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कोरोना रिटर्न:हमीदिया में 100 बिस्तरों पर 75 कोरोना मरीज, यहां और बेड बढ़ाने की तैयारी; एम्स-जेपी में कम पेशेंट

भोपाल9 महीने पहले
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एम्स के 194 बेड पर 8 और जेपी अस्पताल के 21 बेड पर महज 5 मरीज ही भर्ती हैं। - Dainik Bhaskar
एम्स के 194 बेड पर 8 और जेपी अस्पताल के 21 बेड पर महज 5 मरीज ही भर्ती हैं।
  • एम्स के 194 बेड पर 8 मरीज और जेपी अस्पताल के 21 बेड पर सिर्फ 5 मरीज ही हैं भर्ती

शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज का पूरा जिम्मा हमीदिया अस्पताल पर आ गया है। आलम यह है कि 100 में से 75 बेड पर मरीज भर्ती हैं। इसके उलट एम्स और जेपी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए अरक्षित बेड लगभग खाली पड़े हैं। बावजूद इसके यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऐसे में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है।

पिछले चार दिनों में 50 से ज्यादा मरीज हमीदिया अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इसके उलट एम्स के 194 बेड पर 8 और जेपी अस्पताल के 21 बेड पर महज 5 मरीज ही भर्ती हैं। यानी यहां लगभग बेड खाली हैं। ऐसा नहीं है कि मरीज यहां भर्ती नहीं होना चाहते हैं, बल्कि मरीजों को यहां से दूसरी जगह भेजे जाने के कारण ये हालात बन रहे हैं।

हमीदिया में 25 बेड ही खाली बचे हैं। पिछले चार दिनों से यहां हर रोज 20 से 25 नए मरीज भर्ती हो रहे हैं। इस हिसाब से सोमवार को यहां सभी बेड फुल होने का अनुमान है। इधर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कहा कि अभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त बेड खाली हैं। मरीजों को भर्ती करने में कोई परेशानी नहीं है।
चिरायु अस्पताल भी सरकारी व्यवस्था से बाहर
अब तक सबसे बड़ा सेंटर रहा चिरायु अब सरकारी व्यवस्था से बाहर हो गया। सरकार से अनुबंध खत्म होने के बाद यहां कोरोना मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर बंद कर दिया गया है।

हमने बेड बढ़ाने की तैयारी कर ली है

  • कोरोना के 100 में से 75 बेड फुल हो गए हैं। सोमवार को बाकी बचे 25 बेड भी फुल होने का अनुमान है। हमने बेड बढ़ाने की तैयारी कर ली है। जरूरत पड़ी तो सोमवार को ही 50 बेड बढ़ा दिए जाएंगे। - डॉ. आईडी चौरसिया, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

होम आइसोलेशन : भगवान भरोसे मरीज

डॉक्टर न देखने जा रहे, न दवाएं देने जिम्मेदारी के नाम पर सिर्फ फोन
इधर होम आइसोलेशन में भेजे जा रहे कोरोना मरीज भगवान भरोसे हैं। क्यों कि, न तो डॉक्टर इन मरीजों को देखने ही पहुंच रहे हैं और न दवाइयां ही दी जा रही हैं। मरीज ख्ुद दवाई ला रहे हैं। कॉल सेंटर की ओर से जिम्मेदारी के नाम पर सिर्फ कॉल ही किए जा रहे हैं। इस संबंध में जब कॉल सेंटर के जिम्मेदारों से बात की गई तो उन्होंने दबी जुबान में बताया कि सुविधाओं में की गई कटौती के कारण यह हालात बन रहे हैं।
दरअसल, जब कोरोन का संक्रमण पीक पर था उस वक्त होम आइसोलेशन में मरीज को रखने से पहले डॉक्टर की टीम मौका मुआयना करती थी। तब मरीज की पूरी जानकारी लेकर उसके स्वास्थ्य 24 घंटे की दिनचर्या समझाई जाती थी।

शहर में ऐसे हैं हालात

1. चार इमली निवासी 50 वर्षीय वीरेंद्र चौधरी की रिपोर्ट दो मार्च को पॉजिटिव आई। अगले दिन फोन आया, पूछताछ के बाद उनको होम आइसोलेशन में रहने की अनुमति मिल गई। लेकिन कोई देखने नहीं आया किसी ने दवाइयों के संबंध में नहीं पूछा।

2. अंकुर कॉम्प्लेक्स निवासी राघवेंद्र सिंह छह मार्च को पॉजिटिव आए हैं। होम आइसोलेशन में रखा गया है। लेकिन, कोई डॉक्टर घर तक नहीं आया है। उन्होंने अपने परिचितों के माध्यम से ही दवाइयों का इंतजाम किया।

सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं

  • होम आइसोलेशन में उन्हीं मरीजों को रखा जाता है जिन्हें कोई परेशानी न हो। परेशानी होने पर अस्पताल में शिफ्ट किया जाता है। डॉक्टरों मरीजों को देखने भी जाते हैं। सुविधाएं का विस्तार किया जाएगा। - डॉ. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ
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