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पॉवरफुल बनेंगी रहवासी सोसायटी:सांसद-विधायक निधि से मिलेगा फंड, बिजली बिल और प्राॅपर्टी टैक्स वसूलकर देने पर मिलेगा स्पेशल इंसेंटिव

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: शैलेंद्र चौहान
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नई पॉलिसी- नगरीय निकायों में ही होंगे रजिस्ट्रेशन, एसडीएम के पास होंगे सुनवाई और कार्रवाई के अधिकार - Dainik Bhaskar
नई पॉलिसी- नगरीय निकायों में ही होंगे रजिस्ट्रेशन, एसडीएम के पास होंगे सुनवाई और कार्रवाई के अधिकार

राज्य सरकार प्रदेश में रहवासी सोसायटी को ताकतवर बनाने जा रही है। सोसायटी के विकास के लिए रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को पहली बार सांसद और विधायक अपनी निधि से फंड दे सकेंगे। रहवासी सोसायटी प्राॅपर्टी टैक्स, बिजली बिल और स्वच्छता शुल्क वसूलने का काम भी करेगी। इसकी जिम्मेदारी लेने वाली सोसायटी को विकास के लिए स्पेशल इंसेंटिव भी देगी।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन की नई नीति का का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे सीनियर सेक्रेटरी की कमेटी में भेजा गया है। इस पर सहमति के बाद नई नीति को मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। राज्य शासन आरडब्ल्यूए को विकास के लिए जरूरत के अनुसार वित्तीय मदद दे सकेगी।

ऐसे समझिए सोसायटी के नियमों को ... नियम तोड़ने पर मकान या फ्लैट मालिक पर कार्रवाई होगी

  • शहरों में अपार्टमेंट या कॉलोनी में रहने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए सोसायटी का गठन करेंगे। इसे रेजिडेंस वेलफेयर एसोसियेशन (आरडब्ल्यूए) कहा जाएगा, जो सोसायटी के रोजाना कामकाज से लेकर उसके संचालन की सारी जिम्मेदारी उठाएगा।
  • आरडब्ल्यूए के प्रावधान सोसायटी के लिए नियम कानून की तरह होंगे। किसी भी मकान या फ्लैट मालिक के खिलाफ नियमों को तोड़ने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
  • आरडब्ल्यूए मेंटनेंस, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सिक्योरिटी, बिजली, पानी, सौंदर्यीकरण और पार्किंग जैसे सभी नियमित काम संभालेगी। इसका तय शुल्क रहवासी देंगे।
  • एसोसिएशन में 11 पदाधिकारी होंगे। इसका कार्यकाल दो साल का होगा। सबसे खास है कि पदाधिकारियों में 50 फीसदी महिलाओं को रखना होगा।

शहर का मास्टर प्लान तैयार करने में टीएंडसीपी सुझाव लेगा

  • नगरीय विकास विभाग या नगर निगमों में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।
  • मकान या फ्लैट बेचने के दौरान आरडब्ल्यूए से एनओसी लेना पड़ेगा। संपत्ति मालिक को आवेदन देना होगा। 15 दिन में एनओसी देना जरूरी।
  • शहर का मास्टर प्लान तैयार करने में टीएंडसीपी आरडब्ल्यूए के सुझावों को लेगा। एसोसिएशन गलत प्रावधान पर आपत्ति उठा सकेगा।
  • सोसायटी में विवाद पर सुनवाई के अधिकार अब एसडीएम के पास रहेंगे।
  • आरडब्ल्यूए के पास सोसायटी की सड़क, स्ट्रीट लाइट और फुटपाथ जैसे विकास के काम कराने के लिए एजेंसी को चुनने का अधिकार रहेगा।
  • आरडब्ल्यूए किसी भी हिस्से में अतिक्रमण नहीं होने देना होगा।

पॉलिसी की जरूरत...3 साल पुराने नियमों पर अमल नहीं

बहुमंजिला इमारतों में सोसायटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। शासन ने मप्र प्रकोष्ठ स्वामित्व नियम 2019 का गजट नोटिफिकेशन 25 अक्टूबर को जारी किया था। सोसायटी के नियम 19 साल बाद बदले थे। इसके मुताबिक इमारत की लॉबी, सीढ़ी, एलिवेटर्स, और खुली जगह पर फर्नीचर, पैकेज और कोई वस्तु नहीं रखी जा सकती है। निवासी कोई भी शोर वाले यंत्रों का प्रयोग नहीं करेंगे। सोसायटी की तय जगह के अलावा बिजली, टेलीफोन के तार, डिश एंटिना, मशीन या एसी नहीं लगा सकेंगे। सोसायटी के पास सारे पॉवर होंगे। कई विसंगतियों के कारण अमल नहीं हो रहा है।

ये नहीं कर सकेगी एसोसिएशन
एसोसिएशन किसी रहवासी के प्रापर्टी विवाद में दखल नहीं देगी। इसका काम सोसायटी में सुविधा, मेंटेनेंस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा तक सीमित रहेगा।

कोट्स

प्रदेश में आरडब्ल्यूए के लिए नई पॉलिसी का ड्राफ्ट बनाया गया है। सोसायटी के संचालन के लिए कई अधिकार बढ़ाए जाएंगे।
- भरत यादव, आयुक्त, नगरीय विकास