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पढ़ाई से परे भी है जहां...:बच्चों पर प्रेशर न बनाएं; नौवीं के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी की; पढ़ाई में कमजोर होने से माता-पिता बड़े भाई का उदाहरण देते थे

भोपाल4 महीने पहले
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गोविंदपुरा पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन परिजनों के बयान के आधार पर ही पुलिस इसे पढ़ाई के लिए प्रेशर मानकर चल रही है। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
गोविंदपुरा पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन परिजनों के बयान के आधार पर ही पुलिस इसे पढ़ाई के लिए प्रेशर मानकर चल रही है। - फाइल फोटो
  • पढ़ाई में होशियार है बड़ा भाई, इसलिए छोटे पर बना मानसिक दबाव

पढ़ाई के प्रेशर में 14 साल के नाबालिग नौवीं के एक छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। माता-पिता उसके बड़े भाई की तरह पढ़ाई करने को लेकर उसे कहते रहते थे। इसके कारण वह मानसिक तनाव में चला गया था। हालांकि पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस अब सुसाइड का कारण पढ़ाई के प्रेशर मानकर चल रही है।

गोविंदपुरा पुलिस के अनुसार अन्ना नगर रेलवे पटरी के पास नरेश कुशवाहा रहते हैं। वह और उनकी पत्नी प्राइवेट जॉब करते हैं। उनका बड़ा बेटा दसवीं में पढ़ता है, जबकि 14 साल का छोटा बेटा करण कुशवाहा नौवीं कक्षा में पढ़ रहा था। उन्होंने पुलिस को बताया कि शनिवार सुबह वे ड्यूटी पर चले गए। बड़ा बेटा भी दोपहर में स्कूल चला गया था। घर पर करण अकेला था। शाम को जब बड़ा बेटा घर पहुंचा, तो करण उसे घर के अंदर फांसी के फंदे पर लटका मिला। उसने तत्काल फोन कर घर पर बुला लिया। नरेश ने घर पहुंचकर घटना की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

हिंदी तक ठीक से लिखनी नहीं आती थी

परिजनों ने पुलिस को बताया कि करण पढ़ने में बहुत कमजोर था। वह बड़ी मुश्किल से नौवीं क्लास तक पहुंच पाया था। करण को हिंदी तक ठीक से लिखनी नहीं आती थी। माता-पिता उसे पढ़ाई करने के लिए कहते थे। इस कारण से वह मानसिक तनाव में रहता था।

बड़े पर ज्यादा ध्यान देते थे

नरेश अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रयास कर रहे थे। वे छोटे बेटे को बड़े भाई की तरह पढ़ाई करने का कहते थे, लेकिन बड़े बेटे के पढ़ाई में अच्छे होने के कारण वह उस पर फोकस ज्यादा रखते हैं। बड़े बेटे को बीच-बीच में छोटे भाई को भी पढ़ाने के लिए कहते रहते थे, लेकिन करण का मन नहीं लगता था। माता-पिता की इन्हीं बातों के कारण करण गुमसुम रहने लगा था। हालांकि उसने किसी तरह का कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा है और ना ही मां-बाप से कुछ कहा।

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