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वैक्सीनेशन अपडेट:3 लाख लोगों ने नहीं लगवाया सेकंड डोज, 30 हजार की तारीख एक्सपायर, यानी इनका फर्स्ट डोज बर्बाद

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अजय वर्मा
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राजधानी में 52.19 फीसदी लोगों को मिला कोरोना कवच... 100.59% लोगों को लगा पहला डोज। - Dainik Bhaskar
राजधानी में 52.19 फीसदी लोगों को मिला कोरोना कवच... 100.59% लोगों को लगा पहला डोज।

राजधानी में 52.19 फीसदी लोग अब कोरोना कवच के दायरे में हैं। 19 लाख 49 हजार 267 तय वैक्सीनेशन टारगेट में से दूसरा डोज लेने वालों की संख्या अब 10,17,511 हो पहुंच गई है। लेकिन, अभी भी 3 लाख लोग ऐसे हैं, जो वैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद दूसरा डोज लगवाने की डेट निकलने के बाद भी वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं पहुंचे हैं।

वहीं सबसे ज्यादा खतरा इन 30 हजार लोगों को है, जिनके डोज ओवर ड्यू हो गए हैं। यानी वैक्सीन लगने के 84 या फिर 28 दिन होने के एक महीने बाद भी वैक्सीन का दूसरा डोज लगवाने के लिए नहीं पहुंचे हैं। इन लोगों को कोरोना की संभावित आने वाले तीसरी लहर में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यानी इनको इंफेक्शन का खतरा ज्यादा है।

राजधानी में के कई इलाके ऐसे हैं जहां पर आज भी वैक्सीन लगवाने के लिए लोग नहीं पहुंच रहे हैं। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि ओवर ड्यू हुए 30 हजार लोगों को समय पर वैक्सीनेशन करा लेना चाहिए। वरना उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता जो डेवलप हुई है, उसका फायदा नहीं होगा।

यानी इन लोगों को कोरोना का संक्रमण बढ़ने पर सबसे ज्यादा खतरा रहेगा। तय लक्ष्य 19 हजार 49 हजार 267 में से पहला डोज अभी तक 19,60,802 (100.59%) लोगों को लग चुका है। दूसरा डोज लगवाने के दो सप्ताह बाद व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है।

19 लाख 49 हजार 267 भोपाल की 18 प्लस आबादी

  • 19,60,802 को लगा टीके का पहला डोज
  • 10,17,511 को भोपाल में अब तक दूसरा डोज लगा
  • 29,78,313 अब तक शहर में कुल टीके लग चुके हैं।

फ्रंट लाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर सबसे आगे

शरीर में दो तरह की एंडीबॉडी बनती है

हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि व्यक्ति के शरीर में दो तरह से एंटीबॉडी डेवलप होती है। एक नेचुरल यानी संक्रमित होने के बाद और दूसरी टीके के दाेनों डोज लगाने के बाद। टीके के बाद 80% लोगों में एंटीबॉडी बन जाती है।

कोविशील्ड, कोवैक्सीन के फायदे

वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को लाइसेंस इसी बात पर दिया जाता है कि उन्होंने जो टेस्ट रिपोर्ट पेश की हैं, उसमें ये दावा किया है कि कोविशील्ड की दोनों खुराक लगने के बाद 90% में और कोवैक्सीन में 81 फीसदी लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बन गई।

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