लॉकडाउन में 'दंड' पर भोपाल नगर निगम की सफाई:कहा- जल अधिभार नहीं बढ़ाया, बल्कि 3 दिन अतिरिक्त देकर राहत दी है; यानी- देरी से भुगतान पर जुर्माना देना ही होगा, लोगों ने कहा - अवैध वसूली है

भोपालएक वर्ष पहले
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  • 10 मई तक राशि जमा नहीं करने पर 15% अतिरिक्त जुर्माना देना होगा
  • पिछले आदेश रद्द करते हुए मई 2021 से आदेश मान्य माना जाएगा

लॉकडाउन के दौरान लोगों को नगर निगम जल उपभोक्ता प्रभार के जुर्माने में राहत देने के मूड में नहीं है। उसने माफी या राहत नहीं देते हुए सफाई दी है कि देरी से भुगतान पर 15% अधिभार का प्रावधान पहले से ही है। नया कुछ नहीं है। उलटे हमने तो अतिरिक्त दिन दिए हैं। दरअसल, पिछली बार लॉकडाउन में सरकार के निर्देश पर देरी से भुगतान पर राहत दी गई थी, लेकिन इस बार फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में जब बंद है, तो लोगों का कहना है कि यह तो अवैध वसूली है।

निगम ने कहा है कि हमने जल उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त प्रभार नहीं लगाया गया है। कोरोना काल में लोगों को राहत देने के लिए जल उपभोक्ता प्रभार की राशि जमा करने के लिए 3 दिन की अवधि बढ़ाई गई है। नगर निगम भोपाल में जब से जल उपभोक्ता प्रभार की राशि ली जा रही है, तब से ही माह की 7 तारीख के बाद राशि जमा करने पर 15% अधिभार लिए जाने का प्रावधान था। अब इसे 10 तारीख किया गया है।

जल उपभोक्ता प्रभार की राशि जमा करने के लिए नागरिकों को राहत देने के लिए ही प्रशासक के संकल्प के तहत निगमायुक्त ने स्थायी आदेश जारी किया है। यह आदेश मई 2021 से प्रभावशाली होगा। इस संबंध में पूर्व से जारी आदेश सर्वदा निरस्त माने जाएंगे।

घर में कैद लोगों से 'दंड' वसूलेगी सरकार?:भोपाल नगर निगम ने दिया आदेश- 10 तारीख तक जल कर चुकाओ वर्ना 15% जुर्माना; लोग बोले- शर्म करो, कोरोनाकाल में भी जेब भरोगे

लोगों का कहना- अवैध वसूली है

राकेश चौकसे ने कहा कि कोरोना काल में जल कर से कुछ महीनों की राहत मिलनी चाहिए। साथ ही, सैनिटाइजेशन की बढ़ती जरूरत के हिसाब से हर खास आम क्षेत्र में समुचित जल आपूर्ति सुनिश्चित हो, जय हिंद हाथ जोड़कर।

आशीष ओझा ने पोस्ट करते हुए कहा कि यह निर्णय जन विरोधी व अमानवीय है। इसे अवैध वसूली ही कहा जाएगा। आज सब बंद है और आप अधिभार वसूलेंगे। 19 जोन में कोई वार्ड नहीं जहां आप हर माह उपभोक्ता को बिल पहुचाने में सक्षम हो, क्या उसके लिए कोई दंड प्रावधान है।

दीपक दीवान ने कहा कि यह निर्णय जन हित में वापस लिया जाए। एक तरफ लाॅकडाउन में लोगों का काम धंधा बंद है उसके ऊपर यह तुगलकी फरमान। नगर निगम को सभी प्रकार के बिलों को कोरोना लाॅकडाउन के समय तक स्थगित करना चाहिए।

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