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मोबाइल के साइड इफैक्ट:बिहेवियर डिसऑर्डर के शिकार हो रहे बच्चे, हर महीने 500 से ज्यादा की काउंसलिंग

भोपाल12 दिन पहले
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शहर के मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के पास हर महीने 500 पैरेंट्स बच्चों की काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। - Dainik Bhaskar
शहर के मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के पास हर महीने 500 पैरेंट्स बच्चों की काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं।

मोबाइल के कारण बच्चे बिहेवियर डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। पैरेंट्स द्वारा बच्चों से मोबाइल वापस लेने पर वे न केवल आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं, बल्कि पैरेंट्स को भी भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने लगे हैं। शहर के मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के पास हर महीने 500 पैरेंट्स बच्चों की काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं।

ब्लैकमेलिंग से लेकर आत्मघाती कदम तक उठा रहे हैं बच्चे

  • घरवालों ने मोबाइल ले लिया तो चौथी की छात्रा ने जान दे दी

9 सितंबर को कान्हा कुंज निवासी चौथी कक्षा की छात्रा को दादी ने दिनभर मोबाइल चलाने पर डांट दिया था। इस बात से पोती इतनी नाराज हुई कि उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। पुलिस की जांच में सामने आया कि ऑनलाइन क्लास के बाद वह लगातार मोबाइल पर वीडियो देखती और चेटिंग करती थी। परिजन टोकने पर वह उनकी बात अनसुनी कर देती थी।

  • पिता के क्रेडिट कार्ड से खेल लिया 7 हजार रुपए का गेम

लॉकडाउन में पिता के अकाउंट से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर एक बच्चे ने 7 हजार रुपए का गेम खेल लिया। जब पिता को रुपए कटने की जानकारी लगी तो साइबर पुलिस से शिकायत की। जांच में यह रकम उन्हीं के मोबाइल से पेड होने की जानकारी मिली। इस पर बेटे से पूछताछ के यह खुलासा हुआ।

बच्चों की अपनी वर्चुअल दुनिया और पैरेंट्स वर्क वर्ल्ड में व्यस्त

हमारे पास रोज बच्चों की काउंसलिंग के लिए 3-4 पैरेंट्स के फोन आते हैं
मोबाइल की लत की वजह से बच्चों में बिहेवियर डिसऑर्डर की समस्या आ रही हैं। हमारे पास रोज 3-4 फोन आते हैं। एक माह में तकरीबन 30 से अधिक पैरेंट संपर्क करते हैं। मैं दो स्कूल में बच्चों की काउंसलिंग करती हूं। यदि बच्चों से मोबाइल ले लिया जाए तो वे पैरेंट्स को ब्लैकमेल करते हैं। -रितु नंदा, चाइल्ड काउंसलर व मनोवैज्ञानिक

मोबाइल की लत ठीक वैसी ही है, जैसे कोकीन और अन्य नशे की लत
मोबाइल पर ऑनलाइन गेमिंग को एक मानसिक स्वास्थ्य विकार घोषित किया था। बच्चों में गेमिंग की वजह से कई तरह के डिसऑर्डर ज्यादा देखने मिल रहा है। मोबाइल की लत ठीक वैसी ही है जैसे कोकीन व अन्य नशे की लत। नहीं मिलने पर बच्चा आक्रामक हो जाता है। हमारे पास इस तरह के 2 से 4 केस रोज आते हैं। -जेपी अग्रवाल, मनोचिकित्सक, हमीदिया

मोबाइल की आदत छुड़ाने मनोवैज्ञानिकों ने सुझाए उपाए...

  • जब भी बच्चे आसपास हो तो पैरेंट्स उनके सामने मोबाइल फोन का उपयोग ज्यादा न करें।
  • बच्चों को सबसे ज्यादा मां-बाप के प्यार और देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए आप बच्चे के साथ अधिक समय बिताएं।
  • अगर आपका बच्चा जिद्दी है और आसानी से नहीं मान रहा, तो आप एक एप की मदद से भी उसकी मोबाइल की लत छुड़ा सकते हैं।
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