• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • 167 Kidney Transplants In Bhopal In Six Years, 116 Women Among Kidney Donors, 80 Of Them Mothers

सबसे आगे मां:छह साल में भोपाल में 167 किडनी ट्रांसप्लांट, किडनी देने वालों में 116 महिलाएं, इनमें 80 माताएं

भोपाल11 दिन पहलेलेखक: रोहित श्रीवास्तव
  • कॉपी लिंक
लाइव किडनी ट्रांसप्लांट- इंदौर में 75% और राजधानी में 70% ऑर्गन महिलाओं ने दिए। - Dainik Bhaskar
लाइव किडनी ट्रांसप्लांट- इंदौर में 75% और राजधानी में 70% ऑर्गन महिलाओं ने दिए।

किडनी, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी में अपनों को नया जीवन देने के मामले में महिलाएं, पुरुषों से काफी आगे हैं। इंदौर में 75% और भोपाल में 70% किडनी और लिवर की लाइव ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए उन्हें ऑर्गन पत्नी, भाभी, मां, बहन और बेटी ने दिए हैं।

चोइथराम हॉस्पिटल के डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेस डॉ. सुनील चांदीवाल के अनुसार इंदौर में 2014 से 2021 के बीच 704 और भोपाल में 2015 से 2021 के बीच 167 लाइव किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई हैं। इंदौर में 528 और भोपाल में 116 महिलाओं ने किडनी डोनेट की। भोपाल में 80 केस ऐसे हैं, जिनमें मां ने बच्चों को किडनी दी है।

यह खुलासा दोनों शहरों में हुई लाइव किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के डोनर्स के जेंडर डेटा की पड़ताल में हुआ है। बंसल अस्पताल के डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में पिछले 8 साल में 871 किडनी लाइव ट्रांसप्लांट सर्जरी हुईं, जिन्हें परिजनों ने किडनी डोनेट की है।

कौशल्या सिंह (59), रीवा- कोरोना काल में न इलाज मिल पा रहा था, न डोनर; मां ने जिंदगी दी

प्रसून सिंह 32 साल के हैं। उनके हाथ-पैरों में सूजन रहती थी। पिछले साल जांच कराई तो पता चला कि दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। कोरोना काल में न इलाज सही मिल पा रहा था, न डोनर। अंत में कौशल्या सिंह ने बेटे को किडनी देने का फैसला किया। बंसल अस्पताल में बेटे को किडनी प्रत्यारोपित की गई। प्रसून से इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की डिग्री ली है।

गीता पटवा (67), दानिश कुंज- 67 साल की उम्र में किडनी देना रिस्क था, लेकिन बेटे के लिए सब मंजूर था

37 साल के जगदीश पटवा को 2013 में पता चला कि एक किडनी खराब है। इलाज चला, लेकिन धीरे-धीरे उसकी दूसरी किडनी भी खराब होने लगी। जिंदगी डायलिसिस पर चल रही थी। पत्नी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हुआ तो 67 साल की मां ने किडनी देने की बात कही। डॉक्टर ने कहा- रिस्क है। लेकिन, बेटे के लिए मां ने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। मां की किडनी से जगदीश की जिंदगी अब पटरी पर है।

निर्मला राणा (50), करोंद- एक किडनी है; वह भी खराब थी, तीन भाई और भी हैं, लेकिन मां ने दी किडनी

4 बेटे हैं। दूसरे नंबर के 26 साल के वेदप्रकाश की एक किडनी है और वह भी खराब थी। पिता किडनी देना चाहते थे, लेकिन उनकी किडनी भी सिर्फ 60% काम कर रही थी। परिवार के अन्य सदस्य किसी न किसी कारण से किडनी देने में असमर्थ थे। मां को कई लोगों ने मना किया, किडनी मत दो बच्चे छोटे हैं, लेकिन वे नहीं मानीं। 2017 में बंसल अस्पताल में ऑपरेशन हुआ। मां और बेटे दोनों स्वस्थ हैं।

5 साल में 44 ब्रेन डेड मरीजों ने दी 119 लोगों को जिंदगी

प्रदेश में पांच साल (2014-2019) में भोपाल और इंदौर में 44 ब्रेन डेड मरीजों की किडनी, लिवर, लंग, हार्ट डोनेट कर उनके परिजनों ने आर्गन फेलियर के चलते जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे 119 लोगों को जीवन दिया है। इससे 67 किडनी, 34 लिवर और 16 हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में हुई हैं। इसके अलावा ब्रेन डेड मरीज के दो फेफड़े प्रदेश के बाहर के अस्पताल में भर्ती मरीज की ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए भेजे गए हैं।

खबरें और भी हैं...