संक्रमण का असर:जेपी के दोनों गेट पर कोरोना जांच की कतारें, इसलिए घट गई ओपीडी

भोपाल6 महीने पहले
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1700 मरीज प्रतिदिन आते थे यहां अब 300 तक घटकर रह गई है इनकी संख्या। - Dainik Bhaskar
1700 मरीज प्रतिदिन आते थे यहां अब 300 तक घटकर रह गई है इनकी संख्या।
  • कोरोना कर्फ्यू के दौरान जगह-जगह बैरिकेडिंग और परिवहन के साधन न मिलने से भी घटे जेपी अस्पताल में मरीज

जेपी अस्पताल की ओपीडी में सामान्य दिनों की अपेक्षा 10 से 15 फीसदी मरीज ही आ रहे हैं। गुरुवार को भी पूरे दिन में बमुश्किल 250 से 300 मरीज ही आए। जबकि पहले आम दिनों में 1500 से 1700 मरीज प्रतिदिन आया करते थे। बीते एक महीने में यह संख्या कम हुई है। जानकारों की मानें मरीज यहां आने से बच रहे हैं, जबकि इस समय सबसे नजदीकी सरकारी अस्पताल एम्स समेत दूसरे प्राइवेट अस्पताल की ओपीडी भी बंद है। ओपीडी के साथ अब फीवर क्लीनिक में भी मरीजों की संख्या कम हो गई है। आखिर अचानक मरीजों की इस संख्या के कम होने की क्या वजह है?

तय समय पर शुरू होती है ओपीडी
हकीकत जानने के लिए जेपी अस्पताल में डॉक्टर व मरीजों से बात की। इसमें पता चला कि जेपी के दोनों मुख्य प्रवेश द्वार पर कोरोना जांच कराने आए मरीजों की कतारें लगी रहती हैं। वहीं अस्पताल परिसर में ही कोविड वार्ड भी बना हुआ है। यह स्थिति देखकर अब मरीजों ने यहां आना कम कर दिया। जबकि अस्पताल में तय समय पर ओपीडी शुरू हो जाती है। इमरजेंसी के साथ आर्थोपैडिक, स्त्रीरोग विभाग में समय पर डॉक्टर बैठ रहे हैं और अस्पताल आने वाले मरीजों की जांच कर रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि डॉक्टर इस बात से अंजान हैं। डॉक्टर्स के अनुसार अभी शहर में कर्फ्यू लगा है और जगह-जगह बैरिकेडिंग है। सार्वजनिक परिवहन बंद है। ऐसे में मरीजों को आने-जाने में दिक्कत होती है। डॉक्टर अस्पताल में कोविड वार्ड होने को भी वजह मानते हैं।

जिम्मेदार बोले-ओपीडी नियमित खुल रही है, लोग ही कम आ रहे
अस्पताल परिसर में कोविड जांच के लिए अलग-अलट टीम बना दी है, इस कारण अब एक जगह कतार नजर नहीं आती। रही बात ओपीडी की तो नियमित रूप से डॉक्टर बैठ रहे हैं। लेकिन लोगों को अभी आने-जाने में समस्या है। कोरोना के कारण लोग अब हर छोटी बीमारी पर अस्पताल आने से बचते हैं। इसलिए संख्या कम हो गई है।
ओपीडी नियमित खुल रही है, लोग ही कम आ रहे
डॉ. परवेज खान, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल

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