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धर्मों का सार:धर्मग्रंथों के श्लोकों से लेकर आयतों तक में हैं महामारी से बचाव और आत्मबल के सूत्र

भोपाल6 महीने पहले
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  • मानवता की सेवा कर सबके कल्याण के लिए करें प्रार्थना और इबादत

कोरोना महामारी के इस संकटकाल में लोग इससे बचाव के लिए उपचार समेत तमाम सावधानियां बरत रहे हैं। इसी जागरूकता की वजह से संक्रमित हुए लोगों के स्वस्थ होकर लौटने वाले लोगों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है, परंतु इस सबके बीच हमें रोज-रोज हमारे ही बीच के किसी न किसी व्यक्ति के हमसे सदा के लिए बिछुड़ जाने की खबरें भी मिल रही हैं।

ऐसे हालात में अब लोग परमात्मा की ही आस लगाए हुए हैं कि वही उनके जीवन की रक्षा करेंगे। इसके लिए धर्माचार्यों ने धर्मग्रंथों में लिखे गए उन संदेशों, श्लोक, चौपाई, आयत, गुरुवाणी आदि की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिनके पढ़ने और उनको अमल में लाने से हमारे रोग, शोक व अन्य कष्टों का निवारण होना संभव है। ऐसे तमाम लोग हैं, जो धर्मग्रंथों में लिखे गए निर्देशों का पालन, दुआ और प्रार्थना के माध्यम से कर रहे हैं।

देवताओं और गुरु की आराधना करने से बढ़ता है आत्मबल, जिनसे मनुष्य को मिलती है शक्ति

दुर्गा सप्तशती
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रूष्टा तु कामान् सकलानभिष्टानाम।
त्वामाश्रितानां न विपन्नाराणां, त्वामश्रिताह्वाश्रयतां प्रयांति।।
रोग शमन और विश्व कल्याण के लिए इस मंत्र का उल्लेख है। इसके जप से महामारी से लड़ने का बल मिलता है।

जैन... भक्तामर स्त्रोत
तुम पद पंकज पूज-तैं विघ्न रोग टर जाए।
शत्रु मित्रता को धरै,
विष निरविषता थाय।
अर्थ: हे जिनेंद्र देव, आपके चरणरूपी कमलों की पूजा से सभी विघ्न एवं रोग नष्ट हो जाते हैं और विष भी निर्विष हो जाता है।

गुरुग्रंथ साहिब
श्री हरकिशन धिआईए जिस डिठे सभि दुख जाई।
दुख भंजनु तेरा नामु जी, दुख भंजनु तेरा नामु, आठ पहर आराधीऐ पूरन सतिगुर गिआनु रहाउ।
गुरुवाणी में गुरु गोविंद सिंह व अर्जुनदेव ने कहा है कि गुरु हरकिशनजी का नाम स्मरण करने से रोग व दुख दूर होते हैं।

बाइबिल में प्रभु यीशु का संदेश -यहोवा तेरा रक्षक है, यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है,न तो दिन में धूप से न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी, यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा, वही तेरे प्राणों का भी रक्षक है, बस उसका सच्चे मन से स्मरण करना।

धन्वंतरि देव का स्वास्थ्य रक्षा मंत्र
ओम नमो भगवते सुदर्शन धनवंतराय, अमृतकलश हस्ता सकला भय विनाशाय,
सर्व रोग निवारणाय, त्रिलोक पठाय श्रीओम औषधा चक्र नारायण स्वाहा। इस मंत्र का जप करना चाहिए।

बौद्ध ग्रंथ रतनसुत
इदम्पि बुद्धे रतनंएतेन सच्चेन सुवित्थ होतु।
अर्थ-वैशाली नगर में महामारी फैली थी, तब तथागत बुद्ध व भिक्खुसंघ वहां पहुंचे और रतनसुत की देशना की। इससे वहां वर्षा हुई और महामारी का का खात्मा हुआ।

रामचरितमानस
कह तुलसीदास सेवत सुलभ , सेवक हित संतत निकट,
गुनगनत नमत, सुमिरत, जपत सकल संकट विकट।
अर्थ- पवनसुत हनुमान उनका स्मरण करने वाले सेवकों के भयानक संकटों तक का नाश कर देते हैं।

महामारी पर पैगम्बर साहब ने कहा था...

महामारी (वबा) को लेकर एक हदीस है। इसमें पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने फरमाया कि अगर किसी शहर में वबा फैली है तो बंदे सेहत की खातिर वहां न जाए। बंदे जिस शहर में रहते हो और वहां अगर महामारी फैली है तो भी उस शहर को छोड़कर न जाए। इससे दूसरे बंदों को खतरा होगा। ऐसी सूरत में खुद को बाकी लोगों से अलग कर लो। यानी क्वारंटीन हो जाए। ये उल्लेख बुखारी शरीफ में 5739 में हैं।

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