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कोरोना वॉरियर:डेढ़ साल में ब्लड कैंसर को हराया, अब फेफड़ों तक जा पहुंचा था संक्रमण; 15 दिन में कोरोना पूरी तरह घर से बाहर

भोपाल11 दिन पहलेलेखक: मनोरमा शाह
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बाएं से पोता सचिन, मनोरमा शाह, बेटा गुंजन, बहू सुनीता। - Dainik Bhaskar
बाएं से पोता सचिन, मनोरमा शाह, बेटा गुंजन, बहू सुनीता।

मैं साउथ टीटी नगर स्थित गीतांजलि कॉम्प्लेक्स में रहती हूं। उम्र 65 साल है। शासकीय स्कूल में करीब 33 साल टीचर रही। यहां परिवार में बेटा गुंजन कुमार(45), बहू सुनीता गुप्ता (42) और पोता सचिन स्वरूप(17) है। बेटा गुंजन राष्ट्रीय बैंक में चीफ मैनेजर है। 20 मार्च को बेटे गुंजन की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसलिए परिवार के बाकी सदस्यों ने भी 21 को कोरोना टेस्ट कराया। बहू को छोड़कर मेरा पोता और मैं भी पॉजिटिव आ गई। बेटा बहुत परेशान था, क्योंकि मार्च 2019 से अगस्त 2020 तक मैं ब्लड कैंसर की गिरफ्त में थी।

मुझे कोरोना हुआ तो संक्रमण फेफड़ों तक जा पहुंचा। सीटी स्कोर 2/25 था, इसलिए बेटे का चिंता करना लाजिमी था। वो कहता कि मां आपकी इम्युनिटी बहुत कमजोर है। कहीं से पूरे फेफड़ों में संक्रमण न फैल जाए। मैंने उसे समझाया, जो होगा देखा जाएगा। मैंने बेटे से कहा कि जब मैं डेढ़ साल में ही कैंसर काे हरा सकती हूं तो यह मानकर चलो कि कोरोना मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। दिमाग से डर निकाल दो। हम सभी होम आइसोलेशन में ही रहे। पोते और बेटे को भी समझाया कि कोरोना हुआ है तो कुछ अलग नहीं करना है, जैसे सामान्य दिनों में रहते हो वैसे ही रहो।

पोता 12 वीं क्लास में है। वह जेईई की तैयारी भी कर रहा था। मैंने उससे कहा कि वह अपनी किताबें भी साथ रखे और पहले की तरह नियमित पढ़ाई करता रहे। बेटे से वर्क फ्रॉम होम करने को कहा। दोनों ने मेरी बात मानी। मुझे लेकर वे चिंतित न हो इसलिए मैंने अपनी दिनचर्या को सामान्य बनाने पर खास जोर दिया। सुबह 4 बजे उठ जाती। छत पर घूमने के बाद योगा-प्राणायाम करती। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करती। इसके बाद नियमित नाश्ता। दिनभर बच्चों से सामान्य दिन की तरह गपशप। भरपूर आराम।

धीरे-धीरे मैं अपने बेटे और बहू को यह यकीन दिलाने में सफल रही कि कोरोना मुझ पर कोई असर नहीं डाल रहा है। सकारात्मकता का नतीजा यह हुआ कि 12 दिन बाद 2 अप्रैल को घर में रहते हुए गुंजन की करोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई। 5 अप्रैल को मेरी और पोते की भी रिपोर्ट निगेटिव आई। बेटे ने मेरा दूसरी बार सीटी स्कैन कराया।

रिपोर्ट में पता चला कि मेरी रिपोर्ट नॉर्मल है। फेफड़ों का संक्रमण बढ़ने के बजाय घट गया। कोरोना की दूसरी लहर बहुत तेज है। जो रिश्तेदार और पड़ोसी कोरोना की चपेट में आए हैं, वे भी फोन करके सलाह लेते रहते हैं। मैंने ब्लड कैंसर पर बिना कीमोथैरेपी के विजय हासिल की थी, इसलिए कोरोना का हराना मुश्किल नहीं लगा।

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