भोपाल में रेड अलर्ट पर प्रदूषण:हमीदिया रोड से ज्यादा कोलार की हवा दूषित; शहर भर में AQI दिवाली की रात 500 तक पहुंचा

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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भोपाल में आतिशबाजी के कारण प्रदूषण का स्तर दीपावली की रात खतरे के निशान को पार कर गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रात 10 बजे के बाद सुबह तक500 तक पहुंच गया। कोलार रोड की हवा तो सांस लेने तक लायक नहीं रहीं। यहां सामान्य 161.8 से हवा में प्रदूषण का स्तर 393.5 AQI हो गया। यह शहर में सबसे ज्यादा रहा। दूसरे नंबर पर हमीदिया रोड पर AQI 374.8 रिकॉर्ड किया गया। यह दोनों ही रहवासी क्षेत्र होने के कारण यहां पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों के लिए हवा नुकसानदायक रही। शहर भर में रात 10 बजे के बाद सुबह 6 बजे तक यही यही स्थिति बनी रही। रात में कई जगह तो AQI 500 तक पहुंच गया।

शहर में 7 जगह से होती निगरानी

भोपाल में कुल 7 जगहों पर AQI मापने के लिए प्रदूषण मापी यंत्र लगाए गए हैं। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड भोपाल (PCB) द्वारा छह स्थानों पर मैन्युअली और टीटी नगर में कंप्यूटरीकृत ऑपरेट किया जाता है। टीटी नगर में एकमात्र कंप्यूटरीकृत सिस्टम होने से यह हर सेकंड की रिपोर्ट देता है। इधर कोलार, होशंगाबाद रोड, हमीदिया रोड, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, पर्यावास परिसर और बैरागढ़ में मैन्युअली रिपोर्ट तैयार की जाती है। टीटी नगर में दीपावली की रात AQI 500 तक पहुंच गया था। वहां औसत 246 रिकॉर्ड किया गया। यह प्रदेश में तीसरे नंबर का प्रदूषित शहर रहा।

छह के शहर जगहों की स्थिति

स्थानदीपावली की रात AQIसामान्य AQI
कोलार रोड393.8161.8
हमीदिया रोड374.8198.4
पर्यावास परिसर330.9112.7
औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा308.5194.7
बैरागढ़306.3142.1
होशंगाबाद रोड306140.4

ऐसे समझे एयर क्वालिटी इंडेक्स

एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा की गुणवत्ता को बताता है। इससे पता चलता है कि हवा में किन गैसों की कितनी मात्रा घुली हुई है। हवा की गुणवत्ता के आधार पर इस इंडेक्स में 6 केटेगरी बनाईं गईं हैं। यह हैं अच्छी, संतोषजनक, थोड़ा प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर। वहा की गुणवत्ता के अनुसार इसे अच्छी से खराब और फिर गंभीर की श्रेणी में रखा जाता है। इसी के आधार पर प्रशासन इसे सुधारने के लिए प्रयास करती है।

यह होता है पीएम 10

पीएम 10 को पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे भी छोटा होता है। धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण मिले रहते हैं। पीएम 10 और पीएम 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा व पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है। पीएम 10 का सामान्‍य लेवल 100 माइक्रो ग्राम क्‍यूबिक मीटर (एमजीसीएम) होना चाहिए

यह होता है पीएम 2.5

पीएम 2.5 हवा में घुलने वाला छोटा पदार्थ है। इन कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे भी छोटा रहता है। पीएम 2.5 का स्तर ज्यादा होने पर ही धुंध बढ़ती है। विजिबिलिटी का स्तर भी गिर जाता है। पीएम 2.5 का नॉर्मल लेवल 60 एमजीसीएम होता है। इससे ज्यादा होने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ बढ़ती है

पीएम 2.5 बहुत छोटे होने के कारण सांस लेने पर यह हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक पहुंच जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पड़ता है। इसके कारण आंखों में जलन, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ती है। खांसी और सांस लेने में भी तकलीफ होती है। इसके लगातार खराब बने रहने के कारण कैंसर और फेफड़ों संबंधी बीमारी होने लगती हैं।

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