भोपाल में 9th स्टूडेंट का इनोवेशन:मक्के के स्टार्च से चॉकलेट रैपर-गिलास बनाए; देखने में प्लास्टिक की तरह, लेकिन खा सकते हैं

भोपालएक महीने पहले

ऐसा चॉकलेट रैपर, जिसे आप खा भी सकते हैं। प्लेट और गिलास भी, जिसे फेंकने की जरूरत नहीं। इन्हें भी खाया जा सकता है। यह इनोवेशन किया है भोपाल के सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में हुए इंडियन यंग इंवेंटर्स एंड इनोवेटर्स चैलेंज में बुराहनपुर से आई 9th क्लास की स्टूडेंट ने। प्रावशुा महाजन ने मक्के के स्टार्च से ऐसी चीजें बनाईं, जो दिखने में तो प्लास्टिक की तरह हैं, लेकिन इन्हें खाया भी जा सकता है।

इस टैलेंट हंट में देश के 5 राज्यों से 14 से 30 साल के यंग इनोवेटर्स ने अपने साइंस प्रोजेक्ट प्रजेंट किए। इन्हीं में से एक हैं बुरहानपुर के नेहरू मोंटेसरी पब्लिक स्कूल की 9वीं की स्टूडेंट प्रावुशा महाजन। उन्होंने प्लास्टिक के बढ़ते हुए उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को हो रहे नुकसान से बचाने के एक विकल्प के रूप में पैकेजिंग और डिस्पोजेबल आइटम्स के लिए मक्के के स्टार्च और ग्लिसरीन से एक एडिबल पैकेजिंग मटेरियल तैयार किया। इसे किसी भी फूड प्रोडक्ट को पैक कर उसके साथ ही खाया भी जा सकता है। इसका सेहत पर कोई नुकसान भी नहीं है। छात्रा प्रावुशा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में साइंस टीचर सुनंदा पाटिल ने उनकी मदद की।

ईको फ्रेंडली भी

टीचर पाटिल ने बताया कि दैनिक जीवन में बहुपैकेजिंग से लेकर हर इस्तेमाल में प्लास्टिक का ही यूज किया जा रहा है। पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक और डिस्पोजेबल मटेरियल से हो रहा है। इसके विकल्प के रूप में छात्रा ने मक्के के स्टार्च और ग्लिसरीन के मिक्स से ईको फ्रेंडली एडिबल पैकेजिंग मटेरियल तैयार किया है। ये मटेरियल पूरी तरह से हाईजीनिक और साफ है। छात्रा ने बताया कि वह इसके अलावा भुट्टे के छिलके से दोने पत्तल से बनाकर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जो कि आसानी से बायोडिग्रेडेबल भी हो जाते हैं।

केले के पेड़ के रेशे से पेपर बनाने की तैयारी

टीचर सुनंदा पाटिल ने बताया कि हम अपने आगामी प्रोजेक्ट्स में केले के पेड़ से निकलने वाले रस से हेयर डाई और रेशों से पेपर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।