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12 दिन में मंत्रियों को बंटे विभाग:भाजपा हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व व सिंधिया में बैठाया सामंजस्य, भाजपा काे गृह, वित्त; सिंधिया खेमे को परिवहन, राजस्व, ऊर्जा

भोपाल10 महीने पहले
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  • नरोत्तम मिश्रा से स्वास्थ्य लेकर तीन और विभाग दिए, अब मंत्री नंबर दो

मंत्रिमंडल विस्तार के 12 दिन बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की टीम के बीच साेमवार काे विभागों का बंटवारा हो गया। भाजपा के खाते में गृह, वित्त, वाणिज्यिक कर, नगरीय विकास गए। जबकि सिंधिया खेमे को परिवहन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, उद्योग मिला। आठ बार के विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को पीडब्ल्यूडी, भूपेंद्र सिंह को नगरीय विकास के साथ जगदीश देवड़ा को वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग सौंपा गया है। नरोत्तम मिश्रा को गृह के साथ तीन और महकमे दिए गए हैं। स्वास्थ्य उनसे लेकर डॉ. प्रभुराम चौधरी को दिया गया है।

भाजपा हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अहम विभागों के बंटवारे में सामंजस्य बैठाने की कोशिश की। हालांकि सिंधिया अपने खेमे से 11 को मंत्री बनवाने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, राजस्व, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और परिवहन जैसे बड़े विभाग लेने में सफल रहे। कांग्रेस की पिछली सरकार में राजस्व और परिवहन मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत को फिर से यही विभाग मिला है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और हरदीप डंग को भी अच्छे विभाग दिए हैं। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पास जनसंपर्क, सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास और विमान के साथ वे विभाग रखे हैं जो अन्य किसी के पास नहीं। यह भी तय कर दिया कि विधानसभा में सामान्य प्रशासन, प्रवासी भारतीय व विमानन विभाग का जवाब इंदर सिंह परमार देंगे, जबकि नर्मदा घाटी व जनसंपर्क का पक्ष भारत सिंह कुशवाह रखेंगे।

आरएसएस की पसंद का भी खयाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद रहे मोहन यादव को…उच्च शिक्षा, इंदर सिंह परमार को स्कूल शिक्षा और ऊषा ठाकुर को पर्यटन, संस्कृति और अध्यात्म विभाग मिले। ये विभाग संघ की भी पसंद हैं। जिनमें वे काम करते हैं। शिवराज सिंह के पिछले कार्यकाल में रही पुरानी टीम से इस बार मंत्री बनाए गए लोगों में मामूली फेरबदल किया गया है।

उपचुनाव : ग्वालियर-चंबल का ध्यान
उपचुनाव में सर्वाधिक सीटें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की हैं। विभाग बंटवारे में इसका भी ध्यान रखा गया। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ नरोत्तम मिश्रा को गृह के साथ जेल, विधि और संसदीय कार्य देकर प्रभाव बढ़ाया गया है। हालांकि गृह के अलावा किसी अन्य विभाग का बड़ा बजट नहीं होता। अरविंद भदौरिया को सहकारिता दिया, एंदल सिंह को पीएचई और भारत सिंह को उद्यानिकी देकर सामंजस्य बिठाया गया है। इसका चुनाव में लाभ मिल सकता है।

श्रम, स्कूल शिक्षा, खाद्य को छोड़ा, बड़े विभाग ले लिए
पिछली सरकार में सिंधिया खेमे के पास राजस्व, परिवहन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास के साथ और तीन विभाग श्रम, स्कूल शिक्षा और खाद्य भी थे। इन तीनों श्रम, स्कूल शिक्षा और खाद्य के बदले सिंधिया खेमे ने अब जल संसाधन, उद्योग, ऊर्जा के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ले लिया है। सिंधिया खेमे के चार राज्यमंत्री बनाए गए, लेकिन उन्हें स्वतंत्र प्रभार नहीं मिला। भाजपा से राज्यमंत्री बने चारों लोगों को स्वतंत्र प्रभार में विभाग सौंपे गए।

बिसाहूलाल को वही विभाग, जिसके कारण विवादों में आए
भाजपा सरकार में बिसाहूलाल सिंह को खाद्य विभाग दिया गया है, जबकि इसी विभाग से जुड़े मामले में वे विवादों में रहे। बिसाहूलाल व उनके परिवार पर 2018-19 में आरोप लगा कि बीपीएल सूची का राशन लिया। मार्च 2020 जब बिसाहूलाल कांग्रेस छोड़कर भाजपा खेमे में गए तो तत्कालीन कमलनाथ सरकार ईओडब्ल्यू गई।

अपडेट : सिंधिया खेमे की मंत्रिमंडल में भागीदारी 42 फीसदी पर विभाग के सालाना बजट में हिस्सा 27 प्र्रतिशत
शिवराज कैबिनेट के 33 सदस्यों के मंत्रिमंडल में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की भागीदारी 42 फीसदी है पर विभागों के वितरण के बाद उनके हिस्से में 27 प्रतिशत सालाना बजट आया। हालांकि कुछ बड़े विभाग उनके खाते में जरूर गए। भाजपा के पास 107 विधायक हैं, जबकि सिंधिया के साथ 22 विधायक रहे जो भाजपा में शामिल हुए। इस हिसाब से भाजपा के संख्या बल को देखें तो मंत्रिमंडल में उनका प्रतिशत 57 है। सिंधिया व कांग्रेस से भाजपा में आए खेमे का प्रतिशत 42 हो गया है।
वर्ष 2019-20 का बजट दो लाख 14 हजार 85 करोड़ रुपए रहा। इसमें से भाजपा के पास एक लाख 56 हजार 915 करोड़ राशि के बजट आए। सिंधिया खेमे के पास 57 हजार 170 करोड़ के विभाग गए। साफ है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद 12 दिन तक चली रस्साकसी में सांसद सिंधिया ने आगे निकले। सरकार को राजस्व देने वाले दो अहम विभाग परिवहन और राजस्व भी उनके खाते में गए।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के साथ राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के जरिए सिंधिया ने प्रदेश में निर्णय कराए। विभागों के वितरण में यह जरूर है कि सिंधिया की शाह से लेकर नड्‌डा और बीएल संतोष से कई बार बात हुई। दिल्ली में चले घटनाक्रम के बीच केंद्रीय आलाकमान ने प्रदेश नेतृत्व को सिर्फ इस तर्क से संतुष्ट कर दिया गया कि यह सरकार सिंधिया की बदौलत लौटी है, इसलिए उनकी बात रखनी पड़ेगी। इसके बाद विभाग बंटवारे की राह आसान हुई।

शिवसरकार बनाम  सिंधियाराज

सिंधिया की सरकार में भागीदारी 42% लेकिन बजट में हिस्सा 26.70% ही 

कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्रिमंडल में 42 फीसदी जगह के साथ ही बजट का 26.70 फीसदी हिस्सा भी लिया है। यह राशि 57170 करोड़ रु. है। भाजपा ने 156915 करोड़ यानी बजट का 73.30 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखा हैं। सिंधिया ने सरकार की आय वाले 8885 करोड़ के विभाग भी लिए हैं। यही सारे विभाग दोनों के बीच रस्साकशी का कारण थे। 

अहम विभागों में बजट और राजस्व में हिस्सेदारी

  • गृह व जेल
  • लोक निर्माण विभाग
  • वित्त, वाणिज्यिक कर
  • आदिम जाति कल्याण
  • कृषि , नगरीय विकास एवं आवास ,
  • खनिज व श्रम
  •  सहकारिता
  • उच्च शिक्षा
  • स्कूल शिक्षा व अन्य

कुल बजट- 1,56,915 करोड़ (73.30%)

  • खाद्य
  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी
  • जल संसाधन
  •  राजस्व
  • परिवहन
  •  महिला एवं बाल विकास
  •  स्वास्थ्य
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास,
  • ऊर्जा
  • औद्योगिक निवेश
  • नवकरणीय ऊर्जा

कुल बजट- 57,170 करोड़ (26.70%)

मंत्रियों का कार्य विभाजन 

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