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तेजी से बड़ रहा फंगल:भाेपाल में ब्लैक फंगल के 20 मरीज और मिले, नया वॉर्ड शुरू; डरे नहीं, लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें

भोपालएक महीने पहले
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एम्स के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया घर में स्टेराॅयड लेकर काेराेना से जीतने वालाें काे इसका खतरा ज्यादा। - Dainik Bhaskar
एम्स के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया घर में स्टेराॅयड लेकर काेराेना से जीतने वालाें काे इसका खतरा ज्यादा।

राजधानी में ब्लैक फंगस के 20 और मरीज मिले। अब शहर के विभिन्न अस्पतालों में इसके 100 मरीज भर्ती हैं। जबकि 8 मरीजाें की सर्जरी की गई है। इनकी हर दिन बढ़ती संख्या को देखते हुए रविवार को हमीदिया अस्पताल में 30 बेड का नया वार्ड शुरू कर दिया गया है। गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि हमीदिया में ब्लैक फंगस के 34 मरीज भर्ती हैं। इनमें 31 रैफर होकर आए हैं। वहीं, होशंगाबाद रोड के एक निजी अस्पताल में रीवा की एक डॉक्टर का भी इलाज चल रहा है।

इस बीच, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होकर कोविड का इलाज कराने वाले मरीजों की अपेक्षा होम आइसोलेशन में स्टेराॅयड दवाएं लेकर ठीक हुए मरीजों को ब्लैक फंगल के संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसकी वजह अस्पताल की अपेक्षा लोगों के घरों में फंगस और उसके स्पोर की मौजूदगी पर्यावरण में ज्यादा होना है।
एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता ब्लैक फंगल
डॉ. सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस कोरोना, स्वाइन फ्लू की तरह एक से दूसरे व्यक्ति को नहीं होता। इसलिए ब्लैक फंगस के मरीज को नॉन कोविड वार्ड में भर्ती किया जा सकता है। इसलिए एम्स में ऐसे मरीजों के लिए अलग से वार्ड नहीं बना रहे।

डरे नहीं, लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें

क्या है ब्लैक फंगस?
ये एक फंगल डिसीज है। जो म्यूकरमायोसिस नाम के फंगाइल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो इम्यूनिटी को कम करती हो या शरीर के दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों।
ये शरीर में कैसे पहुंचता है?
ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया है तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता है तो आखों की रोशनी जा सकती है या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैले हैं, वो हिस्सा सड़ सकता है।
ब्लैक फंगस कहां पाया जाता है?
ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लकड़ियों और कम्पोस्ट खाद में यह पाया जाता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
शरीर के जिस हिस्से में इंफेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं।
ये इंफेक्शन किन लोगों को होता है?
ये उन लोगों को होता है जो डायबिटिक हैं, जिन्हें कैंसर है, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ हो, जो लंबे समय से स्टेरॉयड यूज कर रहे हों, जिन्हें कोई स्किन इंजरी हो, प्रिमेच्योर बेबी को भी ये हो सकता है। जिन लोगों को कोरोना हो रहा है, उनका भी इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। अगर किसी हाई डायबिटिक मरीज को कोरोना हो जाता है तो उसका इम्यून सिस्टम और ज्यादा कमजोर हो जाता है। ऐसे लोगों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन फैलने की आशंका और ज्यादा हो जाती है।
ये फंगस कितना खतरनाक है?
ये फंगस एक से दूसरे मरीज में नहीं फैलता है, लेकिन ये कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके 54% मरीजों की मौत हो जाती है। यह फंगस जिस एरिया में डेवलप होता है, उसे खत्म कर देता है। समय पर इलाज होने पर इससे बच सकते हैं।

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