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भास्कर पड़ताल:12 दिन में 1.60 लाख रेमडेसिविर आए; 1 लाख सिर्फ 5 जिलों में बंटे, बंटवारे में भेदभाव का आरोप

भोपालएक महीने पहले
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शिवपुरी, सिंगरौली जैसे कई जिलों में संक्रमण दर 38% तक, लेकिन इन्हें एक भी रेमडेसिविर नहीं। - Dainik Bhaskar
शिवपुरी, सिंगरौली जैसे कई जिलों में संक्रमण दर 38% तक, लेकिन इन्हें एक भी रेमडेसिविर नहीं।
  • केंद्र से 200 टोसिलिजुमैब इंजेक्शन मिले, जो सात शहरों में खप गए, 45 जिलों को एक भी नहीं मिला
  • प्रदेश में 30 हजार संक्रमित आईसीयू में, फिर भी जान बचाने वाले इंजेक्शनों के बंटवारे में बड़ा भेदभाव

प्रदेश में अभी 9204 कोरोना संक्रमित आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि 21431 मरीज ऑक्सीजन पर जिंदा हैं। ऐसे मरीजों को बचाने और संक्रमण को रोकने के लिए जो इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, उनके बंटवारे में बड़ी खामी है।

भास्कर के पास मौजूद तथ्यों के मुताबिक 23 अप्रैल से 4 मई तक राज्य सरकार ने 7 कंपनियों से करीब 1.60 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे, लेकिन इनमें से एक लाख से ज्यादा इंजेक्शन सिर्फ भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में बंट गए।

कई जिलों के निजी अस्पतालों को एक भी इंजेक्टशन नहीं मिला। यही हाल 40 हजार रुपए वाले इंजेक्शन टोसिलिजुमैब का है। तीन दिन पहले केंद्र सरकार से इसके 200 डोज मिले, लेकिन इसमें से 80 डोज भोपाल, 100 इंदौर, चार रीवा, कुछ ग्वालियर और एक-एक डोज दो से तीन जिलों में गए। बाकी 45 जिलों को कुछ भी नहीं मिला। जबकि छोटे शहरों, जिलों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। शिवपुरी, सिंगरौली, निवाड़ी, दतिया और टीकमगढ़ जिले तो ऐसे हैं, जहां 30 से लेकर 38% तक पॉजिटिविटी रेट है। जबकि भोपाल, इंदौर सहित 31 जिलों में यह 20% या इससे थोड़ी ज्यादा है।

सरकार का तर्क... एक्टिव केस 90 हजार तक, इंजेक्शन सिर्फ 10 से 15% मरीजों को ही मिले

सरकार का कहना है कि प्रदेश में 23 अप्रैल से नए केस की संख्या 13 हजार से 12500 के बीच बनी हुई है। एक्टिव केस भी 80 से 90 हजार के बीच हैं। ऐसे में डेढ़ लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन के बंटवारे की तुलना करें तो बमुश्किल 10 से 15% को ही यह इंजेक्शन मिला है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक मिले इंजेक्शन का 54% सरकारी अस्पतालों में और 46% निजी क्षेत्रों को दिया गया है।

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