प्रदेश में खाद की डिमांड बढ़ते ही कालाबाजारी शुरू:1200 की जगह 1500 रुपए में बेच रहा था डीएपी खाद की बोरी, पुलिस ने 132 जब्त कीं

भोपाल2 महीने पहले
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  • भिंड में व्यापारी के खिलाफ एफआईआर

रबी सीजन की बुवाई शुरू होते ही प्रदेश में डीएपी और यूरिया खाद की डिमांड अचानक बढ़ गई है। इससे खाद की किल्लत होने लगी है। किसानों को डीएपी खाद की एक बोरी 25% ज्यादा कीमत पर खरीदनी पड़ रही है। डिमांड ज्यादा होने के चलते इसकी कालाबाजारी होने लगी है। बुधवार को भिंड जिले के गोरमी कस्बे में एक गोदाम व्यापारी संजय जैन के यहां पुलिस ने छापा मारा।

व्यापारी 1200 रु. की डीएप की बोरी 1500 रु. में बेच रहा था। यहां से 120 बोरी डीएपी जब्त की गई। पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत केस दर्ज किया है। पूछताछ में पता चला है कि व्यापारी उत्तर प्रदेश से बोरिया लाया था।

कितनी खाद चाहिए...

प्रदेश में रबी के सीजन की प्रमुख फसलों में गेहूं, चना, सरसों, मसूर और मटर की बुवाई के लिए 9 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 18 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। अभी स्टॉक में खाद नहीं है। इसलिए सरकार किसानों को सिंगल सुपर फास्फेट के उपयोग की सलाह दे रही है। इसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। इसमें 1 से 3% ही फॉस्फेट था। जबकि ये 16 फीसदी होना चाहिए अन्यथा पैदावार 30% तक कम हो जाती है।

डीएपी की डिमांड इसलिए ज्यादा

इसमें 46% फॉस्फेट, 18% नाइट्रोजन है। फॉस्फेट फसल की पैदावार और दाना मजबूत करता है। नाइट्रोजन फसल की बढ़त में उपयोगी है। वहीं, यूरिया में 46% नाइट्रोजन रहता है जो सिर्फ फसल की बढ़त में उपयोगी है।

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