MP में लंपी वायरस‌ का अलर्ट:स्किन डिसीज से तड़पकर दम तोड़ देते हैं मवेशी; जानिए बीमार गाय-भैंस का दूध पी लिया तो क्या होगा

भोपाल2 महीने पहले

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के 2 गांवों के मवेशियों में लंपी वायरस के लक्षण मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग (वेटरनरी) की टेंशन बढ़ गई है। पशुपालन विभाग ने प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। वेटरनरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आरके मेहिया ने सभी जिलों को एडवायजरी जारी की है। लंपी के संक्रमण के बाद समय रहते इलाज नहीं हुआ तो मवेशी तड़पकर दम तोड़ देते हैं। हालांकि, लंपी वायरस से इंफेक्टेड पशु का दूध पीने से इंसान पर असर का कहीं कोई मामला सामने नहीं आया है।

रतलाम के दोनों गांवों में पशु चिकित्सा विभाग ने राज्यस्तरीय टीम भेजी है। ये टीम लंपी वायरस के संदिग्ध पशुओं के सैंपल लेकर राज्य प्रयोगशाला भेजेगी। सैंपल यहां से भोपाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिसीज (NIHSAD) में जांच के लिए भेजे जाएंगे। इसके साथ ही संदिग्ध लक्षणों वाले पशुओं के आसपास के इलाके का सर्वे भी किया जाएगा। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी ट्वीट करते हुए सरकार से आवश्यक कार्यवाही करने और प्रदेश को इस बीमारी से बचाने की अपील की है।

क्या है लंपी वायरस के लक्षण

डॉ. आरके मेहिया ने बताया, LSD (लंपी स्किन डिसीज) पशुओं को होने वाली एक वायरल बीमारी है। ये पॉक्स वायरस से मवेशियों में फैलती है। यह बीमारी मच्छर और मक्खी के जरिए एक से दूसरे पशुओं में फैलती है। इस बीमारी के लक्षणों में पशु के शरीर पर छोटी-छोटी गठानें बन जाती हैं, जो गांठों में बदल जाती है। पशु के शरीर पर जख्म नजर आने लगते हैं। पशु खाना कम कर देता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है।

पशु की मौत भी हो सकती है

इस बीमारी की शुरूआत में पशु को दो से तीन दिन के लिए हल्का बुखार रहता है। उसके बाद पूरे शरीर में गठानें (2-3 सेमी) निकल आती हैं। ये गठानें गोल उभरी हुई होती हैं जो चमड़ी के साथ-साथ मसल्स की गहराई तक जाती हैं। मवेशी के मुंह, गले, श्वास नली तक इस बीमारी का असर दिखता है। साथ ही लिंफ नोड में सूजन, पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी जानवर की मौत भी हो जाती है। हालांकि, ज्यादातर संक्रमित पशु 2 से 3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेकिन दूध के उत्पादन में कई सप्ताह तक कमी बनी रहती है। इसमें मृत्यु दर 15 प्रतिशत है। संक्रमण दर 10-20 प्रतिशत रहती है।

संक्रमित होने के बाद पशु खाना-पीना भी छोड़ देता है। पहले पशु की स्किन, फिर ब्लड और बाद में दूध पर असर पड़ता है। वायरस इतना खतरनाक है कि इंफेक्ट होने के 15 दिन के भीतर तड़प-तड़पकर गायों की मौत हो जाती है।

चिकित्सकीय निगरानी

संक्रमित पशु की निगरानी गठानों के आधार पर किया जाता है। संक्रमण दर और मृत्युदर के डेटा को निर्धारित फॉर्मेट में विभाग को भेजा जाता है।

सैम्पल : संक्रमित पशु के खून के नमूने (EDTA) लिए जाते हैं, गठानों की बायोप्सी की जाती है। इसे ICAR-NIHSAD भोपाल में जांच के लिए भेजा जाता है।

आधे से ज्यादा राजस्थान में फैला लंपी

बता दें, पड़ोसी राज्य राजस्थान के 33 में से 20 जिलों में लंपी वायरस फैल चुका है। यानी 60 प्रतिशत राजस्थान में गायें बीमारी की चपेट में हैं। पशुओं की बात करें तो यहां 90 प्रतिशत गायें और 10 प्रतिशत भैंस इंफेक्ट हो रही हैं। कोई भी पशु इस वायरस से इंफेक्ट होता है तो 7 दिन में लक्षण दिखने शुरू होते हैं।

बीमार गाय-भैंस का दूध पी लिया तो क्या होगा

डॉक्टर के अनुसार अभी तक की स्टडी में लंपी वायरस से इंफेक्टेड पशु का दूध पीने से इंसान पर असर का मामला सामने नहीं आया है। इसका बड़ा कारण है कि हम दूध को गर्म करके ही पीते हैं। गर्म करने पर दूध में मौजूद बैक्टीरिया व वायरस नष्ट हो जाते हैं। साथ ही ह्यूमन बॉडी में एक ऐसा एसिड होता है, जो खुद ही ऐसे वायरस को खत्म कर देता है। हालांकि बीमार पशु का दूध पीने पर बछड़े जरूर संक्रमित हो सकते हैं। वहीं इंसान भी बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने से प्रभावित हो सकते हैं।

लक्षण दिखें तो ये कदम उठाएं

लम्पी स्किन डिसीज के शुरूआती लक्षण दिखने पर तत्काल करीबी पशु चिकित्सक को सूचना देना चाहिए।

बीमारी का इलाज

  • पशु चिकित्सक के निर्देश अनुसार ही इलाज करना चाहिए। बीमार पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखना चाहिए।
  • Secondary Bacterial Infection रोकने के लिए मवेशी को 5 से 7 दिन तक एन्टी बायोटिक लगाना चाहिए।
  • Anti Inflammatory and Anti Histaminic लगाना चाहिए।
  • बुखार होने पर मवेशी को पेरासिटामॉल खिलाना चाहिए।
  • Eroded Skin पर एन्टीसेप्टिक Fly repellant ointment लगाना चाहिए।
  • मवेशी को मल्टीविटामिन खिलाना चाहिए।
  • संक्रमित पशु को पर्याप्त मात्रा में तरल और हल्का खाना व हरा चारा देना चाहिए।
  • मौत होने पर संकमित मृत पशु को जैव सुरक्षा मानक के अनुसार डिस्पोज किया जाना चाहिए।

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वेटरनरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आरके मेहिया ने सभी जिलों को एडवायजरी जारी की है।
वेटरनरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आरके मेहिया ने सभी जिलों को एडवायजरी जारी की है।

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