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कोरोना ने पूरा परिवार तबाह कर दिया:एक महीने में पंजाबी परिवार के 4 लोगों की कोरोना से मौत; पुणे में संक्रमित हुई भतीजी ने भी दम तोड़ा, 25 लाख रुपए भी खर्च

भोपालएक महीने पहले
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अप्रैल के संक्रमण ने पूरा परिवार बिखेर दिया। - Dainik Bhaskar
अप्रैल के संक्रमण ने पूरा परिवार बिखेर दिया।

कोरोना संक्रमण को लेकर गफलत, इलाज में देरी और अस्पताल के माहौल, इन सब परिस्थितियों ने इसके कहर को कई गुना बढ़ा दिया। कई परिवारों ने अपनों काे खोया। भोपाल का ऐसा ही एक पंजाबी परिवार है, जिसके 4 सदस्यों की एक महीने में संक्रमण से मौत हो चुकी है। 25 लाख रु. खर्च करने के बावजूद कोई नहीं बच सका।

पुणे में रहने वाली भतीजी भी संक्रमण के कारण दम तोड़ चुकी है। यह परिवार वरिष्ठ कांग्रेस नेता जवाहर पंजाबी का है। वे 1984 में भोपाल की पहली नगर निगम परिषद में जवाहर चौक क्षेत्र से पार्षद रहे। शुक्रवार सुबह जब उन्हें छोटे भाई कमल के निधन की खबर मिली तो छह भाइयों के परिवार में सबको संबल देने वाले जवाहर पंजाबी खुद को नहीं संभाल पाए। कमल दो बार संक्रमित हुए थे।

उस एहसास को केवल महसूस कर सकते हैं, बता नहीं सकते

  • हम छह भाइयों का परिवार। सभी हर स्थिति में एक साथ। कभी एक दूसरे से बिछुड़ने के बारे में सोच भी नहीं सकते। हम भाइयों के बीच एहसास को केवल महसूस किया जा सकता है, उसे बता नहीं सकते। मुकेश और कुंदन तो दोस्तों की ही तरह रहते थे। कोई दिन ऐसा नहीं होता था, जब दोनों एक दूसरे से ना मिलें। त्यौहार तो सब एक साथ ही मनाते थे। - जवाहर पंजाबी

मैं भी भर्ती था, व्हीलचेयर पर बैठकर मुकेश को चीयर्स करने पहुंच जाता था : कुंदन

मैं और मुकेश तो दोस्तों जैसे ही रहते थे। मुकेश को तो कोई बुरी आदत भी नहीं थी। रोजाना सुबह 6 बजे मॉर्निंग वॉक के लिए एकांत पार्क जाता था। परिवार में हेल्थ के प्रति सबसे ज्यादा सजग मुकेश ही थे। 13 मार्च को उसे जुकाम और बुखार जैसा लगा, तुरंत आरटीपीसीआर टेस्ट कराया। फिर मुकेश आइसोलेट हो गया। 15 मार्च को उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। हम उसे हमीदिया ले गए। यहां गेट पर पहुंचते ही जवाहर भाई का फोन आया कि मुकेश की रिपोर्ट निगेटिव आई है। मैं मुकेश को कार में बैठाकर घर ले आया। फिर, हम निश्चिंत हो गए और मुकेश का आइसोलेशन भी खत्म कर दिया। लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ती गई।

तीन दिन बाद मुझे भी लक्षण आने लगे। मैं और कमल मुकेश को कार में बैठाकर फिर हमीदिया ले आए। थोड़े दिन बाद मुकेश, मैं और हमारी मां हम सब चिरायु में भर्ती हो गए। मैं तो ऑक्सीजन सिलेंडर हटाकर व्हीलचेयर पर बैठकर मुकेश को आईसीयू में चीयर्स करने पहुंच जाता था। इस बीच कमल की तबीयत बिगड़ी और उसे भी भर्ती करना पड़ा। कमल की पत्नी को भी संक्रमण हो गया। उसे भी भर्ती किया। परिवार के बाकी सदस्य भी संक्रमित हो गए। मुझे ऐसा लगता है कि मुकेश आईसीसीयू के माहौल से घबरा गया। 2 अप्रैल को वह चल बसा। 22 अप्रैल को हमारी मां, एक मई को कमल की पत्नी नहीं रही और 7 मई को कमल हम सबको छोड़कर चला गया। इस बीच पुणे में रहने वाली उनकी भतीजी की भी कोरोना से मौत हो गई, हालांकि यह भतीजी थैलीसीमिया से भी पीड़ित थी।’
- कुंदन पंजाबी (जवाहर पंजाबी के छोटे भाई, सदस्य युवा आयोग)

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