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सांसों की सेहत सुधरी:भाेपाल के 96 अस्पतालाें काे 10 दिन पहले रोज मिल रही थी 25 टन ऑक्सीजन, अब 50 टन मिलने लगी

भोपालएक महीने पहलेलेखक: अजय वर्मा
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ऑक्सीजन के लिए उड़ान। - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन के लिए उड़ान।
  • राजधानी को रोज चाहिए 100 टन ऑक्सीजन, 110 टन मिलने लगी
  • प्रदेश में भी रोज 545 टन ऑक्सीजन की डिमांड है, जबकि 650 टन मिल रही

प्रदेश में मेडिकल लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर मचा हाहाकार अब कम हो गया है। अस्पतालों काे अब पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलने लगी है। प्रदेश में रोजाना 545 टन ऑक्सीजन की डिमांड हैै, जबकि 650 टन रोजाना सप्लाई होने लगी है। इसी तरह भोपाल को राेज 105 टन ऑक्सीजन चाहिए, जबकि 110 टन मिल रही है। 13 टन ऑक्सीजन प्रोसिसिंग प्लांट भारती एयर प्रोडक्ट और भेल से अलग मिल रही है। इन दोनों प्लांट से आसपास के जिलों में सप्लाई की जा रही है। 10 दिन पहले तक शहर के 96 अस्पतालाें काे हर दिन 25 टन ऑक्सीजन मिल रही थी, अब 50 टन मिलने लगी है।

9 बड़े अस्पतालाें काे तो अब 55 टन से ज्यादा मिल रही है। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि शहर में ऑक्सीजन की शार्टेज के बीच मैनेजमेंट टीम बनाई है। हर ऑक्सीजन प्लांट पर दो ब्लाॅक अफसरों की ड्यूटी लगाई गई। शुरुआत में महज 20 टन ऑक्सीजन शहर को मिल रही थी, जबकि जरूरत ज्यादा की थी। सरकार की मदद से 80 टन ऑक्सीजन की सप्लाई भिलाई, अहमदाबाद, रांची, राउरकेला आदि शहरों से शुरू हुई। भोपाल में झारखंड के बोकारो से ट्रेन और गुजरात के जामनगर, अहमदाबाद और छत्तीसगढ़ के भिलाई से सड़क मार्ग से ऑक्सीजन टैंकर आ रहे हैं। खाली टैंकरों के यहां से एयर फोर्स के एयरक्राफ्ट सी-17 से जामनगर एयरलिफ्ट किया जा रहा है। अब तक 35 टैंकर एयर लिफ्ट किए जा चुके हैं।

सुधरने लगे हालात; जिन अस्पतालों में 1-3 घंटे का बैकअप था, वहां 10 घंटे तक पहुंचा

सख्ती : जब्त सिलेंडर छोटे अस्पतालों को दिए
भोपाल के 30 से ज्यादा अस्पतालों को इंडस्ट्री से जब्त किए किए 750 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए गए। इससे छोटे अस्पतालों के पास खाली सिलेंडर नहीं होने से अचानक से दिक्कत खड़ी हो गई थी। अब यह दिक्कत दूर हो गई है।

इंदौर : हर दिन औसत 123 टन ऑक्सीजन मिल रही, 12 दिन पहले मिल रही थी 100 टन
इंदौर के अस्पतालों में आईसीयू बेड की मारामारी जहां कुछ कम हुई है, वहीं ऑक्सीजन की सप्लाय भी पिछले 8 से 10 दिनों में 20 से 25 टन तक बढ़ गई है। अभी यहां प्रतिदिन औसत 123 टन की आॅक्सीजन सप्लाई हो रही है। हालांकि अभी पूरी तरह से स्थिति नियंत्रण में करने के लिए 130 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। इससे पहले 25 अप्रैल तक शहर में 90 से 100 टन तक ऑक्सीजन आ रही थी, वहीं डिमांड 110 टन की थी।

अस्पतालों में लगे लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक भरे, कुछ ने नए टैंक लगवाए
पिछले एक महीने में भोपाल के तमाम कोविड अस्पतालों की स्थिति बहुत खराब थी। ऑक्सीजन की कमी से वे नए मरीज नहीं ले रहे थे। आलम ये था कि किसी के पास एक तो किसी के पास चार घंटे का बैकअप ऑक्सीजन के लिए रहता था। अब ये बढ़कर 8 से 10 घंटे हो गया है। शहर के तमाम बड़े अस्पतालों में लगे लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक भरे हुए हैं। जेके सहित कुछ अस्पतालों ने भी अपना नया टैंक लगवा लिया है।

अब दूसरे जिलों में ऑक्सीजन सप्लाय
भोपाल का सबसे बड़ा प्रोसिसिंग प्लांट भारतीय एयर प्रोडक्ट जो पहले सिर्फ भोपाल को ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई कर रहा था। अब सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ और शाजापुर को ऑक्सीजन दे रहा है।

8 नए प्लांट लगाए जाएंगे
^भोपाल में ऑक्सीजन के 8 नए प्लांट लगाए जाएंगे। इनके लगने से शहर में ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं होगी।
- अविनाश लवानिया, कलेक्टर

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