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सिग्नल फैक्ट्री:भोपाल में 18 महिला इंजीनियर बना रहीं सिग्नल, इन्हीं से चेन्नई, हैदराबाद और लखनऊ जैसे 100 शहरों का होता है ट्रैफिक कंट्रोल

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबोलिया
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2008 में गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में लगाई गई थी वायरलेस टेक्निक के सिग्नल बनाने वाली फैक्ट्री। - Dainik Bhaskar
2008 में गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में लगाई गई थी वायरलेस टेक्निक के सिग्नल बनाने वाली फैक्ट्री।

भोपाल में बने ट्रैफिक सिग्नलों से चेन्नई, हैदराबाद, लखनऊ समेत देश के 100 शहरों का ट्रैफिक कंट्रोल हो रहा है। गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सिग्नल फैक्ट्री में 18 महिला इंजीनियर हैं। सभी बीई इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन डिग्री होल्डर हैं।

फैक्ट्री मैनेजर भी इंजीनियर दिव्या यादव हैं। यहां कुल 50 अधिकारी-कर्मचारी हैं। डायरेक्टर रेजी के मैथ्यू के मुताबिक 2008 में फैक्ट्री स्थापित की थी। हम सिग्नल असेंबल नहीं करते, बल्कि डिजाइन करके यहीं बनाते हैं। महीने भर में 10 सिग्नल की मैन्युफैक्चरिंग करते हैं।

रिसर्च के बाद भोपाल में ही किया इस तकनीक का आविष्कार
दिव्या के मुताबिक चौराहों पर लगे सिग्नल के खंभे किसी भी वायर से नहीं जोड़े जाते। चौराहे पर निश्चित स्थान पर लगाए गए एक बॉक्स के अंदर एक डिवाइस होती है यही इसका हॉट होती है। इसे मास्टर कंट्रोल कहा जाता है। इसमें एक ट्रांसमिशन लगा होता है। इसके जरिए चारों खंभों पर यह डाटा ट्रांसमिट करता है।

सॉफ्टवेयर के जरिए इसका कंट्रोल ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम से होता है। वहां से सिग्नल को चालू या बंद किया जा सकता है। टाइमिंग कम या ज्यादा की जा सकती है। किसी तरह का मैसेज भी दे सकते हैं। 4 साल रिसर्च की गई, तब जाकर इस तकनीक का आविष्कार भोपाल में ही किया गया।

दिलचस्प कहानी- यहां से मिला आइडिया
ट्रैफिक सिग्नल की फैक्ट्री स्थापित करने के पीछे भी बड़ी दिलचस्प कहानी है। मैथ्यू बताते हैं कि एक बार मैं किसी काम से लखनऊ गया। अपनी कार से जब मैं एक चौराहे से गुजर रहा था तो सिग्नल बंद थे, ट्रैफिक बहुत अस्त-व्यस्त था। करीब डेढ़ घंटे वहां फसा रहा।

कार में बैठे-बैठे मेरे दिमाग में आइडिया आया कि यदि सिग्नल अच्छे और एडवांस टेक्नोलॉजी के हों तो ट्रैफिक भी व्यवस्थित हो सकता है। उस वक्त इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी नहीं थी। बस यहीं से यह आइडिया आया और मैंने भोपाल में ट्रैफिक सिग्नल बनाने का कारखाना खोल लिया।

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