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डेंगू के मरीजों की संख्या 5400 के पार:मंदसौर बना हॉटस्पॉट, यहां 1 हजार से ज्यादा बीमार; MP में एक महीने में 3685 पेशेंट मिले; सरकारी रिकॉर्ड में 5 की मौत

भोपाल2 महीने पहले

मध्यप्रदेश में कोरोना से बिगड़े हालात सुधरने के बीच तीसरी लहर की आशंका से दहशत है। इसी बीच तेजी से फैल रहे डेंगू ने भी लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य में अब तक डेंगू मरीजों की संख्या 5400 के पार हो गई है। सितंबर के 28 दिनों में सबसे ज्यादा 3685 मरीज मिले हैं। मंदसौर डेंगू का हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहां पर अब तक 1 हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। इसमें से 622 मरीज सिर्फ सितंबर में आए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में प्रदेश में डेंगू से 5 मौत हुई है, जबकि अकेले रतलाम में डेंगू से 5 मौतें हो चुकी हैं। इन्हें शामिल नहीं किया गया है। जानकारों का कहना है कि डेंगू मरीज सरकारी आंकड़े से कई गुना ज्यादा हैं। उनका कहना है कि डेंगू से मौत होने के बावजूद उसे रिकॉर्ड में नहीं लिया जा रहा है।

सरकारी रिकॉर्ड में पांच मौत
मध्य प्रदेश में डेंगू के मरीजों की कई शहरों में मौत के मामले सामने आए हैं। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में अब तक सिर्फ पांच मौतें ही रिपोर्ट की गई हैं। इसमें सबसे ज्यादा आगर में 2 एवं इंदौर, सिवनी, रीवा जिले में 1-1 मौत रिपोर्ट है। जबलपुर में 10 और रतलाम में पांच मौतें डेंगू से हुई हैं। इसे शामिल नहीं किया गया है।

जबलपुर दूसरे नंबर पर
जबलपुर में डेंगू के अब तक 628 मरीज मिल चुके हैं। यहां पर मंदसौर के बाद डेंगू मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। सितंबर के 28 दिनों में जबलपुर में 406 नए मरीज मिले हैं। इससे पहले जनवरी से अगस्त 2021 तक सिर्फ 222 मरीज थे। यहां पर एक महिला कांस्टेबल समेत 10 से ज्यादा लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी है।

उज्जैन में 28 दिन में 294 मरीज
उज्जैन में जनवरी से अगस्त तक डेंगू का कोई मरीज नहीं था। सितंबर में यहां पर डेंगू के 294 मरीज मिले हैं, वहीं इंदौर में जनवरी से अगस्त 2021 तक डेंगू के सिर्फ 63 मरीज थे। यहां पर सितंबर में मरीजों की संख्या 400 के पार पहुंच गई। 28 दिन में 337 से ज्यादा मरीज मिले हैं। यहां पर सरकारी रिकॉर्ड में डेंगू से एक मौत की पुष्टि हुई है। भोपाल में भी डेंगू मरीजों की संख्या 364 के पार पहुंच गई है।

डेंगू रोकने के एक्शन प्लान पर उठ रहे सवाल
जानकारों का कहना है कि अगस्त से डेंगू-मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक्शन प्लान बनाता है। इसमें पानी स्टोर करने वाले घर, छत, गमले, खाली पडे़ प्लाट में पानी जमा होने पर उनका सर्वे कर लार्वा को पनपने से रोकने के लिए दवा का छिड़काव किया जाता है। जानकारों का कहना है कि एक्शन प्लान के क्रियान्वयन में खानापूर्ति की गई है। यही कारण है कि सितंबर में तेजी से डेंगू मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।