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इंजीनियरिंग का कमाल:शहर में पहली बार जैक लगाकर 3 फीट ऊपर उठा रहे मकान, क्योंकि घर में भर जाता है नाले का पानी

भोपालएक दिन पहले
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शहर में पहली बार कोलार रोड की राजहर्ष कॉलोनी में नाले के किनारे बने एक मकान को जैक लगाकर 3 फीट ऊपर उठाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
शहर में पहली बार कोलार रोड की राजहर्ष कॉलोनी में नाले के किनारे बने एक मकान को जैक लगाकर 3 फीट ऊपर उठाया जा रहा है।
  • कोलार की राजहर्ष कॉलोनी के एक मकान में हो रहा प्रयोग, हरियाणा से आई है 11 लोगों की टीम
  • कंपनी और मटेरियल का 4 लाख रुपए आ रहा खर्च... पिलर काटकर लगाए सभी 200 जैक

शहर में पहली बार कोलार रोड की राजहर्ष कॉलोनी में नाले के किनारे बने एक मकान को जैक लगाकर 3 फीट ऊपर उठाया जा रहा है। इस मकान में हर बारिश में 3 से 4 फीट पानी भर जाता था, इसलिए पिलर को काटकर जैक लगाकर उसे ऊपर उठाया जा रहा है।

इसके बाद इस 3 फीट में सीमेंट-कांक्रीट का जोड़ लगाया जाएगा। इस काम के लिए हरियाणा की एक कंपनी से 11 लोगों की टीम आई है। 8 सितंबर से इस टीम ने काम करना शुरू किया है। मंगलवार को मकान में सभी 200 जैक लगा दिए गए। अब इसे ऊपर उठाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी 200 जेक 3 फीट ऊपर चढ़ाए जाएंगे और उसके बाद गैप को भरा जाएगा। पूरी प्रक्रिया 25 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। इस काम में 4 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इसमें ढाई लाख रुपए अपलिफ्ट का काम कर रही कंपनी का चार्ज है। बाकी का मटेरियल का खर्चा है।

यूरोप में हैरिटेज बिल्डिंग की शिफ्टिंग में यह टेक्निक
पिलर को काटकर जैक लगाकर मकान को अपलिफ्ट करने के साथ इसे शिफ्ट भी किया जा सकता है। यूरोप में हैरिटेज बिल्डिंग के संरक्षण के लिए इसका उपयोग किया जाता है। पंजाब और हरियाणा में कई लोग जिनके मकानों में पानी भर जाता है, वे इस तरह से मकान को अपलिफ्ट कराते हैं। भोपाल में यह प्रयोग पहली बार हो रहा है। अरेरा कॉलोनी के ई-7 सेक्टर में जहां मकान सड़क से नीचे हो गए हैं, वहां भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
-शैलेंद्र बागरे, वाइस प्रेसीडेंट, कौंसिल ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर्स

लकी साबित हुआ : मकान में आया तब एक वेन खरीदी, आज मेरे पास 10 गाड़ियां
एफ-53, राजहर्ष कॉलोनी, कोलार रोड में रहने वाले उदय पांढरे ने बताया कि वे सर्वधर्म सी सेक्टर में किराए के मकान में रहते थे और एक छोटा सा ऑटोमोबाइल वर्कशॉप चलाते थे। उसमें घाटा होने लगा तो 2005 में सिर्फ 53 हजार रुपए में 20 बाय 30 फीट का छोटा सा प्लॉट लेकर यह मकान बनाया और एक वेन खरीद कर एक्सीलेंस कॉलेज की लड़कियों को पिकअप और ड्रॉप का काम शुरू किया। 3 साल बाद 2008 में एक टवेरा गाड़ी ली। आज मेरे पास 10 गाड़ियां हैं। मकान में हर बारिश में 3 से 4 फीट पानी भर जाता था। मुझे सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए मकान को जैक के जरिए ऊपर उठाने की जानकारी मिली।

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