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शिव सरकार, सिंधिया राज:100 दिन के मंथन से निकला अमृत, 15 नए और 13 पुराने चेहरों के साथ 24 उपचुनावों की चुनौती

भोपालएक महीने पहले
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शपथ ग्रहण के बाद शिवराज की टीम एक साथ।
  • 28 नए मंत्री बने, इनमें 20 कैबिनेट व 8 राज्य मंत्री; कुल 33 मंत्री, 1 पद खाली
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तख्ता पलट के बाद बनी शिवराज सिंह चौहान सरकार के 100 दिन पूरे होने के ठीक बाद हुए पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 15 नए और 13 पुराने नेताओं को जगह मिली है। एेसा पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री और पार्टी ने अनुभवी से ज्यादा नए चेहरों पर भरोसा दिखाया है, ताकि 24 सीटों के सितंबर में संभावित उपचुनावों को जीतने की उम्मीद बन सके। भाजपा ने क्षेत्र के साथ सियासी व जातिगत समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा है। उपचुनाव में ग्वालियर-चंबल की 16 सीटें हैं। इसे ध्यान में रखते हुए यहां सिंधिया के 11 समर्थकों, जबकि कांग्रेस से भाजपा में आए एक ऐंदल सिंह कंसाना को मंत्री बनाया गया है। यहां से भाजपा उपचुनाव में सर्वाधिक सीटें जीतने की कोशिश में है। इसीलिए सिंधिया को पूरी तवज्जो दी गई है।

शिवराज मंत्रिमंडल में 28 मंत्रियों के शामिल होने के बाद अब कैबिनेट की कुल संख्या 33 हो गई है। नए मंत्रियों को प्रभारी राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गुरुवार को शपथ दिलाई। अब मंत्रिमंडल में सिर्फ एक पद ही रिक्त रह गया है। हैरान करने वाला सियासी गणित यह है कि शिवराज कैबिनेट में 107 विधायकों वाली भाजपा के 19 मंत्री (15 कैबिनेट व चार राज्यमंत्री) हैं, जबकि सिंधिया समर्थकों समेत कांग्रेस से भाजपा में आने वाले 22 पूर्व विधायकों में 14 मंत्री (10 कैबिनेट व चार राज्यमंत्री) हैं। यह करीब 60 से 65 फीसदी है।

मंत्रिमंडल में उपचुनाव का गणित....ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उपचुनाव, इसलिए यहां 12 मंत्री

ग्वालियर-चंबल 

12 मंत्री, यहां उपचुनाव में 16 सीटें दांव पर।

विंध्य क्षेत्र

3 मंत्री, यहां 1 सीट अनूपपुर में उपचुनाव है।

मध्यभारत 

4 मंत्री, यहां 2 सीटों पर उपचुनाव है।

बुंदेलखंड 

4 मंत्री, यहां 1 सीट सुरखी पर उप चुनाव।

महाकौशल 

क्षेत्र से 1 मंत्री, यहां किसी सीट पर उप चुनाव नहीं।

मालवा-निमाड़ 

9 मंत्री, यहां 4 सीटों पर उपचुनाव है।

भोपाल-इंदौर का प्रतिनिधित्व कम 

शिवराज के चौथे कार्यकाल के मंत्रिमंडल में भोपाल, इंदौर का वर्चस्व कम हो गया है। भोपाल से जहां एक ही मंत्री विश्वास सारंग हैं तो इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय के करीबियों को फिर किनारे कर दिया गया। रमेश मेंदोला और मालिनी गौड़ इंदौर से दावेदार थे, लेकिन संगठन ने ऊषा ठाकुर पर मुहर लगाई। शिवराज के पिछले कार्यकाल में भी मेंदोला और सुदर्शन गुप्ता को मंत्री बनाने की चर्चा थी। गुप्ता इंदौर से भाेपाल के लिए रवाना भी हो गए थे, लेकिन सुमित्रा महाजन और विजयवर्गीय की खींचतान के कारण दोनों को मौका नहीं मिला।

मेंदोला के पक्ष में आत्मदाह की कोशिश
पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने कहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय असंतुलन है। इस बात से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया है। इस बीच, इंदौर से दावेदार रमेश मेंदोला और मंदसौर से विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया समथर्कों ने अपने नेता को मंत्री नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए धरना-प्रदर्शन किया है। इंदौर में मेंदोला के पक्ष में अात्मदाह की भी कोशिश की गई। लोगों ने बचाया। वहीं देवास विधायक गायत्री राजे के समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया। 

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