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अपने बच्चों से दुखी बुजुर्ग:मप्र में बच्चों से प्रताड़ित सबसे ज्यादा बुजुर्ग भोपाल के, 4 महीने में 923 शिकायतें; आलीराजपुर में सबसे कम छह

भोपाल4 महीने पहले
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बुजुर्गों को प्रताड़ना के मामले में भोपाल प्रदेश में नंबर 1 है। - Dainik Bhaskar
बुजुर्गों को प्रताड़ना के मामले में भोपाल प्रदेश में नंबर 1 है।

बुजुर्गों को प्रताड़ना के मामले में भोपाल प्रदेश में नंबर 1 है। यहां पिछले चार महीने में 923 बुजुर्ग माता-पिता ने अपने बच्चों के खिलाफ शिकायतें की है। इसके बाद इंदौर का नंबर आता है। यहां 566 बुजुर्ग अपने बच्चों से दुखी हैं। इसके विपरीत आदिवासी क्षेत्र कहे जाने वाले आलीराजपुर में आंकड़ें इसके विपरीत है। यहां सिर्फ छह शिकायतें पहुंची है। प्रदेश में इन चार महीनों में कुल 3329 बुजुर्गों ने हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतें की है, इनमें पुरुष 1713 और 1616 महिला है। यह खुलासा सामाजिक न्याय विभाग द्वारा जारी आंकड़ों में हुआ है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय ने बुजुर्गों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन ने टोल फ्री 14567 नंबर जारी किया है। यह हेल्पलाइन 17 मई को शुरू की गई थी। मप्र में इसका कोआर्डिनेशन हेल्प एज इंडिया को दिया गया है। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हेल्प एज इंडिया द्वारा संचालित हेल्प लाइन 18002331253 में भी बुजुर्ग अपने साथ हो रहे खराब व्यवहार की भी शिकयत करते हैं। सबसे ज्यादा प्रताड़ना के शिकार 61 से 70 साल के बुजुर्ग हुए है।

4 नालायक... 99 साल की बुजुर्ग की संपत्ति पर कब्जा कर घर से बाहर निकाल दिया

भोपाल की 99 साल की बुजुर्ग महिला बच्चों के खिलाफ कोर्ट पहुंची। उनके पांच बेटे और एक बेटी हैं। पति की 2001 में मौत हो चुकी है। चार बेटे-बहू ने उनके मकान, जमीन, सोने-चांदी के जेवर आदि पर कब्जा कर लिया। दो महीने पहने उन्हें यह कहकर घर से निकाल दिया कि वापस आई तो जान से मार देंगे। मजबूरन मां ने बच्चों के खिलाफ कोर्ट की शरण ली, वहां उसे न्याय भी मिला। कोर्ट ने उसके तीन बच्चों को हर महीने दो-दो हजार रुपए देने के आदेश दिए। हालांकि बच्चे अब भी कोर्ट का आदेश नहीं मान रहे हैं।

गांव में बुजुर्गों को मिलता है सम्मान, वही होता है घर का मुखिया
आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों को अभी भी सम्मान दिया जाता है। घर का मुखिया हमेशा बुजुर्ग ही होता है। वे अपने मसले खुद सुलझाते है। बुजुर्ग के साथ अभद्र व्यवहार करता है तो समाज के लोग खड़े हो जाते है। जबकि शहरी इलाके में लोग बुजुर्ग को साथ रखना पसंद नहीं करते। यहां भौतिकता का असर ज्यादा देखने मिलता है। प्राइवेसी के चक्कर में कई लोग बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में रखना ज्यादा पसंद करते हैं। - डॉ. शैलजा दुबे, समाज शास्त्री