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डेंगू मरीज 600 पार:मच्छर पकड़ने वाले इंसेक्ट कलेक्टर के 6 पद 12 साल से खाली; इनका काम सूरज उगने से पहले जाकर मच्छर पकड़ने का होता है

भोपाल25 दिन पहलेलेखक: विवेक राजपूत
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146 पद मलेरिया कार्यालय में 1977 में स्वीकृत किए थे। 44 साल में अमला बढ़ने के बजाय कम हुआ, सिर्फ 62 कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
146 पद मलेरिया कार्यालय में 1977 में स्वीकृत किए थे। 44 साल में अमला बढ़ने के बजाय कम हुआ, सिर्फ 62 कर्मचारी।

डेंगू का संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि शहर में डेंगू के मरीज 600 के पार हो गए हैं। इसके बाद भी शहर में मच्छरों पर नियंत्रण पाने वाले इसेक्ट कलेक्टर (कीट संग्राहक) की भर्ती नहीं की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि 12 साल से मंजूर इसेक्ट कलेक्टर के 6 पद अब तक खाली ही पड़े हैं। इसेक्ट कलेक्टर का काम बहुत अहम होता है।

जिस क्षेत्र में डेंगू और चिकनगुनिया समेत मच्छर जनित बीमारी के मरीज मिलते हैं, वहां जिला मलेरिया कार्यालय की टीमें लार्वा सर्वे समेत कीटनाशक का छिड़काव करती हैं। इंसेक्ट कलेक्टर अगले दिन वहां जाकर मच्छरों के सैंपल लेते हैं, ताकि यह पता चले कि कार्रवाई की गई है या नहीं। जिन इलाकों में मरीज मिलते हैं, वहां से मच्छरों के सैंपल लेकर इनकी जांच कराई जाती है कि विभाग की ओर से उपयोग की जा रही दवाइयों का असर मच्छरों पर हो रहा है या नहीं।

जिला मलेरिया कार्यालय में 4 और रीजनल डायरेक्टर ऑफिस में 2 पद इंसेक्ट कलेक्टर के मंजूर हैं। इंसेक्ट कलेक्टर के अभाव में जिला मलेरिया कार्यालय की ओर से ये कार्रवाई पूरी तरह से ठप है। वहीं, रीजनल डायरेक्टर ऑफिस की ओर से टेक्नीशियन को ये जिम्मा सौंपा गया है। अधिकारियों की मानें तो ग्रामीण इलाकों में इनके सहयोग से मच्छर को पकड़कर आगामी कार्रवाई की जाती है।

सूर्याेदय के बाद पहुंचे तो पकड़ में नहीं आते मच्छर

यह बहुत ही रोचक तथ्य है कि इंसेक्ट कलेक्टर को सुबह 4 बजे या फिर शाम 6 बजे के करीब फील्ड में पहुंचना होता है। इसके पीछे तकनीकी पहलू यह है कि मच्छर रात में सक्रिय रहता है और खून पीता है। ऐसे में वह सूर्योदय तक आसपास ही मौजूद रहता है तो उसे पकड़ना आसान होता है। अगर सूर्याेदय के बाद पहुंचे तब मच्छर उड़कर दूर निकल चुका होता है।

हाल ए अमला- 1977 का अमला, उसमें भी 57 प्रतिशत पद खाली

जिला मलेरिया कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी है। आलम ये है कि यहां 1977 में 145 पद स्वीकृत किए गए थे। उस दौरान शहर की आबादी महज 4 लाख थी, जो अब बढ़कर 20 लाख से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में यहां अमला 5 गुना यानी 725 होना चाहिए था, लेकिन मुश्किल यह है कि इन 44 सालों में अमला बढ़ने के बजाय कम ही हुआ है। स्वीकृत पदों के मुकाबले यहां महज 62 कर्मचारी ही बचे हैं, जो सिर्फ 57 प्रतिशत ही है।

शहर में डेंगू के 4 नए मरीज और मिले

शहर में शुक्रवार को डेंगू के 4 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही अब डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 606 हो गई है। नए मरीज इतवारा, भेल और साकेत नगर के इलाकों में मिले हैं। पिछले एक हफ्ते से रोज शहर के नए-नए क्षेत्रों में मरीज सामने आ रहे हैं। पहले जिन इलाकों में मरीज मिल रहे थे उनके साथ-साथ अब रोज नए इलाके भी जुड़ते जा रहे हैं।

डिमांड भेज दी गई है, जल्द ही बढ़ाए जाएंगे कर्मचारी

यह सही है कि शहर के क्षेत्रफल और आबादी के हिसाब से जिला मलेरिया कार्यालय का अमला कम है। इसकी बढ़ोतरी के लिए डिमांड वरिष्ठ कार्यालय में भेजी गई है। इस पर कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही कर्मचारी बढ़ाए जाएंगे।-डॉ. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ

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