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भोपाल में बढ़ता ब्लैक फंगस का खतरा:हमीदिया में तीन दिन में भरा 20 बिस्तर का म्यूकर वार्ड, नॉन म्यूकर 10 बेड में से 5 पर भी ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती

भोपालएक महीने पहले
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हमीदिया अस्पताल में ईएनटी विभाग में म्यूकर वार्ड में भर्ती मरीज। - Dainik Bhaskar
हमीदिया अस्पताल में ईएनटी विभाग में म्यूकर वार्ड में भर्ती मरीज।
  • कोविड वार्ड में भर्ती हैं ब्लैक फंगस के 9 मरीज, कुल 34 मरीज भर्ती हैं

कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों को ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) तेजी से चपेट में ले रहा है। राजधानी में भी ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में तीन दिन पहले शुरू 20 बिस्तर का म्यूकर वार्ड तीन दिन में ही फुल हो गया। खास है, यहां नॉन म्यूकर मरीज के लिए आरक्षित 10 बेड में से 5 बेड पर ब्लैक फंगस के मरीजों को भर्ती करना पड़ा है।

हमीदिया में 9 मरीज कोविड वार्ड में भर्ती हैं। ये सभी कोरोना के साथ ब्लैक फंगस से पीड़ित हैं। हमीदिया में शनिवार तक ब्लैक फंगस के कुल 34 मरीज कोविड और नॉन कोविड वार्ड में भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में रोज 5 मरीज ब्लैक फंगस के आ रहे हैं। अब चिंता सता रही है, यदि ईएनटी के नाॅन म्यूकर मरीज आते हैं, तो उनको कहां भर्ती करेंगे।

दवा का भी टोटा

ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए दवा का भी टोटा है। जरूरी लाइपोसोमल एम्फोटेरिसन-बी इंजेक्शन अस्पताल और बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसके लिए विभाग की तरफ से डिमांड भी भेजी गई है, लेकिन अभी इसकी खरीदी प्रक्रिया ही चल रही है। एक अधिकारी ने बताया कि यह बीमारी नई नहीं है। इसके मरीज पहले साल में एक या दो ही आते थे। इसके अनुसार कंपनियां दवा का उत्पादन करती थीं। कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ने के बाद ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। यही कारण है कि बाजार में दवा की शाॅर्टेज हो गई।

इंजेक्शन की कालाबाजारी भी शुरू हो गई

ब्लैक फंगस मरीजों के बढ़ने के साथ ही लाइपोसोमल एम्फोटेरिसन-बी इंजेक्शन की मांग भी बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार लाइपोसोमल एम्फोटेरिसन-बी इंजेक्शन की एक वॉयल 50 एमजी की आती है। एक मरीज को एक दिन में चार से पांच वाॅयल की जरुरत होती है। अब मार्केट में यह दवा ही नहीं मिल रही है। इसके कारण इंजेक्शन की कालाबाजारी भी बढ़ गई है। ऐसे ही एक मामले में भोपाल में दवावाला मेडिकल स्टोर्स को ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने सील किया। स्टोर संचालक मोबाइल पर ऑर्डर लेकर इंजेक्शन बेच रहा था। टीम ने निरीक्षण किया तो वह खरीदी-ब्रिकी का रिकॉर्ड नहीं दिखा सका। इसके बाद मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया।

हमीदिया के ईएनटी विभाग की विभागाध्यक्ष स्मिता सोनी ने बताया कि ब्लैक फंगस नाक के ऊपर काली पपड़ी जम जाना नाक-चेहरे पर सूजन, आंख का लाल होना और सिर दर्द होने से पहचाना जा सकता है। इस तरह के लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और ब्लैक फंगस को आगे बढ़ने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि इसका सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज मरीज को हो रहा है। उनका सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।

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वहीं, उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस होने का कारण मरीजों को ज्यादा स्टेरॉयड लेने से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। जिसके बाद मरीज को ब्लैक फंगस अपनी चपेट में ले लेता है। इस कारण माइल्ड सिम्टम्स हैं, तो दवा का ओवर डोज न लें। यह बीमारी अधिकतर पहले से शुगर से पीड़ित मरीजों को चपेट में ले रही है।

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