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बैठक में सीएम से बोले डॉक्टर्स:कोरोना संक्रमण से हुई मौत और मरीज को दी गई स्टेराॅयड का ऑडिट हो

भोपालएक महीने पहले
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विशेषज्ञों के साथ बैठक में आए अहम सुझाव। - Dainik Bhaskar
विशेषज्ञों के साथ बैठक में आए अहम सुझाव।

कोरोना से हुईं मौतों और मरीजों पर इस्तेमाल की गई स्टेराॅयड के ऑडिट को लेकर आवाज मुखर होने लगी है। एम्स भोपाल के डॉ. देवाशीष विश्वास ने कहा कि स्टेराॅयड के उपयोग का ऑडिट हो। इससे ब्लैक फंगस रोकने में मदद मिलेगी। डॉ. महेश माहेश्वरी ने कहा कि डेथ ऑडिट की भी व्यवस्था हो। डॉ. के. मदन गोपाल ने कहा कि मौतें कैसे रोकें, इसके लिए समीक्षा की सही व्यवस्था हो। शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशेषज्ञों, डॉक्टरों और ग्रुप ऑफ ऑफिसर के साथ मीटिंग की। इसमें सुझाव लिए गए कि कोरोना को रोकने के लिए और क्या उपाय हो सकते हैं।

सुधार की संभावनाएं कहां हैं। सीएम ने कहा कि ब्लैक फंगस की पहचान के लिए जल्द एडवाइजरी जारी होगी। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर और रीवा मेडिकल कॉलेज में विशेष वार्ड इसका काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न स्थानों में पदस्थ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों से भी बात की। सीएम ने सनफार्मा के दिलीप सांघवी से बात की। वे ब्लैक फंगस की रोकथाम के लिए दो हजार इंजेक्शन देंगे।

ये प्रमुख हुए शामिल

नीति आयोग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. के. मदन गोपाल, दिल्ली स्थित थिंक टैंक रिसर्च एंड इनफार्मेंशन सिस्टम इन डेवलेपमेंट कंट्रेरीज में डायरेक्टर जनरल तथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में सदस्य प्रो. सचिन चतुर्वेदी, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. अभिषेक जैन, जीएमसी भोपाल की सदस्य डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव व डॉ. लोकेंद्र दवे, यूनिसेफ की वंदना भाटिया, डॉ. राहुल खरे, डॉ. निशांत खरे, एम्स भोपाल के डॉ. देवाशीष विश्वास, डॉ. पी.के. पांडे शामिल हुए। सरकारी अफसरों ने भी सुझाव दिए।
नर्सिंग होम भी कराएं ऑडिट: डॉक्टर्स

  • सचिन चतुर्वेदी - वैक्सीन के मूल्य के लिए राज्य मिलकर नेगोसिएशन करें। रिजर्व बैंक के साथ बात कर 50 करोड़ के पैकेज का लाभ लेते हुए ऑक्सीजन यूनिट लगाई जा सकती है।
  • डॉ. अभिषेक जैन - टीकाकरण में शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए।
  • डॉ. लोकेंद्र दवे - नर्सिंग होम अपने कार्यों का इनफॉरमल ऑडिट करें।

डॉक्टरों को सरकारी काम से हटाएं : अफसर

  • एसीएस डॉ. राजेश राजौरा : स्टेट रैपिड रिस्पांस टीम का गठन हो, जिसमें तकनीकी रूप से दक्ष व्यक्ति भी सम्मिलित हों।
  • पीएस मनोज गोविल : हैल्थ की अगले दो-तीन साल की आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन और सामग्री जुटाई जाए।
  • पीएस संजय दुबे : अस्पतालों में स्वास्थ्य प्रबंधन और इलाज को अलग-अलग रखा जाए। इलाज के आधार पर अस्पतालों की रेटिंग हो।
  • पीएस पल्लवी जैन गोविल : स्वास्थ्य प्रबंधन का अलग कैडर हो। स्वास्थ्य नियामक आयोग का गठन हो।
  • सचिव सुखबीर सिंह : राशन के साथ-साथ विटामिन की गोलियों का वितरण हो।
  • संभागायुक्त इंदौर पवन शर्मा : जो डॉक्टर प्रशासनिक या प्रबंधकीय कार्यों में लगे हैं, उन्हें इलाज के काम में लगाया जाए। विदेश में पढ़कर आए लगभग 8 से 10 हजार डॉक्टरों के एग्जिट एग्जाम के लिए एमसीआई से आग्रह किया जाए।
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