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टमाटर की तीन गुना ज्यादा आवक:फल अनुसंधान केंद्र ने कहा- टमाटर फेंकें नहीं किसान, हमारे पास लेकर आएं, हम कैचअप और पाउडर बनाकर देंगे

भोपाल10 दिन पहले
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  • होशंगाबाद, सीहोर जिले के नाराज किसान सड़क पर फेंक रहे टमाटर
  • किसानों को लागत से आधे दाम भी नहीं मिल रहे, असर सड़कों पर फेंकने को मजबूर हुए

कभी दामों में सुर्खी दिखाने वाले टमाटर को फिलहाल वाजिब दाम नहीं मिल रहे। इस कारण भोपाल के आसपास किसान इसे फेंकने को मजबूर हुए हैं। तीन गुनी आवक का नतीजा ये है कि शहर में 5 रुपए किलो टमाटर मिल रहा है। करोंद मंडी में इसकी आवक तीन गुनी है। उपज के मुताबिक दाम नहीं मिलने पर होशंगाबाद जिले के गांवों और सीहोर जिले के बुधनी, बकतरा, जैत, बाड़ी, बरेली समेत कई अन्य गांव में किसान टमाटर सड़क पर फेंक रहे हैं। किसानों का कहना है कि हमें 1 कैरेट में लागत 90 रुपए पड़ती है लेकिन बाजार में इसके बदले 40 से 50 रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं।

आम दिनों में 500 कैरेट, लेकिन अभी हो रही 1500 कैरेट की आवक

  • 90 रुपए आती है एक कैरेट टमाटर की कीमत।
  • 50 रुपए तक मिल रहे किसानों को इनके दाम।
  • 1500 कैरेट की आवक है यहां पर रोजाना।

हबीबगंज सब्जी मंडी के थोक व्यापारी अजमल खान कहते हैं कि आम दिनों में टमाटर की 500 कैरेट की आवक होती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से रोजाना 1500 कैरेट आवक हो रही है।

नुकसान से बच सकते हैं किसान
ईंटखेड़ी स्थित फल अनुसंधान केंद्र के चीफ साइंटिस्ट डॉ. एमएस परिहार कहते हैं कि किसान टमाटर को फेंकने के बदले केंद्र में लाकर नुकसान से बच सकते हैं। यहां टमाटर का कैचअप और पाउडर बनाया जाता है। यहां रोजाना 5 क्विंटल टमाटर से विभिन्न प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। किसानों को निशुल्क ट्रेनिंग देने का भी इंतजाम है।

उपज के दाम नहीं मिल रहे
किसान मस्तान सिंह मारण के मुताबिक एक कैरेट में 30 किलो टमाटर होता हैं। 1 किलो पर कुल लागत 3 रुपए आ रही है। इस हिसाब से एक कैरेट हमें 90 रुपए में पढ़ रही है लेकिन बाजार में दाम 50 या 60 रुपए से ज्यादा नहीं मिल रहे हैं तो हम प्रति कैरेट 30 से 40 रुपए का घाटा कैसे सह सकते हैं।

क्यों बनी स्थिति; फरवरी में ही तेज गर्मी से पैदावार में हुआ इजाफा
विशेषज्ञ एवं सेंट्रल इंडिया फार्मर ऑर्गनाइजेशन के सीईओ योगेश द्विवेदी कहते हैं कि इस बार फरवरी के अंत से ही तेज गर्मी पड़ने लगी। पिछले साल की तुलना में मार्च, अप्रैल में भी तापमान ज्यादा है। इस कारण फूल से फल बनने की प्रक्रिया भी तेजी से हुई। इस वजह से पैदावार में इजाफा हुआ। प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में टमाटर की पैदावार तीन गुनी ज्यादा हुई है।

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