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रोज सेंव, चूड़ा और गाठिया खाते हैं तो संभल जाएं:भोपाल में बड़े अस्पतालों में हर सप्ताह दिल की बीमारी के 300 मरीज पहुंच रहे: इनमें 50% यही खाने वाले

भोपाल2 महीने पहले
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दिल की देखभाल करने और उससे जुड़ी बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए 29 सितंबर को प्रति वर्ष वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है। हर साल दिल की बीमारी से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ते जा रही है। भोपाल के बड़े अस्पतालों की OPD में प्रति सप्ताह दिल से जुड़ी बीमारी के 300 मरीज पहुंच रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि दिल की बीमारी के 15 से 20 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें 50% मरीज खाने के साथ नियमित सेंव, चूड़ा, गाठिया खाने वाले आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दिल की बीमारी के सामान्य लक्षणों पर लोग ध्यान नहीं देते, जो आगे चलकर घातक हो जाती है।

बंसल हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्कंद त्रिवेदी ने बताया कि OPD में करीब 300 दिल की बीमारी से जुड़े मरीज आते है। इसमें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान करने वाले होते हैं। इसके अलावा 50% मरीज ऐसे देखे जा रहे है, जिनको न तो कोई बीमारी है न ही वह धूम्रपान करते हैं। उनमें खाने के साथ नियमित रूप से सेंव, चूड़ा, गाठिया जैसे तेल के खाद्य पदार्थ का सेवन करने की बात सामने आ रही है। डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि खाने के साथ रोजाना सेंव, चूड़ा खाना दिल के लिए धूम्रपान के समान जहरीला है। इसके नियमित खाने से बचना चाहिए।

एम्स में हर सप्ताह 40 मरीज भर्ती होते हैं, दो की बाईपास सर्जरी
AIIMS भोपाल के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव खण्डेलवाल ने बताया कि AIIMS की ओपीडी में प्रति सप्ताह दिल की बीमारी से जुड़े औसतन 300 मरीज आ रहे है। इसके हर सप्ताह करीब 40 मरीज भर्ती होते हैं। वहीं एक सप्ताह में दो मरीज की बाईपास सर्जरी हो जाती है। डॉ. खण्डेलवाल ने बताया कि दिल की बीमारी का बढ़ा कारण अनियमित दिनचर्या के साथ तेल और बाहर का खानापान है। दिल को ठीक रखने के लिए लोगों को खान पान के साथ ही अपने शरीर को फिट रखने के लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए।

डॉ. खण्डेलवाल ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों के आकड़े के अनुसार दिल के 55 से 70 साल के उम्र के 50% मरीज है। वहीं, 30 से 55 साल की उम्र के 30% और 70 साल से ऊपर के 20% मरीज है।

बच्चों में जन्मजात होती है बीमारी
दिल की बीमारी से पीड़ित 10 साल से छोटे बच्चों में जन्म से ही बीमारी होती है। इनमें दिल में छेद या दिल की बनावट में कोई तकलीफ होती है। इनका इलाज ऑपरेशन से होता है। कई बार छोटे ऑपरेशन से ही डिवाइस से दिल के छेद को भर दिया जाता है। यदि कोई जटिल बीमारी नहीं हो तो ऑपरेशन की सफलता के 90% चांस रहते है।

वॉल्व सिकुड़ने की भी समस्या
10 से 30 साल की उम्र में दिल के वॉल्व सिकुड़ने की समस्या रहती है। वॉल्व सिकुड़ जाते हैं या लीक हो जाते है। इनका इलाज बड़े ऑपरेशन कर वॉल्व बदलना पड़ता है। दूसरा मरीज को बिना बेहोश किए और बगैर चीरा फाड़ी के पैर की नश से गुब्बारा वाल्व तक पहुंचाया जाता है। फिर उसे फुला कर सिकुड़ा वाल्व खोल देते हैं। इस ऑपरेशन के भी 90% ऑपरेशन की सफलता के चांस रहते है।

​​​​​​धमनियों में कोलेस्ट्राल के कारण रुकावट
30 साल से अधिक की उम्र के लोगों में दिल की धमनियों में कोलेस्ट्राल बढ़ने से रुकावट आने लगती है। इसके कारण हार्ट अटैक की तकलीफ होती है। चलने में सीने में दर्द की शिकायत आती है। इसके इलाज में पहले दवाइयां देकर आराम देने की कोशिश की जाती है। तकलीफ बने रहने पर एंजियोग्राफी कर दिल की धमनियों की रूकावट (ब्लॉकेज) की जांच की जाती है। जिससे कितना ब्लॉकेज है, यह पता किया जाता है। इसके बाद ब्लॉकेज को खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी यानी स्टैंड डाल कर ब्लॉकेज काे खोला जाता है। धमनियों में ज्यादा ब्लॉकेज होने पर बाईपास सर्जरी की सलाह दी जाती है।

यह है दिल की बीमारी के कारण

  • मधुमेह यानी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा पीड़ित, धुम्रपान, तेल का खाना, ज्यादा नमक का सेवन, बाहर का खाना, तनाव दिल की बीमारी के बड़े कारण हैं।

दिल को फिट रखने के तरीके

  • मधुमेह यानी डायबिटीज की बीमारी है तो डॉक्टरी सलाह से दिनचर्या को तय करें।
  • नमक का सेवन कम करें।
  • ध्रूमपान और शराब का सेवन न करें। शराब हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को गंभीर बनाती है।
  • रोजाना 20 से 30 मिनट की एक्साइज करें। इससे शरीर का वजन कंट्रोल में रहने के साथ ही शरीर आसानी से ब्लड पंप कर पाता है। पहले से दिल की बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार ही एक्साइज करें।
  • हेल्दी और फल-सब्जी ज्यादा खाएं। तली-गले खाद्ध पदार्थ और बाहर का खाना न खाएं।

यह है दिल की बामारी के लक्षण

  • दिल की बीमारी में दर्द सीने के मध्यम में होता है। इसमें पूरी छाती एक साथ भारी हो जाती है। यह दर्द कभी गले तक या कभी कंधे तक में आता है। इसमें सांस लेने में दिक्कत, उल्टी होने जैसा लगना और साथ में पसीना आता है। इसमें चलने या कोई भारी काम करने पर दर्द बढ़ जाता है। इसके विपरीत एसीडीटी का दर्द पेट में या उसके ऊपरी भाग में होता है।
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