चोरी और ऊपर से सीनाजोरी:एक रात में 17 बाइक चोरी, काॅल कर पैसे बुलाए और लौटा दी गाड़ी

भोपाल4 महीने पहले
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बदमाशों की शर्त- थाने में शिकायत की तो गाड़ी भूल जाना। - Dainik Bhaskar
बदमाशों की शर्त- थाने में शिकायत की तो गाड़ी भूल जाना।

अब शहर में बाइक किडनैपिंग का नया ट्रेंड सामने आ रहा है। इस ट्रेंड की खासियत यह है कि वाहन चोर सीधे पुलिस को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि ये चोरी की वारदातें रात के वक्त होती है। जबकि पुलिस का दावा है कि इस दौरान पूरी मुस्तैदी से गश्त होती है। जिनके साथ चोरी की वारदात हुई हैं।

वे भी किसी भी तरह के मामले में पड़ने के बजाय सीधे ही बदमाशों से डील कर लेते हैं, क्योंकि उनका विश्वास है कि पुलिस उनके वाहनों को खोज नहीं पाएगी। इसके लिए वाहन मालिकों को अपने ही वाहन को बदमाशों से छुड़ाने के लिए 15 से 30 हजार रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। एक हकीकत यह भी है कि तमाम सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद भी पुलिस आरोपियाें तक नहीं पहुंच पा रही है।

शहर में कंजर गिरोह सक्रिय... पुलिस एक सप्ताह बाद भी खाली हाथ

पिछले मंगलवार की रात पुलिस रात्रि गश्त पर थी। लोग घरों में चैन की नींद सो रहे थे। इस बीच पुलिस को खुली चुनौती देते हुए कंजर गिरोह के 7-8 सदस्यों की टीम बरखेड़ा बोंदर, परवलिया व मुबारकपुर और ईंटखेड़ी के चांदपुर में घरों के बाहर खड़ी बाइक चोरी करके लोडिंग वाहन में लाद रहे थे। एक घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में ये युवक गाड़ियों को उठाकर ले जाते कैद भी हुए हैं।

चोरों ने बरखेड़ा बोंदर से एक बुलेट समेत 4 बाइक चोरी कीं। चांदपुर से छह, परवलिया गांव से चार और मुबारकपुर से तीन बाइक उठाईं। इनमें एक बाइक सब इंस्पेक्टर की भी है। इस तरह बदमाश एक ही रात में 17 बाइक उठाकर ले गए। सुबह जब लोगों की नींद खुली तो घर के बाहर से गाड़ियां गायब थी। दोपहर में जब चोरों का काॅल आया तो पता चला कि गाड़ियां कंजर गिरोह चोरी करके सुजालपुर ले गए हैं।

चार गाड़ियों के सवा दो लाख रुपए लेकर शुजालपुर आ जाएं

कंजर गिरोह के सदस्यों ने बरखेड़ा बोंदर में बुलेट के मालिक को काॅल किया और बताया कि यदि गाड़ी वापस चाहिए तो पुलिस में शिकायत मत करना। उसका कहना था कि वे चार गाड़ियों के सवा दो लाख रुपए लेकर शुजालपुर आ जाएं। इसी तरह उन्होंने अन्य वाहन मालिकों से संपर्क किया और 20 से 30 हजार रुपए प्रति गाड़ी के हिसाब से रकम लेकर आने को कहा। इसके बाद पैसे देकर वे अपनी गाड़ियां ले आए। गाड़ी मिलने के बाद किसी ने रिपोर्ट भी नहीं लिखाई।

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