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कोरोनावायरस:मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा- लॉकडाउन जारी रहेगा, नए स्वरूप में इसे आगे बढ़ाया जाएगा, इंदौर में लोग देर से इलाज कराने आए इसलिए हुई ज्यादा मौतें

भोपाल8 महीने पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदौर, भोपाल और उज्जैन में सामुदायिक संक्रमण को रोकने के लिये टोटल लॉक-डाउन किया गया है।
  • अभी लॉकडाउन हटाना अच्छा नहीं है, प्रदेश के 22 जिलों में संक्रमण फैल चुका है, जनता की जिंदगी की कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता
  • कोरोना खतरनाक नहीं है, समय रहते लोग इलाज कराएं तो ये ठीक हो सकता है, अगर ये फेंफड़ों में पहुंच जाए तो व्यक्ति का बचना मुश्किल हो जाता

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अमेरिका समेत अन्य देशों में जिस तरह से कोरोनावायरस का संक्रमण फैला है, उसे देखकर हमारे यहां भविष्य में क्या होगा हम कुछ नहीं कह सकते। हमारा पहला प्रयास है इसके संक्रमण को फैलने से रोकना और संक्रमण को रोकने में हम सफल हो रहे हैं। प्रदेश में प्रतिदिन 1050 टेस्ट की व्यवस्था थी। पेंडिंग सैंपल ज्यादा होने की वजह से आज ही स्टेट प्लेन से 1700 सैंपल दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में जांच के लिए भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आ जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन जारी रहेगा, लेकिन नए स्वरूप में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों को इसमें छूट दी जाएगी। अभी लॉकडाउन हटाना अच्छा नहीं है। प्रदेश में संक्रमण की चपेट में 22 जिले आ चुके हैं। जनता की जिंदगी की कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने ये बात रविवार दोपहर वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए पूरे प्रदेश के पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।  

चौहान ने कहा- इंदौर में लोगों की मौत का आंकड़ा इसलिए बढ़ा कि अधिकतर लोग ऐसी स्थिति में आए जब उनकी बीमारी बढ़ गई। कोरोना खतरनाक नहीं है, समय रहते लोग इलाज कराएं तो ये ठीक हो सकता है। अगर से फेंफड़ों में पहुंच जाए तो व्यक्ति का बचना मुश्किल हो जाता है। इंदौर में यही हुआ, जब तक लोग अस्पताल पहुंचे संक्रमण उनके फेंफड़ों तक पहुंच गया था। इसी वजह से लोगों की असमय मौत हो गई। 

बाहर से आए मजदूरों में एक भी संक्रमित नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में 29 हजार लोगों को एक साथ विभिन्न अस्पतालों में भर्ती करने की सुविधा है। 5 हजार पीपीटी किट हर दिन तैयार किए जा रहे हैं, अगले सप्ताह तक इनकी संख्या 10 हजार तक पहुंच जाएगी। दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि भोपाल में 57 विदेशी जमाती और अन्य जमातियों की वजह से संक्रमण फैला है। भोपाल से लगते बाकी जिलों में भी जमातियों की वजह से संक्रमण फैलने की पुष्टि हो चुकी है। देश में लॉक डाउन होने के बाद लाखों लोग वापस अपने घर आए हैं। लेकिन अच्छी बात ये है कि इनकी जितने लोगों की भी सक्रीनिंग हुई है उसमें से किसी में भी संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं।  

बेहतर इलाज के लिए चार स्तरीय योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण से ग्रस्त लोगों के बेहतर उपचार के लिये चार-स्तरीय योजना बनाई गई है। भोपाल एवं इंदौर को अलग-अलग कई जोन में बांटा गया है। प्रदेश को कोरोना से मुक्त करने के लिये जिला-स्तरों पर राज्य-स्तरीय क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप बनाये गये हैं। डेटा के आधार पर कोरोना प्रभावित हॉट-स्पॉट को चिन्हित कर उन्हें कंटेनमेंट एरिया में तब्दील कर दिया गया है। सभी जिलों में लॉक-डाउन का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया है। इंदौर, भोपाल और उज्जैन में सामुदायिक संक्रमण को रोकने के लिये टोटल लॉक-डाउन किया गया है। माइक्रो मैनेजमेंट प्लान तैयार कर कोरोना के मरीजों की पहचान करने, उन्हें ट्रेस करने और उसके बाद परीक्षण और इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

टेली-मेडिसीन केन्द्र बनाये गये हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये हाई रिस्क क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन में तब्दील किया जा रहा है। आवश्कयता अनुसार संदिग्ध मरीजों को तत्काल प्रभाव से उसी क्षेत्र में क्वारेंटाइन और आइसोलेट किया जा रहा है। होम क्वारेंटाइन किये गये लोगों को घरों से सीधे संवाद करने के लिये सभी जिलों में टेली-मेडिसीन केन्द्र बनाये गये हैं। वीडियो कॉलिंग के माध्यम से प्रभावित व्यक्ति से चिकित्सक सीधे संवाद कर सकते हैं। क्वारेंटाइन किये गये व्यक्तियों की निगरानी के लिये 'सार्थक'' एप विकसित किया गया है। इसमें फोटो बेस्ड टेगिंग पद्धति से मरीजों की निगरानी की जा रही है।

107 अस्पतालों को मरीजों के उपचार

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 वायरस की टेस्टिंग के समुचित प्रबंध कर लिये गये हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सागर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ ही 8 निजी चिकित्सा महाविद्यालयों और निजी क्षेत्र के 107 अस्पतालों को मरीजों के उपचार के लिये चिन्हित किया गया है। विशेषत: कोविड-19 के उपचार के लिये 23 अस्पताल चिन्हित किये गये हैं। प्रदेश में प्रतिदिन एक हजार टेस्ट की क्षमता प्राप्त की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स हैं, जो आवश्यकतानुसार संभागीय मुख्यालयों पर पहुंचा दिये गये हैं। हाईड्रो क्लोरोक्वीन गोलियों की मात्रा भी पर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, एन-95 मॉस्क वितरित किये जा रहे हैं। नर्सों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ को निरंतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिये डब्ल्यूएचओ तथा यूनिसेफ के माध्यम से प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर जूम एप द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एसएमएस मिलने पर ही किसान आएं फसल बेचने

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के समय बिना भीड़भाड़ के, पूरी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ फसल के उपार्जन के लिए ज़िलों में अधिक से अधिक उपार्जन केन्द्र बनाए जाएं। किसानों को स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया जाए कि एसएमएस मिलने पर ही किसान अपनी फसल बेचने उपार्जन केन्द्र पर आएं। मुख्यमंत्री को बताया गया कि इस प्रकार की व्यवस्था की जा रही है कि एक दिन में औसतन 10 किसान फ़सल बेचने आएं। इसके लिए किसानों को दिनांक व पारी का एसएमएस किया जाएगा। इस बार प्रतिदिन दो पारियों में खरीद होगी। वे नियत दिनांक व पारी पर ही उपार्जन केंद्र पर आएंगे। भोपाल, इंदौर एवं उज्जैन को छोड़कर शेष ज़िलों में 15 अप्रैल से उपार्जन प्रारम्भ होगा।

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