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भोपाल सड़क हादसा मामला:4 मृतकों में से 3 इकलौते थे; दो युवकों की मौत की खबर पुलिस ने रात में ही उनके घर जाकर दी, दो की पहचान करने में 12 घंटे लगे

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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एक्सीडेंट की भयनकता कार की हालत देखकर चलता है। - Dainik Bhaskar
एक्सीडेंट की भयनकता कार की हालत देखकर चलता है।

भोपाल में होशंगाबाद रोड पर शनिवार की रात सड़क हादसे में मारे गए चार युवकों में से तीन अपने घर के इकलौते चिराग थे। आदित्य और हितेश की शिनाख्ती के लिए जब पुलिस रात 3 बजे उनके घर पहुंची, तब परिजनों को पता चला कि बच्चे घर पर नहीं है।

वहीं, लोकेश और तुहिन की शिनाख्त करने में पुलिस को 12 घंटे से ज्यादा समय लग गया। परिजन अब भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके बच्चे घर से कहां और क्यों निकले थे? हादसे में बचे एक मात्र घायल बयान देने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में हादसे के कारणों का भी पता नहीं चल पा रहा है।

हितेश रात 12 बजे घर से निकला था, कार उसके नाम पर रजिस्टर्ड थी

श्यामापल्ली खजूरी कलां भोपाल में रहने वाले अजीत बरई मैनिट में लैब टेक्नीशियन हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद से मैं, पत्नी, बेटी और 25 साल का बेटा हितेश अलग-अलग कमरे में सोते हैं। उनकी पत्नी स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी थीं और दिसंबर 2020 में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया था। उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती। रात करीब 3 बजे पुलिस घर पहुंची, तब उन्हें घटना का पता चला कि हितेश घर पर नहीं है। वह रात को ही घटनास्थल पहुंचे तो पता चला कि घायलों को जेपी अस्पताल पहुंचाया गया है। जेपी अस्पताल से फिर हमीदिया अस्पताल पहुंचा गया। यहां शवों में हितेश की शिनाख्त की।

अजीत ने बताया कि दो साल पहले ही उन्होंने हितेश के नाम पर कार ली थी। वह बहुत धीमी गति से कार चलाता था। जिस तरह से कार क्षतिग्रस्त हुई है, मैं कह सकता हूं कि हितेश गाड़ी नहीं चला रहा होगा। वहीं, हितेश की छोटी बहन ने बताया कि हितेश रात 12 बजे घर से निकला था। उसने कहा था कि वह अभी लौट आएगा। उसने बताया कि हितेश उसका इकलौता बेटा था। वह एक साल से ज्यादा समय से वर्क फ्रॉम होम था। वह बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रहा था।

तुहिन मांझी और लोकेश सिन्हा।
तुहिन मांझी और लोकेश सिन्हा।

आदित्य दो बहनों में इकलौता था

अवधपुरी में रहने वाले अरविंद पांडे एक बैंक में मैनेजर हैं। उनका 23 साल का इकलौता बेटा आदित्य पांडे इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ इंदौर से पढ़ाई कर रहा था। एडवोकेट कुलदीप रघुवंशी ने बताया कि आदित्य उनके पास ही इंटर्नशिप कर रहा था। शनिवार रात करीब 8 बजे तक उनकी उससे बात हुई थी। उसके बाद रात करीब 3 बजे आदित्य के घर वालों का फोन आया। उन्होंने एक्सीडेंट की सूचना दी, तब हमें पता चला। दो बड़ी बहनों में आदित्य इकलौता था। उसने घर से निकलने के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया था, लेकिन संभवत वह किसी को स्टेशन ड्रॉप करने जा रहा था। वह होशंगाबाद की तरफ से भोपाल की तरफ आ रहा था। वहां कहां गए थे यह किसी को पता नहीं था।

तुहिन की पहचान टैटू से हुई

घटना के बाद मौके से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने आदित्य और हितेश की पहचान रात को ही कर ली थी, लेकिन उसके दो साथियों की पहचान नहीं हो पा रही थी। इसमें से एक 29 वर्षीय तुहिन मांझी पिता मल्टोरंजन मांझी भी था। दोपहर करीब दो बजे तुहिन की पहचान हुई। उसकी पहचान अस्पताल पहुंचे डॉक्टर अजय ने की। उन्होंने बताया कि उनके कुछ दोस्तों ने एक्सीडेंट की फोटो उन्हें भेजी थी। उन्होंने कहा था कि इसमें से एक तुहिन हो सकता है। उस जैसा लग रहा है। चेहरा बुरी तरह बिगड़ने के कारण उसके शरीर पर बने टैटू से उसकी पहचान की जा सकी। उसके पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं। तुहिन के माता-पिता रायपुर में रहते हैं। करीब 5 साल से उन्होंने तुहिन से मुलाकात नहीं है। भोपाल में ही उसकी 12वीं तक पढ़ाई हुई है। इसी कारण उसकी यहां पर दोस्ती हो गई है। वह यहां अलग रह रहा था। वह इकलौता बेटा था।

हादसे के बाद कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई।
हादसे के बाद कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई।

लोकेश सिन्हा की जानकारी जुटा रही है पुलिस

हादसे में जान गंवाने वाले चौथे युवक की पहचान शाम करीब 4 बजे लोकेश सिन्हा के रूप में हुई। सौम्या पार्कलैंड निवासी 22 साल के लोकेश सिन्हा पिता दिलीप सिन्हा के परिजनों से पुलिस संपर्क करने का प्रयास कर रही है। परिजनों के बयान लेने के बाद ही लोकेश के बारे में पूरी जानकारी मिल पाएगी।

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हादसे के असल कारणों का पता नहीं चल सका

हादसे के दौरान कार में 5 लोग सवार थे। इसमें से सिर्फ सौम्या कॉलोनी खजुरी निवासी 22 साल का हनी उर्फ कृतज्ञ पुरारिया पिता मुकेश पुरारिया ही बच पाया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसका जबड़ा पूरी तरह से टूट जाने के कारण वह बोल नहीं पा रहा है। ऐसे में हादसे के कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। लोकेश के बयान होने के बाद ही पता चल पाएगा कि वह कहां से कहां जा रहे थे।

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