल ही में सामने आई है। पिपलिया जाहिर पीर में रहने वाले अभय सिंह मेहरा ने आईटीआई के तहत जब निगम से जानकारी मांगी तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

हर साल हजारों नसबंदी, फिर भी कुत्तों के झुंड
पिछले नौ साल में 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। हर साल हजारों नसबंदी की जाती है। फिर भी सड़कों पर कुत्तों के झुंड नजर आते हैं। यदि साल-दर-साल आंकड़ों की बात की जाए तो वर्ष 2013-14 से 2021-22 (30 अप्रैल तक) तक 1 लाख 37 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है।

भोपाल में 1 जनवरी 2022 को कुत्तों ने एक नन्हीं बच्ची को अपना शिकार बनाया था। यह मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा था।
भोपाल में 1 जनवरी 2022 को कुत्तों ने एक नन्हीं बच्ची को अपना शिकार बनाया था। यह मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा था।

इन जगह पर आतंक ज्यादा

  • कोलार के नयापुरा, गेहूंखेड़ा, ललितानगर में भी कुत्तों के झुंड हैं, जो हर आने-जाने वालों के पीछे दौड़ लगाते हैं।
  • अशोका गार्डन में भी कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई है।
  • कटारा हिल्स, वर्धमान ग्रीन पार्क, बीमाकुंज, करोंद इलाकों में भी आतंक है।
  • अवधपुरी, बीडीए कॉलोनी, करोंद, बैरागढ़ समेत कई इलाकों में झुंड नजर आ सकते हैं।

सबसे ज्यादा बच्चों को बना रहे शिकार
राजधानी में कुत्ते सबसे ज्यादा बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। पिछले महीने 17 अगस्त को बांसखेड़ी इलाके में एक सात साल की बच्ची को कुत्ते ने नोंच दिया था। उसकी आंख और मुंह बुरी तरह से जख्मी हो गया था। इसके तीन दिन पहले उसकी बड़ी बहन को भी कुत्ते ने काटा था। बच्ची करीब 15 दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती रही। अब जाकर वह घर लौटी है, लेकिन अब भी वह डरी-सहमी हुई है। इस घटना ने आवारा कुत्तों को लेकर जिम्मेदारों के दावों की पोल खोल दी थी। ऐसा नहीं है कि यह मासूम को शिकार बनाने का पहला मामला था। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसने जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर दिया था।

17 अगस्त को बांसखेड़ी में सात साल की बच्ची को कुत्ते ने नोंच दिया था। इससे बच्ची की आंख बुरी तरह से जख्मी हो गई थी।
17 अगस्त को बांसखेड़ी में सात साल की बच्ची को कुत्ते ने नोंच दिया था। इससे बच्ची की आंख बुरी तरह से जख्मी हो गई थी।
  • 1 जनवरी 2022 को बागसेवनिया इलाके में चार साल की बच्ची पर 5 आवारा कुत्तों ने अटैक कर दिया था। बच्ची के सिर, कान और हाथ में गहरे घाव हुए थे। चेहरे के साथ ही पेट, कमर और कंधे पर भी चोट लगी थी। इसके बाद काफी हंगामा मचा था। हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेकर कलेक्टर और निगम कमिश्नर से जवाब मांगा था। वहीं, CM शिवराज सिंह चौहान ने भी नाराजगी जाहिर की थी।
  • 26 फरवरी को ई-6 वर्धमान ग्रीन पार्क के पास अशोका गार्डन में घर के सामने खेल रही 6 साल की बच्ची को कुत्तों ने घेर लिया था। बच्ची निमिशा को 3 से 4 कुत्ते नोंचने लगे थे। तभी पड़ोसियों और परिजनों ने दौड़कर कुत्तों को भगाया था। बावजूद कुत्तों ने पैर में काट लिया था। गहरा जख्म होने से निमिशा को प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
  • तीन महीने पहले द्रोणांचल मिलिट्री एरिया में सात साल के बच्चे पर जंगली जानवर के हमले का मामला सामने आया था। हालांकि, बाद में हुई जांच में पता चला था कि हमला किसी खूंखार जानवर ने किया था।

कई बार बड़ा मुद्दा बनी घटनाएं
राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं कई बार बड़ा मुद्दा बन चुकी हैं। जनवरी में हुई घटना के मामले को हाईकोर्ट ने भी संज्ञान में लिया था। वर्तमान में नीलबड़ में सेंटर है। जहां पर कुत्तों की नसबंदी की जाती है। हालांकि, नसबंदी के बाद कुत्ते को वही छोड़ दिया जाता है, जहां से उसे पकड़ा जाता है। इस कारण लोगों की समस्या बढ़ी हुई रहती है।