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2 लाख शिक्षकों को नहीं मिला सितंबर का वेतन:डीईओ ने संचालनालय को लिखा पत्र, मांगा बजट; मंत्री बोले- बजट की नहीं, यह तो तकनीकी समस्या

भोपाल6 दिन पहले
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  • अक्टूबर के 17 दिन बीते... त्योहारी खुशियों पर बजट का ग्रहण

कोरोना काल के तनाव के बीच त्योहारों की खुशियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों के दो लाख से ज्यादा शिक्षकों की खुशियों पर फिलहाल बजट का ग्रहण लगा हुआ है। इन शिक्षकों को अब तक सितंबर माह का वेतन नहीं मिला है। अक्टूबर के 17 दिन बीत जाने के बावजूद दो लाख शिक्षक वेतन का इंतजार कर रहे हैं। इसकी वजह बजट उपलब्ध नहीं होना है।

भोपाल के फंदा ब्लॉक के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने जब जिले के शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को इस बावत सूचित किया तो उन्होंने लोक शिक्षक संचालनालय को चिट्‌ठी लिखकर बजट देने को कहा। जबकि स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार का कहना है कि बजट की दिक्कत नहीं है। संविलियन के कारण इनका हेड बदलना है। इसका प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा है। मुख्यमंत्री से भी बात हुई है। दो-तीन दिन में निराकरण हो जाएगा।

शीघ्र उपलब्ध हाेगा बजट
प्राइमरी स्कूल के बजट शीर्ष में बंटन नहीं हाेने के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियाें के स्तर पर चर्चा की गई है, शीघ्र बजट उपलब्ध कराया जा रहा है।
- नितिन सक्सेना डीईओ, भाेपाल


कानूनी पक्ष : वेतन सात दिन न मिले ताे कर सकते हैं शिकायत
कंपनी लाॅ में इस बारे में काेई प्रावधान नहीं है, लेकिन श्रम कानून में यह प्रावधान है कि यदि महीना खत्म के सात दिन बाद तक वेतन या मेहनताना नहीं मिलता है ताे संबंधित कर्मचारी स्वयं या अपनी यूनियन के माध्यम से श्रमायुक्त काे इसकी शिकायत कर भुगतान करने के लिए आवेदन दे सकते हैं। -डीके जैन , कंपनी सेक्रेटरी

हेड के मायने : वाे मदें, जिनमें बजट खर्च हाेता है
मंत्री परमार ने जिस हेड का जिक्र किया है, वह एक तरह की मदें हाेती हैं, जिन पर बजट खर्च हाेता है। जिस तरह घर के बजट में किराना, सब्जी, दूध वगैरह में अलग-अलग राशि के खर्च का ब्याेरा रखा जाता है, वैसे ही शासकीय प्रक्रिया में राशि खर्च करने के अलग-अलग मद शासन द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार रखे गए हैं। इन्हें ही विभागीय भाषा में हेड कहा जाता है।

वेतन का गणित: दो लाख शिक्षकों के वेतन पर हर माह खर्च होते हैं 950 करोड़ रु.

  • बता दें कि भोपाल में 749 तो प्रदेश में करीब 81335 सरकारी प्राइमरी स्कूल हैं।
  • इनके शिक्षक दो कैडर के हैं। सहायक शिक्षक/प्रधानाध्यापक और प्राथमिक।
  • सहायक कैडेर का मासिक वेतन 70 से 80 हजार, प्राथमिक का 40 से 49 हजार।
  • प्रदेश में 50 हजार सहायक/प्रधानाध्यापक हैं तो 1.50 लाख प्राथमिक शिक्षक। (भोपाल में क्रमश: 1200 व 3200)।
  • इस तरह इनके मासिक वेतन पर करीब 950 करोड़ रु. खर्च होते हैं।
  • पहले कैडर के लिए 600 करोड़ और दूसरे के लिए करीब 350 करोड़ रुपए।

सभी जिलों ने मांगा बजट, संचालनालय को भेजे पत्र
फंदा बीईओ के पत्र का हवाला देते हुए डीईओ द्वारा पत्र में कहा गया है कि बजट शीर्ष 27-2020-01-11-101- 4396 में बंटन उपलब्ध कराएं। इनके अलावा अन्य जिलाें के अधिकारियाें ने भी संचालनालय काे पत्र लिखे हैं।

शिक्षक संगठनों की चेतावनी: तीन दिन में वेतन नहीं तो आंदोलन करेंगे सभी शिक्षक
सितंबर का वेतन अटकने के कारण मप्र शिक्षक कांग्रेस, शासकीय अध्यापक संगठन, आजाद अध्यापक संघ समेत शिक्षकाें भी विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव, आयुक्त और वित्त विभाग के अधिकारियाें काे चिट्ठी भेजकर जल्द वेतन देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि त्याेहारी सीजन शुरू हाे चुका है। यदि तीन दिन में वेतन नहीं मिला ताे आंदाेलन करेंगे।

नियम यह है... माह के पहले दिन तक पिछले माह का वेतन मिले
वेतन-भत्ता विशेषज्ञ एमपी द्विवेदी के मुताबिक माह के अंतिम कार्य दिवस अथवा अगले माह के प्रथम कार्य दिवस पर वेतन देना जरूरी है। यही नियम है। यदि बजट नहीं है ताे वेतन भुगतान अटकने पर किसी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, क्याेंकि बजट की अनुमति वित्त विभाग देता है और संबंधित विभाग मदवार राशि का आवंटन करता है। इस प्रक्रिया में देरी संभव है।

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