गैस हादसे के मृतकों को दी श्रद्धांजली:मशाल रैली निकाल संगठन के पदाधिकारियों का आरोप- सरकार ना रोजगार दे रही, ना अस्पताल में इलाज के पर्याप्त इंतजाम

भोपाल2 महीने पहले
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मशाल रैली निकाल दिवंगतों को दी श्रद्धांजली - Dainik Bhaskar
मशाल रैली निकाल दिवंगतों को दी श्रद्धांजली

भोपाल गैस कांड की 37 वीं बरसी पर पीड़ितों के साथ काम कर संगठनों ने गुरुवार शाम को सिंधी कॉलोनी चौराहे (बैरसिया रोड) से यूनियन कार्बाइड कारखाने तक मशाल रैली निकाली। इसमें जेपी नगर स्थित गैस माता मूर्ती पर दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजली दी गई।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा, भोपाल ग्रुप फॉर इंफोर्मेशन एंड एक्शन और डाव कार्बाइड के खिलाफ बच्चे संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता श्रद्धांजली देने के कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अवसर पर गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली भोपाल ग्रुप फॉर इंफोर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढिंगरा ने कहा कि 37 साल बाद हालत यह है कि गैस पीड़ितों का इलाज कैसे हो इसकी विधि आज तक विकसित नहीं की गई। भोपाल के मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित 6 गैस राहत अस्पतालों में 65% विशेषज्ञ और 40% डॉक्टरों के पद खाली है। एक भी किड़नी रोग, फेफड़े रोग, मानसिक रोग और न्यूरोलॉजिस्ट के डॉक्टर नहीं है। महत्वपूर्ण जांच सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा नहीं होती है। सोनोग्राफी जांच की सुविधा 6 में से दो अस्पताल इंदरा गांधी और कमला नेहरू में होती है।

केन्द्र सरकार के बीएचएमआरसी में ना तो मरीजों को दवा मिल रही है। और ना ही न्यूरोलॉजिस्ट और गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट और नेफरोलॉजिस्ट और कैंसर के इलाज की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। यहां पर 16 में से 5 विभाग बंद हो गए। यदि गैस पीड़ित गलती से रात में इमरजेंसी में चला जाए तो उनको भर्ती तक नहीं किया जाता है।

500 विधाओं को पेंशन नहीं

गैस पीड़ित विधावाओं को सरकार ने पेंशन देने का वादा किया था। इसके तहत 1 हजार रुपए प्रतिमाह की राशि मिलती है, लेकिन अभी 500 पात्र विधवा महिलाओं को पेंशन नहीं ही मिल रही। जबकि सरकार भी उनको पात्र मानती है। यह गड़बड़ी अधिकारियों की असंवेदनशीलता और लापरवाही के कारण हो रही है।

एक भी रोजगार को नहीं दिया गया

गैस पीड़ितों को रोजगार देने के लिए 85 करोड़ गैस राहत विभाग के पास रखा हुआ है, लेकिन किसी एक गैस पीड़ित को रोजगार नहीं दिया गया। ऐसे ही 60 योग केन्द्र बनाए गए। लेकिन किसी में योग की सुविधा शुरू ही नहीं की गई।

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