पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • During The Illness Of The Father, It Was Realized That The Relatives Of The Patients Admitted In The Hospital Have Trouble Eating And Drinking, Two Girls Left Their Jobs And Started Doing This Work.

दो दोस्तों की कहानी:पिता की बीमारी के दौरान अहसास हुआ कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को होती है खाने-पीने की परेशानी, दो युवतियां नौकरी छोड़ इसी काम में जुटीं

भोपाल6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को भोजन बांटती शिखा विश्वकर्मा। - Dainik Bhaskar
अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को भोजन बांटती शिखा विश्वकर्मा।
  • जो शहर के अस्पतालों में बाहर से आए मरीजों और उनके परिजनों के लिए बने सहारा

कई बार बीमारी भी कुछ अच्छा काम करने की प्रेरणा देती है। ऐसे ही शहर की दो दोस्त हैं जिन्होंने निर्णय लिया है कि वे नौकरी छोड़कर समाजसेवा करेंगी। इनकी दोस्ती तीन साल पहले इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करने के दौरान हुई थी।

उन्होंने नौकरी छोड़कर अब ऐसे मरीजों के परिजनों के लिए काम करना शुरू किया है। अभी तक ये दोनों विभिन्न अस्पतालों में मरीज के परिजनों को भोजन की व्यवस्था करती थी। मरीज के परिजनों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था करेंगी। इनको प्रेरणा स्वयं के ऊपर आई मुसीबत को देखकर मिली। अभी ये विभिन्न अस्पतालों में एक-एक दिन जाकर भोजन बांटती हैं।

पिता को कैंसर था तब अहसास हुआ कि मरीजों को परेशान होना पड़ता है
शिखा विश्वकर्मा ने बताया कि उसकी मां की मौत हो गई। पिता को पेट का कैंसर हो गया था। उनके इलाज के लिए वे मुंबई स्थित कैंसर हाॅस्पिटल में गई। वहां पर पिता को अस्पताल में भर्ती कर लिया था, लेकिन मरीज के साथ गए दो लोगों में एक व्यक्ति तो मरीज के पास रुक जाता था दूसरे वॉलेंटियर के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में वहां एक स्थानीय स्वयंसेवी संस्था ने मदद की। उसके बाद सोचा कि ऐसी परेशानी भोपाल में दूरदराज के शहरों से आए मरीज के परिजनों को भी होती है। इसको लेकर मन में हमेशा उनके लिए काम करने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो रही है।

सेवा का संकल्प...हम अलग-अलग अस्पतालों में जाकर रोजाना बांटते हैं भोजन
काजल धारवानी ने बताया कि शिखा से दोस्ती एक ईंवेंट कंपनी में काम करने के दौरान हुई। विचारधारा एक सी होने से हमने पहले एक स्वयंसेवी संस्था जनालय शिक्षण एवं प्रशिक्षण समिति बनाई। इसके तहत हम यथाशक्ति अस्पतालों में भोजन बांटते हैं। अब इसे आगे बढ़ते हुए मरीज के साथ रहने वाले अन्य वॉलेंटियर के लिए रहने और खाने की व्यवस्था कर रहे हैं। इसके लिए पापा के दोस्त श्याम विश्वकर्मा ने स्थान उपलब्ध कराया है। उनका न्यू जेल रोड स्थित कॉलोनी में एक फ्लैट है, जिसमें यह काम शुरू कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं...