साइबर क्राइम से बचाव की तैयारी:गृह मंत्रालय की सायबर सेना से राजधानी के 30 वाॅलिंटियर्स जुड़े

भोपालएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सायबर सेना उन लोगों की मदद करती है जो हेल्पलाइन पर अपनी समस्या बताते हैं। - Dainik Bhaskar
सायबर सेना उन लोगों की मदद करती है जो हेल्पलाइन पर अपनी समस्या बताते हैं।
  • वेबसाइट बनाई- 24 प्रकार के मामलों का हो रहा समाधान

बढ़ते साइबर मामलों में भोपाल के 30 वालेंटियर्स गृह मंत्रालय की मदद करेंगे। इसके लिए अलग से सायबर वॉलंटियर्स डॉट एमएचए डॉट जीओवी डॉट के नाम से एक वेबसाइट गृह मंत्रालय ने बनाई है। वेबसाइट पर पीड़ित लोग शिकायत दर्ज कराते हैं। इस वेबसाइट से साइबर मामलों की समझ रखने वालों को जोड़ा गया हैं।

यह टीम उन लोगों की मदद करती है, जो वेबसाइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी समस्या बताते हैं। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल आने के बाद नजदीकी वॉलंटियर्स से संपर्क करके उन्हें बताया जाता है कि पीड़ित व्यक्ति की किस प्रकार से मदद करना है।

वेबसाइट से तीन तरह के वॉलंटियर्स जोड़े गए हैं। पहले वे हैं, जो गैरकानूनी सामग्री की सायबर जानकारी जुटाकर ऑनलाइन मदद कर रहे हैं। दूसरे, साइबर फ्रॉड और उससे बचाव को लेकर जागरुक करने का काम करते हैं। तीसरे सायबर विशेषज्ञ हैं। इस पूरे नेटवर्क को इस तरह से तैयार किया गया है कि मदद लेने और देने वाले की जानकारी गोपनीय रहती है। इससे उन लोगों को सर्वाधिक फायदा मिल रहा है, जो छोटे कस्बे में रहते हैं।

सायबर वेबसाइट में तीन प्रकार के वाॅलिंटियर्स को जोड़ा गया है

यहां लॉग इन करें- वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए फार्म उपलब्ध है। फार्म में नाम, पते और मोबाइल नंबर के साथ वालंटियर्स के तकनीकी ज्ञान के बारे में पूछा गया है। बायोडाटा भी अपलोड करना होगा। इसमें आपके द्वारा किए गए कामों की जानकारी देनी होगी। आईडी कार्ड व फोटो भी देना होगा।

इनको प्राथमिकता- इसमें उन लोगों को जोड़ा जाएगा, जिनके पास डाटा आर्किटेक्ट, एनालिटिक्स, बिग डाटा एनालिटिक्स, एथिकल हैकर्स, इंफार्मेशन एश्योंरेंस, इंफार्मेशन सिक्योरिटी सिस्टम, माल वेयर एनालिस्ट, डिजिटल/मोबाइल डिवाइस/ नेटवर्क फोरेंसिक, कोडिंग, मोबाइल एप डवलपमेंट के सर्टिफिकेट होंगे।

इन फ्रॉड को शामिल किया याैन कंटेंट, साइबर बुलिंग, साइबर स्टाॅकिंग, साइबर ग्रूमिंग, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, ऑनलाइन सेक्स्टॉर्शन, विशिंग, सेक्सटिंग, मैसेजिंग, सिम स्वैप स्कैम, डेबिट/क्रेटिड कार्ड फ्रॉड, क्लाेनिंग, फिशिंग, स्पैमिंग, रैंसमवेयर, वायरस वार्म्स और ट्रोजन, डेटा ब्रीज, वेबसाइट डीफेसमेंट, स्क्वाटिंग, फार्मिंग, क्रिप्टोजैकिंग, ऑनलाइन ड्रग तस्करी, वेब जासूसी ।

केंद्र सरकार का यह एक जबरदस्त प्रयोग है। इससे पीड़ित को सीधे मदद मिल रही है। कई बार पीड़ित को पता ही नहीं होता है कि किस मामले में किस तरह की शिकायत करनी है

- हेमराज सिंह चौहान, साइबर एक्सपर्ट

खबरें और भी हैं...