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भास्कर एक्सक्लूसिव:कोरोना से 71 मौतें, सरकारी ऑडिट में बीमारी बदल गई; प्रदेश में अब तक कोरोना से 3408 मौतें

भोपाल5 महीने पहलेलेखक: रोहित श्रीवास्तव
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • डेथ ऑडिट के बाद संख्या 3272 रह गई
  • 65 मौतों का कारण डेथ ऑडिट के बाद भी पता नहीं चल सका

प्रदेश में कोरोना से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। नेशनल हेल्थ पोर्टल की डेथ ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 3408 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। इनमें 3272 की मौत कोरोना से और 71 मरीजों की मौत दूसरी बीमारियों से होना बताया गया है। साथ ही 65 मरीजों की मौत के कारण डेथ ऑडिट के बाद भी पता नहीं किया जा सके हैं। यह खुलासा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल हेल्थ पोर्टल पर अपलोड की गई डेथ ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। वहीं राज्य सरकार के कोविड हेल्थ बुलेटिन में मौतों का आंकड़ा 3270 बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक विदिशा जिले में कोरोना संक्रमित 57 मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से 50 की मौत कोरोना के अलावा दूसरी बीमारी और दूसरे कारणों से हुई है। रिपोर्ट में मरीज की मौत के दूसरे कारणों में डायबिटीज, टीबी, हायपरटेंशन, पेट और ब्रेन संबधी बीमारी होना बताया गया है। जबकि संबंधित कोविड मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती हाेने के 2 से 5 दिन बाद हुई।

इसके अलावा रिपोर्ट में कोविड पॉजिटिव एक मरीज की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले होने का जिक्र किया गया है। इसी तरह भोपाल में कोराेना से मरे 539 में से 10, उमरिया में 16 में 8, सागर , मंडला और बड़वानी में एक-एक मरीज की मौत दूसरे कारणाें से होना बताया गया है।

केस-3 : विदिशा के एक 55 वर्षीय कोविड संक्रमित एक मरीज की मौत 12 अगस्त को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हुई। वह 28 जुलाई को विदिशा के जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। उसी दिन हालत गंभीर होने पर मरीज को इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल रैफर किया गया। 29 जुलाई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। मरीज आईसीएमआर टेस्ट आईडी COV2180 थी।

कोरोना से हुई मरीजों की मौत का डेथ ऑडिट, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर करते हैं। इसकी रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग में बनती है। हमारे रिकॉर्ड में अभी तक 3270 मरीजों की मौत कोरोना से होना दर्ज है।

डॉ वीना सिन्हा, एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ एवं प्रभारी आईडीएसपी

डेथ ऑडिट के बाद बदल गया इन कोरोना मरीजों की बिमारी का कारण
भोपाल
: यूएम रावत, राजेश जैन, सुबोध जैन, एस.वी. हसन, असमा हसन, दिनेश सचदेव, रंजीत कुमार कनोजिया, कमलेश प्रसाद शर्मा, स्वर्णलता श्रीवास्तव, छाया वाहने।
विदिशा : प्रमोद कुमार लक्ष्मीचंद, कमलेश बाई, सनत कुमार जैन, मुन्नी बी, मनोज हरि नारायण अग्रवाल, दुर्गावती, सुरेंद्र जैन, जितेंद्र जैन, मूलचंद सिंघवी, दया शंकर, डोली, शकीला बी, चंद्र प्रकाश, देवेश दानीलाल, वृंदावन लाल जैन, डॉ. पदम जैन, कमला, दयाकिशन, गंगा बाई, किरन शर्मा, रामचंद्र पटवा, बाबूलाल, शिल्पा अनिल जैन, नर्मदा बाई कन्हैयालाल, महेश रामचंद्र शर्मा, निजामुद्दीन खांन, पन्नालाल, असलम शरीफ, चतुरो बाई, भुजवल सिंह राय, केजी जोहरी, प्रेमबाई, गुलाब बाई, गौरीशंकर दुबे, करन रामनाथ, आशा गुप्ता, हेमत सिंह, कन्हैयालाल, जयहिंद सिंह, संतोष जसवंत सिंह, रमेश सिंह, द्वारिका प्रसाद, रामकुमार गुप्ता, शोभा अग्रवाल जीडी अग्रवाल, चैन सिंह रामलाल, रामा बाई, रवि कपूर, सुभाष जैन, दीपक कुमार सोनी, रामकृष्ण शर्मा।

उमरिया : बुईया बाई सतनामी, आकाश खातर, शांति विवास, चरकी बाई मिश्रा, माया गुप्ता, पूना बाई, मनीराम सिंह, सैफिया बेगम।
सागर : चैन सिंह ठाकुर
बड़वानी : राजेंद्र गुप्ता
मंडला : सेवा बाई कर्वड़े।

सीधी बात- मो. सुलेमान, एसीएस, हेल्थ: डेथ ऑडिट के बाद ही मरीज की मौत का कारण तय होता है
स्टेट हेल्थ बुलेटिन में कोरोना से 3270 मरीजों की मौत की जानकारी है। जबकि नेशनल हेल्थ पोर्टल पर 3408 की। मौत के आंकड़ों में अंतर क्यों?

- स्टेट हेल्थ बुलेटिन और नेशनल हेल्थ पोर्टल पर दर्ज प्रदेश में कोविड से हुई मौत के आंकड़ों में अंतर संभव है। दोनों अलग-अलग सिस्टम है। नेशनल हेल्थ पोर्टल पर देश के किसी भी राज्य में मिले मध्यप्रदेश के कोविड पॉजिटिव मरीज का डेटा दर्ज किया जा सकता। लेकिन, स्टेट हेल्थ बुलेटिन में प्रदेश के अस्पतालाें में कोरोना से मरने वाले मरीजों की संख्या बताई जाती है।

नेशनल हेल्थ पोर्टल पर 71 मरीजों की मौत दूसरी बीमारियों से होना बताया गया है। जबकि वह कोविड पॉजिटिव थे।
- कोविड से होने वाली हर मरीज की मौत का ऑडिट करने के बाद उसकी मौत का कारण तय किया जाता है। इस ऑडिट में मरीज की को-मोर्बिडिटी , हॉस्पिटल स्टे ड्यूरेशन और मृत मरीज की उम्र का एनालिसिस किया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही कोविड से बचने की एडवाइजरी जारी की जाती है।

मरीज कोरोना के थे... मौत बुखार, कफ, डायरिया से होना बता दिया

  • हर्षवर्धन नगर की 60 वर्षीय स्वर्णलता श्रीवास्तव अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में कोरोना संक्रमित हुई। एम्स के डेडिकेटिड कोविड सेंटर में छह दिन चले इलाज के बाद 3 नवंबर को उनकी मौत हो गई। सरकारी रिकार्ड में स्वर्णलता श्रीवास्तव की मृत्यु कोरोना के बजाय हायपरटेंशन और सांस लेने में तकलीफ होने से बताई गई है।
  • साकेत नगर के नजदीक स्थित पिपलिया पेंदे खां निवासी 55 वर्षीय कमलेश प्रसाद शर्मा की कोरोना से 1 नवंबर को मौत हो गई। वह एम्स में भर्ती थे और 22 अक्टूबर को कोविड पॉजिटिव आए थे। सरकारी रिकार्ड मे कमलेश को बुखार, कफ, डायरिया होना बताया गया है। लेकिन, मृत्यु कोविड के कारण नहीं होना लिखा गया है।
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