बीमारी ने ऐसा तोड़ा कि उसी नाम पर खोली दुकान:एक्टिंग का ख्वाब लिए भोपाल आया, लाइलाज बीमारी ने बना दिया AVN चाय वाला

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: विजय सिंह बघेल

साल 2017 में रायसेन जिले के छोटे से गांव महूना के प्रद्युम्न सिंह चढ़ार एक्टर बनने का ख्वाब लेकर भोपाल आए थे। कोलार की थिएटर एकेडमी जॉइन की। भोपाल के अलावा पटना, सीधी और उत्तरप्रदेश के कई मंचों पर प्रस्तुतियां दे चुके हैं। किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। साल 2018 में AVN (अवैकुलर नेक्रोसिस) नाम की बीमारी हो गई।

बीमारी के कारण उनकी कूल्हे (हिप) के जोड़ों में दर्द रहने लगा। हालत ऐसी हो गई कि कई महीनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। एम्स जैसे संस्थान में भर्ती रहने पर डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दी। पैसों की कमी के कारण ऑपरेशन नहीं कराया। आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद राहत मिली। इसके बाद प्रद्युम्न ने पिपलानी चौराहे पर उसी बीमारी (AVN चायवाला) के नाम से स्टॉल शुरू कर दिया। दो हफ्ते में ही उन्हें युवाओं का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

AVN के कारण मरने लगते हैं हडि्डयों के टिशू

एवैस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis) हड्डियों में होने वाली ही एक समस्या है। इसमें बोन टिशू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। इसमें हड्डियां गलने लगती हैं। यह बीमारी होने का कारण ब्लड सर्कुलेशन में बाधा होने के कारण टिशू तक ब्लड सप्लाई नहीं हो पाती।

15 दिनों में ही प्रद्युम्न सिंह को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
15 दिनों में ही प्रद्युम्न सिंह को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।

तीन महीने आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के बाद शुरू की दुकान

प्रद्युम्न ने बताया कि 2018 के आखिर में एक कूल्हे में दर्द शुरू हुआ। सामान्य दर्द मानकर दवाई लीं। इसके बाद एम्स में दिखाया, तो यहां के डॉक्टरों एमआरआई कराई। जांच के बाद AVN (अवैकुलर नेक्रोसिस) की समस्या बताई। डॉक्टरों ने कूल्हे (हिप रिप्लेसमेंट) कराने के लिए कहा। पैसों की कमी के कारण प्रद्युम्न ने कूल्हे नहीं बदलवाए। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक कॉलेज में भर्ती होकर तीन महीने इलाज कराया।

यहां डॉक्टरों ने उन्हें थैरेपी दी, तो राहत मिली। करीब तीन महीने के इलाज के बाद दर्द कम हुआ। इसके बाद घर ही आराम किया। हाल में प्रद्युम्न ने पिपलानी चौराहे पर चाय का स्टॉल शुरू किया है। 23 साल के प्रद्युम्न कहते हैं कि दर्द के कारण खड़े हाेने में परेशानी होती है। जिस बीमारी ने मेरा कलाकार बनने का रास्ता रोका है, उसी के नाम पर मैंने चाय का स्टॉल शुरू किया है।

आयुर्वेद में अस्थि मज्जा गतवात पद्धति से होता है इलाज

प्रद्युम्न का इलाज करने वाले खुशीलाल आयुर्वेदिक अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि इस बीमारी का आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाता है। आयुर्वेद में ​अस्थि मज्जा गतवात पद्धति से हडि्डयों में ब्लड की सप्लाई को ठीक किया जाता है। AVN बीमारी में नेक्रोसिस के कारण टिशू मर जाते हैं। इन्हें आयुर्वेदिक दवाएं, पंचकर्म और मल्टीपल थैरेपी देकर ठीक किया जाता है।

भाइयों को भी पढ़ा रहे प्रद्युम्न

प्रद्युम्न के दो छोटे भाई और दो बहन हैं। गांव में पिता खेती कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। प्रद्युम्न अपने छोटे भाइयों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि बीमारी ने मेरे कदम रोके हैं हौसला नहीं। मेरे भाई-बहन पढ़कर सपने पूरे करें, इसलिए मैं मेहनत कर रहा हूं।