देश का अनोखा शहर:प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट में भोपाल दूसरे शहरों के लिए बना मिसाल

भोपालएक महीने पहले
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  • 14 बेस्ट केस स्टडी में पहले स्थान पर भोपाल मॉडल

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए भोपाल में जो कदम उठाए गए हैं, वे देशभर में दूसरे शहरों के लिए मिसाल हैं। भोपाल देश का ऐसा अनोखा शहर है, जहां वेस्ट कलेक्शन करने वाले वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम अपनाया है। http://incubategps.in/bmc.html# लिंक पर जाकर कोई भी शहरवासी अपने इलाके की डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहन की रियल टाइम लोकेशन पता कर सकता है।

नीति आयोग ने हाल ही यूएनडीपी के सहयोग से सतत शहरी प्लास्टिक कूड़ा प्रबंधन के लिए एक हैंडबुक जारी की है, जिसमें 18 शहरों में प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन के लिए बीते एक दशक में उठाए कदमों की केस स्टडी शामिल की गई है। 14 केस स्टडी भारतीय और 4 दक्षिण एशियाई देशों के शहरों की है। इसमें भोपाल का मॉडल पहले स्थान पर आया है।

भोपाल की केस स्टडी का नाम है मप्र में अब कूड़ा बर्बाद नहीं होगा, क्योंकि यहां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए एकीकृत रास्ता खोज लिया है। मप्र में सर्वाधिक प्लास्टिक वेस्ट इंदौर से निकलता है, इसके बाद भोपाल का नंबर है। भोपाल से रोज 800 मीट्रिक टन घरेलू कचरा निकलता है, इसमें 14% प्लास्टिक वेस्ट होता है। 2008 में भोपाल निगम ने प्लास्टिक कूड़े का कलेक्शन, बिक्री व रीसाइकिल करना शुरू किया था। यहां बता दें कि भोपाल के मॉडल को बांग्लादेश लागू कर चुका है।

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