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ईयरफोन और ईयरबड्स के उपयोग से बढ़ रहे मरीज:हर महीने सुनने में परेशानी वाले 150 मरीज, इनमें 70% युवा, दिक्क्त की बड़ी वजह है ऑनलाइन क्लासेस, मीटिंग और वेब सीरीज

भोपाल3 महीने पहले
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सुनने में परेशानी के मामले बढ़े - Dainik Bhaskar
सुनने में परेशानी के मामले बढ़े

सुनने में परेशानी के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। इसकी वजह- कोरोना में लगे लॉकडाउन के कारण मोबाइल का उपयोग बढ़ना है। दरअसल, युवाओं में ईयरफोन और ईयरबर्ड्स के लगातार उपयोग से सुनने की क्षमता 30 से 50 डेसीबल तक कम हो रही है। इसकी वजह कंपनियों द्वारा घंटों मीटिंग, सेमिनार, स्कूलों, कोचिंग की घंटों चलने वाली ऑनलाइन क्लासेस और वेब सीरीज हैं। हालात यह हैं कि शहर के प्रमुख ईएनटी स्पेशलिस्टों के पास हर महीने 150 से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं, इसमें 75 फीसदी युवा हैं और 10% बच्चे हैं, जिनकी उम्र 15 साल से कम है। हमीदिया के ईएनटी विभाग के स्पेशलिस्ट डॉ. यशवीर जेके ने बताया कि एक महीने में 50 से ज्यादा मरीज बहरेपन का इलाज करवाने आ रहे हैं। पूछताछ करने पर ज्यादातर युवाओं का ये ही जवाब होता है कि लंबे समय से मोबाइल फोन में ईयरफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते यह परेशानी बढ़ रही है।

तेज आवाज से हार्ट और ब्रेन काे खतरा भी

डॉ. जेके ने बताया कि कोई मीटिंग, सेमिनार या फिर ऑनलाइन क्लासेस हो तो उसमें 30 मिनट का ब्रेक जरूर होना चाहिए। तेज आवाज म्यूजिक सुनने से हार्ट और ब्रेन को इनडायरेक्ट खतरा हो सकता है। वहीं ईयर फोन पर लंबे समय तक लाउड म्यूजिक सुनने से कान की नसें डेड हो जाती हैं।

बहरेपन के लक्षण

  • कान में सीटी की आवाज सुनाई देना।
  • कम सुनाई देना {फोन पर बात करने में परेशानी
  • चक्कर आना, सनसनाहट, नींद न आना, सिर दर्द, कान में दर्द।
  • चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और ब्लड प्रेशर बढ़ना। ऐसे बच सकते हैं
  • महीने में एक बार कानों की जांच करवाएं।
  • लंबे समय तक फोन पर बात नहीं करें।
  • बहुत जरूरत होने पर ही ईयरबर्ड्स या ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
  • अगर आपका प्रोफेशन कॉल सेंटर या फोन पर काम करने का है तो हर घंटे 10 मिनट का ब्रेक लें, फ्रेश एयर में जाएं।

भास्कर EXPLAINER- साल में एक बार जरूर कराएं जांच

Q. यदि किसी को कम सुनाई दे रहा है इसका पता कैसे लगाया जा सकता है? पीटीए सुनने की जांच को प्योर टोन ऑडियोमीटरी कहते हैं। इनसे किस प्रकार का बहरापन है ये पता चल जाता है। Q. क्या सभी को ये जांच कराना चाहिए? जरूरी नहीं, लेकिन ऐसे लोग जो बहुत ज्यादा शोर वाले इलाके में काम करते हैं। उन्हें साल में एक बार ये जांच कराना चाहिए। Q. कितने डेसीबल के ऊपर सुनाई न दे तो बहरापन हो जाता है? माइल्ड में 30 डेसीबल, माॅडरेट 30 से 60 डेसीबल, सीवियर में 60 डेसीबल के ऊपर और प्रोफाउंड में स्थाई बहरापन हो जाता है। Q. आम लोग एक-दूसरे से जो बातचीत करते हैं उसे कैसे मापा जाता है? आम लोग जो एक-दूसरे से बात करते हैं वो 500 से 3000 फ्रीक्वेंसी की होती है।

( ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ एसपी दुबे और डॉ. राजबाला भदौरिया के मुताबिक)

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