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BMHRC को बचाने दिग्विजय सिंह का PM को पत्र:पूर्व सीएम का सुझाव भोपाल मेमोरियल अस्पताल को पीजीआई चंडीगढ़ की तर्ज पर बनाए टीचिंग इंस्टीट्यूट; डॉक्टर के लिए हो आकर्षक पैकेज

भोपाल3 महीने पहले
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम को लिखा पत्र - Dainik Bhaskar
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम को लिखा पत्र

भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें पूर्व सीएम ने बीएमएचआरसी को पीजीआई चंडीगढ़ की तर्ज पर टिचिंग इंस्टीट्यूट बनाने को कहा है। साथ ही डॉक्टरों के लिए आकर्षक पैकेज और उनके काम करने के लिए आसान और सुविधाजनक माहौल बनाने की बात की है।

पत्र में पूर्व सीएम ने लिखा है कि वर्ष 2000 में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं वाले 350 बिस्तर के सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल ने देश भर के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों को आकर्षित किया और भोपाल के गैस पीड़ितों के इलाज में सेवा प्रदान की। लेकिन 2010 से भोपाल में निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना होने से विशेषज्ञ डॉक्टर को बेहतर तनख्वाह मिलने पर उन्होंने बीएमएचआरसी छोड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद नए डॉक्टरों की भी भर्ती की गई, लेकिन वह भी लंबे समय तक अस्पताल में नहीं रह सके। इसके बाद नए डॉक्टरों की भी भर्ती की गई लेकिन वे भी लंबे समय तक अस्पताल में नही रह सके। आईसीएमआर द्वारा बीएमएचआरसी को चलाया जा रहा है। अब अस्पताल एक खराब स्थिति में है और सलाहकारों, विशेषज्ञों की भारी कमी से जूझ रहा है।

पूर्व सीएम ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि अस्पताल के पूर्व गौरव को पुनः बनाये रखने के लिए देश की संसद पीजीआई, चंडीगढ़ व जेआईपीएमईआर, पुडुचेरी की तर्ज़ पर एक स्वायत्त पीजी मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित कर सकती है। ऐसा करने पर भोपाल मेमोरियल अस्पताल अच्छे डॉक्टरों को अपनी ओर आकर्षित करेगा, जिसके पास पूर्व से ही उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा और उपकरण हैं। उन्होंने कहा कि एक बार के उपाय के रूप में, वर्तमान में अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप पदों को प्रस्तावित कर पीजीआई मेडिकल कॉलेज में समाहित किया जा सकता है।

यह सुविधा दिए

  • अस्पताल में डॉक्टरों के काम कामकाज में गैर सरकारी संगठन और अन्य स्वार्थी तत्वों का हस्तक्षेप ज्यादा होता है। इससे डॉक्टरों को बचाने का कोई इंतजाम नहीं है। इससे अच्छे प्रोफेशन डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चले जाते है।
  • 2000 में स्थापित अस्पताल की लंबे समय तक नियुक्तियों करने को लेकर कोई नीति ही नहीं बनी। 5 साल तक सरकारी नियंत्रण को लेकर कई बार बदलाव हुआ। अभी आईसीएमआर अस्पताल को संचालित कर रहा है। कुछ नियुक्तियां भी हुई है, लेकिन वह बहुत कम है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में अस्पताल के डॉक्टरों समेत अन्य सभी खाली पदों को भरने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि कामकाज का तरीका ऐसा हो कि डॉक्टरों को इस्तीफा देने को मजबूर ना होना पड़े। इसके बावजूद सुपर स्पेशलिस्ट और स्पेशलिस्ट के कई पद खाली है। इसके चलते मरीजों को सुविधा जनक इलाज नहीं मिल पा रहा है।
  • बीएमएचआरसी को बचाने के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति और उनके लिए आकर्षक पैकेज के इंतजाम हो। यदि इसको पीजीआई चंडीगढ़ की तरह वकया जाए तो कई डॉक्टर यहां आने के लिए आकर्षित हो सकते है।
  • बीएचएमआरसी का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत शानदार है। यदि पोस्ट ग्रेज्युएट की टीचिंग व्यवस्था और डॉक्टरों के कामकाज की शर्तों की एम्स और पीजीआई चड़ीगढ़ की तर्ज पर हो तो इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ लिया जा सकता है। जिस का एम्स भोपाल के सामान मेंटर इंस्टीट्यूट जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिल एजुकेशन एंड रिसर्च पुडुचेरी को बनाया जाए।
  • बीएमएचआरसी में कई सुपर स्पेशलिटी डिपार्टमेंट होने से पीजी टीचिंग इंस्टीट्यूट बनाना संभव है। इसके लिए प्रयास भी हो रहा है। यहां पर एनेस्थिसिया विभाग में डॉक्टर पर्याप्त संख्या में होने से एमडी कोर्स शुरू करने की अनुमति मिल गई है। लेकिन दूसरे विभागों में डॉक्टरों की संख्या कम है।
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