सिनेमाघर खुले; आधी सीटें, पूरी फुल:19 महीने बाद; 24 स्क्रीन पर एक दिन में 13 हजार लोगों ने देखी मूवी

भोपाल21 दिन पहले
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राजधानी के सिनेमाघरों में लंबे समय बाद रौनक दिखाई दी है। कोविड गाइडलाइन और 50 फीसदी क्षमता के साथ शुरू हुए थिएटर्स में 19 महीने बाद दर्शक सपरिवार नजर आए। हालांकि इसके पहले दो बार थिएटर ओपन हुए, लेकिन दोनों ही बार सप्ताह भर चलने के बाद बंद हो गए। अक्षय कुमार की बेलबॉटम फिल्म आई तो जनता ने उत्साह नहीं दिखाया। इस बार मामला अलग है।

बड़ी स्टार कास्ट वाली सूर्यवंशी फिल्म का लोगों को इंतजार था। जैसे ही यह फिल्म रिलीज हुई तो जनता ने थिएटर की तरफ रुख कर दिया। सिर्फ शुक्रवार को शहर के 24 स्क्रीन में 13 हजार लोगों ने मूवी देखी। अच्छी बात यह है कि इस बार लोग फिल्म देखने तो आ ही रहे हैं।

साथ में वे कोविड गाइडलाइन का भी पालन करते दिखाई दिए। यदि गलती से कोई बिना मास्क आ रहा है तो उन्हें तत्काल बाहर जाकर मास्क खरीदने के लिए कह दिया जाता है। फिलहाल, शहर के 36 स्क्रीन में से 24 स्क्रीन में सूर्यवंशी मूवी लगी है और तीन स्क्रीन पर एटरनल्स मूवी दिखाई जा रही है।

शहर के सिंगल और मल्टीप्लेक्स सिनेमाघर में हैं कुल 36 स्क्रीन

  • शहर के डीबी सिटी, आशिमा, औरा, पीपुल्स और केपिटल मॉल में एक से अधिक स्क्रीन हैं। इनमें से डीबी सिटी में थिएटर बंद रहे।
  • सिंगल स्क्रीन की बात करें तो ज्योति, रंगमहल, अल्पना, राज और भारत टॉकीज में ही मूवी लगाई गईं। इन सभी में सूर्यवंशी देखने के लिए लोग पहुंचे।
  • शाम 6 बजे तक मिली रिपोर्ट के अनुसार शहर के सभी 24 स्क्रीन के आखिरी शो भी फुल थे।
  • एक स्क्रीन में औसत 150 ने मूवी देखी और पूरे दिन में 4 शो हुए। इटरनल्स मूवी में भीड़ कम रही।

कोरोनाकॉल के 15 में से 5 महीने आधी क्षमता से ही खुले थे और फिर बंद हो गए

भोपाल के थिएटर पहली लहर शुरू होने के बाद मार्च 2020 में बंद हुए थे और फिर 200 दिन बाद यानी अक्टूबर 2020 में शुरू किया गया था। इसके बाद मार्च के आखिरी सप्ताह में फिर बंद हो गए। जुलाई 2021 में फिर से इन्हें 50% क्षमता से खोलने के निर्देश दिए, लेकिन सिनेमा संचालक तैयार नहीं हुए, क्योंकि इस अवधि में उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी।

भोपाल में एकल और मल्टीप्लेक्स सिनेमा में कुल मिलाकर 36 स्क्रीन हैं। इनमें 400 से अधिक वर्कर काम करते थे। कर्फ्यू की घोषणा होते ही सभी ने थिएटर बंद कर दिए और करीब 300 लोगों को नौकरी से बाहर कर दिया। मॉल्स में तो हाउस कीपिंग वालों के पास ही सारा काम रहता है तो उन्हें दूसरे काम में इस्तेमाल कर लिया, लेकिन एकल सिनेमाघर में दूसरा कोई काम नहीं था।

सिनेमा संचालक दीपक सिंघल बताते हैं, लंबे समय बाद यह रौनक दिखाई दी है, लेकिन इसे कायम रखना चुनौती होगी। अब यदि अगले कुछ महीने बड़ी फिल्में रिलीज होंगी तो सिनेमा में वापस पुराना माहौल बन जाएगा।

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