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टीका समान पर नियम अलग:कोवैक्सीन लगवाने से पहले भरना होगा कंसेंट फॉर्म, कोविशील्ड में ऐसा नहीं

भोपालएक महीने पहले
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इंडिगो की हैदराबाद फ्लाइट से एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर उतरे कोवैक्सीन के 21 बॉक्स। - Dainik Bhaskar
इंडिगो की हैदराबाद फ्लाइट से एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर उतरे कोवैक्सीन के 21 बॉक्स।
  • राजधानी में पहली बार भारत बायोटेक की कोवैक्सीन आई, संभाग को मिले 1 लाख 50 हजार डोज
  • कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने के दौरान किसी तरह का कंसेंट फॉर्म नहीं भरवाया जा रहा

कोविशील्ड के बाद अब देश में ही बनी दूसरी कोराेना वैक्सीन कोवैक्सीन भी शहर में आ गई है। इस वैक्सीन की खेप शुक्रवार को इंडिगो की हैदराबाद फ्लाइट से राजा भोज एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर पहुंची। दोपहर 12:30 बजे इंसुलेटेड वैक्सीन वैन के जरिए इसके 21 बाॅक्स किलोल पार्क स्थित रीजनल वैक्सीन स्टोर पहुंचाए गए।

यहां से ये वैक्सीन किन जिलों को भेजी जाएगी, यह अभी तय नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि दिल्ली और जयपुर की तरह यहां भी कोवैक्सीन लगवाने वालों से कंसेंट फॉर्म भरवाया जाएगा। जबकि कोविशील्ड का डोज लगवाने के दौरान किसी तरह का कंसेंट फॉर्म नहीं भरवाया जा रहा है। कोवैक्सीन लगाने से पहले इसके फायदे और मामूली साइड इफेक्ट की जानकारी भी दी जाएगी। यदि कोई साइड इफेक्ट होता है तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित, घबराएं नहीं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एमडी छवि भारद्वाज ने बताया कि कोवैक्सीन के प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाएगा। दूसरे राज्यों में कंसेंट फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, यहां पर भी भरवाए जाएंगे। हालांकि इसमें ऐसी कोई जानकारी नहीं ली जाएगी, जिससे वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार की कोई परेशानी हो। कोवैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है. इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि अभी 4 लाख 16 हजार हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का काम चल रहा है, इसलिए उन्हें कोविशील्ड ही लगाई जाएगी।

फॉर्म भरवाने का मुख्य कारण
चूंकि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सेंट्रल ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने कोवैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। इसके ड्रग ट्रायल का तीसरा चरण जारी है, अभी परिणाम भी जारी नहीं हुए हैं।

दोनों वैक्सीन में क्या है अंतर

काेवैक्सीन

  • कोवैक्सीन को कोविड-19 को निष्क्रिय करके तैयार किया गया है। आईसीएमआर ने भारत बायोटेक को जिंदा वायरस प्रदान किया था। इस वायरस को निष्क्रिय करके भारत बायोटेक ने वैक्सीन तैयार की है।
  • इस वैक्सीन में उम्र की सीमा के बारे में कंपनी द्वारा जारी फैक्ट शीट में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
  • वैक्सीन के एक वायल से 20 लोगों को टीका लगाया जाएगा।
  • सेंट्रल ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने कोवैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। भारत सरकार ने जिन लोगों को कोरोना वैक्सीनेशन के प्रायोरिटी ग्रुप्स में रखा है, उन्हें वैक्सीन लगाई जा रही है।

कोविशील्ड

  • ​​​​​​कोविशील्ड वैक्सीन को एडिनोवायरस को निष्क्रिय करके विकसित किया गया है।
  • इस वैक्सीन की फैक्ट शीट के अनुसार कंपनी ने 18 साल या उससे अधिक उम्र वाले लोगों के लिए आपातस्थिति में सीमित प्रयोग के साथ लगाने की अनुमति दी गई है।
  • इस कोविशील्ड वैक्सीन के एक वायल से 10 लोगों को टीका लगाया जा सकता है।
  • इस वैक्सीन को सेंट्रल ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी से सीमित प्रयोग के लिए आपातस्थिति में इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इस वैक्सीन के ट्रायल के परिणाम आ चुके हैं। यह पूरी तरह सुरक्षित है।
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