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चिकित्सकों के शिक्षक का निधन:भोपाल के 90 साल के डॉ. एनपी मिश्रा ने रविवार सुबह घर पर ली अंतिम सांस; भदभदा विश्राम घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

भोपाल2 महीने पहले
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डॉ. एनपी मिश्रा। - Dainik Bhaskar
डॉ. एनपी मिश्रा।

भोपाल के सीनियर डॉक्टर एनपी मिश्रा का शिक्षक दिवस पर निधन हो गया है। 90 वर्षीय डॉ. मिश्रा लंबे समय से अस्वस्थ थे। उन्होंने प्रोफेसर कॉलोनी स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट पर किया गया। मुखाग्नि बेटे मनोज मिश्रा और सुनील मिश्रा ने दी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को यह अघात सहने की शक्ति दे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग डॉ. मिश्रा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उन्होंने कहा, डॉ. मिश्रा का जाना मेर लिए व्यक्तिगत क्षति है।

राज्य सूचना आयुक्त और उनके परिवार के नजदीकी राहुल सिंह ने बताया कि डाॅ. नरेंद्र प्रसाद मिश्रा रविवार सुबह 5.30 बजे उठकर नियमित दवा लेकर कुर्सी पर बैठे थे। सुबह करीब 7 बजे परिवार के सदस्यों ने देखा तो उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। राहुल सिंह ने बताया कि उनकी उम्र ज्यादा थी। इसके बावजूद वह बहुत एक्टिव थे। वह प्रतिदिन मरीजों को देखते थे। उनके तीन बेटे हैं। एक बेटा यूएस में है।

डॉ. एनपी मिश्रा को श्रद्धांजलि देते चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग।
डॉ. एनपी मिश्रा को श्रद्धांजलि देते चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग।

मेडिकल कॉलेज के डीन रहे हैं डॉक्टर मिश्रा
डॉ. एनपी मिश्रा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन रहे हैं। उन्होंने MBBS की पढ़ाई भी गांधी मेडिकल कॉलेज से की थी। फिर कॉलेज के मेडिसिन विभाग के HOD बने। यूनाइटेड डॉक्टर फेडरेशन के महासचिव डॉ. ललित श्रीवास्तव ने कहा कि आज शिक्षक दिवस पर चिकित्सकीय जगत के भीष्म पितामह और चिकित्सकों के संरक्षक का जाना हम सभी के लिए बड़ी क्षति है। वह अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिजिशयन थे। सभी चिकित्सकों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी है।

भदभदा विश्रामघाट पर डॉ.एनपी मिश्रा का अंतिम संस्कार किया गया।
भदभदा विश्रामघाट पर डॉ.एनपी मिश्रा का अंतिम संस्कार किया गया।

कार्डियोलॉजी पर लिखी है किताब
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. मिश्रा ने कार्डियोलॉजी पर एक किताब लिखी थी, जो डीएम कार्डियोलॉजी के छात्र पढ़ते हैं। इस किताब का नाम प्रोग्रेस एंड कार्डियोलॉजी है। इसका विमोचन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और ब्रिटेन के युवराज के हाथों किया गया था।

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. मिश्रा ने लाखों मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया और हजारों की संख्या में अच्छे डॉक्टर तैयार किए। उनका जीवन बहुत निष्पक्ष और स्पष्टवादी रहा है। वह हमेशा डॉक्टरों और छात्रों की प्रति संवेदनशील रहते थे।

भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ितों की सेवा के लिए उल्लेखनीय काम किया था

भोपाल गैस त्रासदी के समय डॉ.एनपी मिश्रा ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया था। उन्होंने कम समय में ऐसी व्यवस्था जमाई कि 10 हजार 7 सौ पीड़ितों का हमीदिया में इलाज संभव हो सकता। रात दिन काम करके राहत पहुंचाई थी।

सन 1992 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिसिन ने उन्हें प्रतिष्ठित सर्वोच्च सम्मान डॉ. बीसी राय अवार्ड से अलंकृत किया। 1995 में एसोसिएशन आफ फिजीशियंस ऑफ इंडिया ने गिफ्टेड टीचर अवार्ड से सम्मानित किया ।

सन 1992 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिसिन ने उन्हें प्रतिष्ठित सर्वोच्च सम्मान डाॅ बीसी राय अवार्ड से अलंकृत किया। 1995 में एसोसिएशन आफ फिजीशियंस ऑफ इंडिया ने गिफ्टेड टीचर अवार्ड से सम्मानित किया।

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