कॉल सेंटर का हाल:108 इमरजेंसी एंबुलेंस के कॉल सेंटर पर दो घंटे नहीं लगे कॉल, 4000 लोग हुए परेशान

भोपाल2 महीने पहले
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जवाब मिला-आप कतार में हैं... बाद में फोन लगाएं, अभी कॉल अटैंड करने वाला कोई नहीं है। - Dainik Bhaskar
जवाब मिला-आप कतार में हैं... बाद में फोन लगाएं, अभी कॉल अटैंड करने वाला कोई नहीं है।

इमरजेंसी एंबुलेंस 108 पर बुधवार को शाम पांच से सात बजे तक कॉल नहीं लगे। ऐसे में प्रदेशभर के 4000 से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को परेशान होना पड़ा, जिन्हें इस दौरान एंबुलेंस की जरूरत पड़ी थी। लोग इमरजेंसी में अपने परिजनों को अस्पताल ले जाने के लिए पहले तो घंटेभर तक कॉल लगाने के लिए प्रयास करते रहे। जब कॉल नहीं लगे तो प्राइवेट वाहनों से अस्पताल जाना पड़ा। इसके चलते लोगों को काफी परेशानी हुई।

दरअसल, शाम करीब पांच बजे से कॉल सेंटर पर कॉल ही नहीं लग रहा था। बार-बार यही संदेश सुनाई पड़ रहा था कि इस समय कोई भी कॉल अटैंड करने के लिए नहीं है। कृपया कुछ समय बाद काॅल करें। कॉल रिसीव नहीं होने से जरूरतमंद बार-बार कॉल कर रहे थे।

शाम करीब 7 बजे के बाद कॉल सेंटर पर सुविधा शुरू हुई। कॉल सेंटर का मुख्यालय भोपाल में है। प्रदेश से जो भी जरूरतमंद कॉल करते हैं तो वह कॉल पहले भोपाल में ही रिसीव होता है। जानकारी लेने के बाद संबंधित शहर के थाना से संंबंधित एंबुलेंस को यह कॉल भेजी जाती है।

सेंटर पर हर रोज आते हैं 35 हजार कॉल

प्रदेशभर से हर रोज कॉल सेंटर पर करीब 35 हजार कॉल आते हैं। अधिकांश कॉल सुबह से शाम तक आते हैं। इस दौरान प्रत्येक घंटे में औसतन दो हजार कॉल पहुंचते हैं। ऐसे में दो घंटे कॉल नहीं लगने पर चार हजार लोगों को परेशानी हुई। रात के समय कम ही कॉल आते हैं।

कंपनी का दावा- सिर्फ 106 डिस्पेच ही कम हुए

एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जिगित्सा के प्रबंधन का दावा है कि प्रदेश में मंगलवार के मुकाबले बुधवार को महज 106 डिस्पेच (जिनको सेवाएं दी गईं) कम हुए हैं।

मेरी पत्नी बाथरूम में फिसलकर गिरी

मेरी पत्नी बाथरूम में फिसलकर गिरी। उसे कमर में चोट लगी थी, हमीदिया ले जाने के लिए मैंने 108 पर कॉल किया। 10 से 12 कॉल किए। लेकिन नहीं लगा। निहाल सिंह जादौन, शारदा नगर

नेटवर्क की वजह से परेशानी, अब सेवाएं बहाल

कॉल सेंटर में अंदरूनी नेटवर्क फ्लेक्चुएशन की वजह से यह परेशानी हुई थी। हमारी टीम ने शाम के वक्त करीब दो घंटे में इसका समाधान किया और सेवाएं बहाल कर दी गईं।
जितेंद्र शर्मा, प्रोजेक्ट हेड, जिगित्सा प्राइवेट लिमिटेड

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