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मददगार कदम:कोरोना पीड़ित 165 दंपती होम आइसोलेशन में, ऐसे में बच्चों की फरमाइश पूरी कर रहे वॉलेंटियर्स; कोई तरबूज पहुंचा रहा तो कोई कहानी की किताब

भोपाल12 दिन पहले
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बच्चे की जिद पूरी करने तरबूज लेकर पहुंचे वॉलेंटियर। - Dainik Bhaskar
बच्चे की जिद पूरी करने तरबूज लेकर पहुंचे वॉलेंटियर।
  • कोरोना वॉरियर पूरी कर रहे जिद ताकि परिवार की कमी महसूस नहीं करें बच्चे

कोरोना से ऐसे पैरेंट परेशान है जिनके बच्चे छोटे हैं। वे न तो उनसे मिल पा रहे हैं और न ही ख्वाहिशें पूरी कर पा रहे हैं। ऐसे ही दो मासूमों की जिद पूरी करने पैरेंट्स ने सोशल मीडिया पर मदद मांगी। इसमें एक मासूम को रात में तरबूज खाना था। वहीं, बच्ची को बार्बी गर्ल वाली ड्राइंग बुक चाहिए थी। उनकी जिद कोविड- 19 ग्रुप तक पहुंचने पर पूरी हुई। ऐसे ही कई बच्चों की मदद स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के डाॅक्टरों की टीम ने भी की। वर्तमान में होम आइसोलेशन में 1679 लोग हैं। इसमें से 165 ऐसे लोग है जिसमें पति-पत्नी दोनों ही पॉजिटिव हैं। कई मरीजों के बच्चों की उम्र 10 वर्ष है। भास्कर ने जानी बच्चों की जिद पूरी करने की कहानी...

कार्टून देखकर बोली- चाहिए बार्बी गर्ल वाली ड्राइंग बुक; साकेत नगर में पति और पत्नी दोनों संक्रमित हैं। उनकी 4 साल की बच्ची वंशिका वंशकार को दादाजी संभाल रहे हैं। कार्टून देखते हुए बेटी बार्बी गर्ल वाली ड्राइंग बुक की जिद करने लगी। मां ने सोशल मीडिया पर गुहार लगाई। कोविड़ 19 ग्रुप में जब बच्ची की जिद पहुंची तो ग्रुप के सदस्य एक ड्राइंग बुक उसके घर के बाहर छोड़कर आ गए।

तरबूज खाना है, नहीं तो खाना नहीं खाऊंगा; चिरायु में भर्ती तीन वर्षीय बच्चे की जिद थी कि उसे तरबूज चाहिए। पीपीई किट पहनकर पहुंची मां ने भी बच्चे को समझाने की कोशिश की लेकिन बच्चा मानने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार मां सुनीता पाटीदार और पिता नरेंद्र पाटीदार ने सोशल मीडिया पर लिखा। जीवन सार्थक ग्रुप के वॉलेंटियर शैलेंद्र दुबे को जब जानकारी मिली तो वे तरबूज लेकर अस्पताल पहुंच गए।

आज मेरा बर्थ डे है, मुझे केक काटना है; डॉ. सुनीधि मेहरा ने बताया कि एक परिवार होम आइसोलेशन में था। उनकी 5 वर्षीय बच्ची निगेटिव थी। उसका बर्थडे था। फालोअप के दौरान बच्ची की जिद पता चली। वे घर गईं, केक बनाया। इसके बाद वे घर के बाहर केक व गिफ्ट रखकर आ गईं।

गूगल मीट से जोड़कर; परिवार और दोस्त से कराई बात; कंट्रोल रुम की प्रभारी डॉ. संगीता ने बताया कि एक दंपती पॉजिटिव होने पर होम आइसोलेशन में थे। उनकी 10 साल और 6 साल की बेटी हैं। उनके घर मेडिकल मोबाइल यूनिट खाने के पैकेट पहुंचाती थी। बच्चों से मोबाइल पर परिवार और दोस्तों से बात कराती थी ताकि परेशानी न हो।

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