रावण दहन...:22 जगह बड़े आयोजन; सबसे ऊंचा छोला में, सबसे पहले जलेगा टीटी नगर में

भोपालएक महीने पहले
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टीटी नगर। - Dainik Bhaskar
टीटी नगर।

विजयादशमी पर शुक्रवार को शहर में 22 जगहों पर बड़े आयोजन होंगे। शहर का सबसे ऊंचा रावण छोला में होगा। वहीं, सबसे पहले टीटी नगर में रावण दहन होगा। पुुराने शहर के मारवाड़ी रोड बांके बिहारी मंदिर से दशहरा चल समारोह निकाला जाएगा, जो विजय भूमि छोला पहुंचेगा।

बिट्टन मार्केट में आतिशबाजी नहीं होगी, जबकि कुछ जगह मामूली आतिशबाजी की जाएगी। इधर, ईंटखेड़ी में लोगों को स्वच्छता का महत्व बताने के लिए कचरे के रावण का दहन होगा। महिला सफाईकर्मी इसका दहन करेंगी। शाहपुरा, बाग मुगालिया, एमवीएम मैदान, नयापुरा, नेहरु नगर, कलियासोत और कोहेफिजा में भी रावण दहन होगा।

विजय भूमि छोला : 51 फीट

हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में रात 8 बजे यहां पर रावण दहन होगा। यहां रावण के 51 फीट, मेघनाद के 41 फीट अौर कुंभकर्ण के 31 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा।

टीटी नगर: 50 फीट

नागरिक कल्याण समिति के तत्वावधान में टीटी नगर दशहरा मैदान में शाम 5.30 बजे रावण दहन होगा। कजलीखेड़ा में शाम 6 बजे 25 फीट के रावण का दहन किया जाएगा।

शक्ति-साकेत नगर : 20 फीट

शक्ति-साकेत नगर दशहरा महोत्सव समिति के तत्वावधान में भगतसिंह चौराहा के पास शाम 7 बजे दशहरा उत्सव मनाया जाएगा। यहां 20 फीट ऊंचे पुतले का दहन होगा।

बिट्टन मार्केट : 11 फीट

अरेरा उत्सव समिति द्वारा बिट्टन मार्केट दशहरा मैदान में शाम 6:30 बजे समारोह होगा। अध्यक्ष राजेश व्यास ने बताया कि यहां 11 फीट के पुतले का दहन किया जाएगा।

गोविंदपुरा : 15 फीट

भेल दशहरा महोत्सव समिति के तत्वावधान में गोविंदपुरा स्थित दशहरा मैदान में शाम 6:30 बजे प्रतीकात्मक रूप से समिति के लोग ही 15 फीट ऊंचे रावण का दहन करेंगे।

संतनगर : 20 फीट

संत हिरदाराम नगर में नवयुवक सभा द्वारा 20 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा। संस्था के केटी शाहनी स्कूल प्रांगण में शाम 7 बजे रावण दहन होगा।

फ्लैश बैक.. भोपाल में 120 साल से भी पुराना है रावण दहन का इतिहास

भोपाल में रावण दहन का इतिहास लगभग 120 साल पुराना है। छोला दशहरा मैदान से पहले भी कमाली मंदिर परिसर में रावण दहन होता था। करीब 70 साल पहले यह छोला मैदान में शुरू हुआ। शुरुआत में जालौन से रावण के पुतले आते थे। फिर मेरेे पिता नन्नूलाल साहू ने रावण के पुतले बनाने का काम शुरू किया। देसी पटाखे भी घर में ही बनते थे।

मैंने 17 साल की उम्र से नौकरी के साथ यह काम भी संभाल लिया। एक समय था जब रावण के पुतले पर होली वाले रंग करते थे, देसी पटाखों का इस्तेमाल होता था। अब ऑयल पेंट होता है और पटाखे भी बाजार से लाते हैं। 10-15 साल से काॅलोनियों और कैंपस में रावण दहन का चलन अधिक हो गया है। सन 1900 के आसपास भोपाल में दशहरा उत्सव की शुरुआत हुई।

स्वर्णकार समाज की बांके बिहारी मंदिर समिति ने नवाबी दौर में रामदल का गठन किया। यह दल छोला मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने जाता था। उस समय यह काम चोरी-छिपे करना पड़ता था। लेकिन जब नवाब भोपाल को पता चला तो उन्होंने अनुमति दे दी। शहर से बाहर का इलाका होने के कारण मंदिर कमाली में रावण दहन होता था। - जैसा कि 50 साल से रावण के पुतले बनाने वाले ओमप्रकाश साहू ने बताया।

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